ब्रेकिंग
Bihar weather : बिहार में मौसम का डबल अटैक! 19 जिलों में बारिश-आंधी का अलर्ट, इन इलाकों में अभी भी लू का कहरBihar News : बिहार NEET विवाद में जांच तेज, EOU की SIT करेगी तीन FIR की पड़ताल; DIG रैंक अधिकारी संभालेंगे कमानBharat Tiwari Encounter: 7 दिन बाद बदला मामला, पिता और भाई को राहत; जानें पुलिस ने क्यों हटाया नामBihar News: बिहार में शिक्षकों के तबादले की नई नीति लागू, 7 प्राथमिकता क्रम से होगा ट्रांसफर; जानें किसे मिलेगी पहली प्राथमिकताBihar News: भरत तिवारी के समर्थन में बोले थे 'नौकरी छोड़ दूंगा', अब सिपाही आशीष तिवारी की जाएगी नौकरी? पुलिस ने शुरू की कार्रवाईBihar weather : बिहार में मौसम का डबल अटैक! 19 जिलों में बारिश-आंधी का अलर्ट, इन इलाकों में अभी भी लू का कहरBihar News : बिहार NEET विवाद में जांच तेज, EOU की SIT करेगी तीन FIR की पड़ताल; DIG रैंक अधिकारी संभालेंगे कमानBharat Tiwari Encounter: 7 दिन बाद बदला मामला, पिता और भाई को राहत; जानें पुलिस ने क्यों हटाया नामBihar News: बिहार में शिक्षकों के तबादले की नई नीति लागू, 7 प्राथमिकता क्रम से होगा ट्रांसफर; जानें किसे मिलेगी पहली प्राथमिकताBihar News: भरत तिवारी के समर्थन में बोले थे 'नौकरी छोड़ दूंगा', अब सिपाही आशीष तिवारी की जाएगी नौकरी? पुलिस ने शुरू की कार्रवाई

धनबाद सिंह मेंशन में दो फाड़, दो गुटों में बंटा मजदूर यूनियन

DHANBAD: धनबाद का सिंह मेंशन मजदूर संगठनों के पेच में फंसकर रह गया है। पूर्व विधायक संजीव सिंह के जेल जाने के बाद बाहर घर मे कुछ ठीक नहीं चल रहा है। इसका अंदाजा इसी बात से लगा

धनबाद सिंह मेंशन में दो फाड़, दो गुटों में बंटा मजदूर यूनियन
Jitendra Vidyarthi
2 मिनट

DHANBAD: धनबाद का सिंह मेंशन मजदूर संगठनों के पेच में फंसकर रह गया है। पूर्व विधायक संजीव सिंह के जेल जाने के बाद बाहर घर मे कुछ ठीक नहीं चल रहा है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब सिंह मेंशन से दो मजदूर संगठनों का संचालन होगा। 


एक ओर जहां जनता मजदूर संघ की बागडोर सिद्धार्थ गौतम उर्फ मनीष सिंह संभाल रहे हैं तो दूसरी ओर संजीव सिंह पत्नी रागनी सिंह जनता श्रमिक संघ की बागडोर संभाल रही हैं। रविवार को संजीव सिंह समर्थकों ने औपचारिक घोषणाएं कर दी। साथ उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि सिर्फ कोयला खनन में ही नहीं बल्कि सभी सेक्टर में जनता श्रमिक संघ मजदूरों के हक की लड़ाई लड़ेगी।


वही इस घोषणा से सिंह मेंशन परिवार खुद को अलग रखे हुए था। हालांकि रागनी सिंह इस कार्यक्रम में नज़र नहीं आई। भले उनके समर्थकों ने इस कार्यक्रम की पूरी बागडोर संभाली। वही सूत्रों की माने तो कही न कही इस संगठन के गठन से परिवार में दूरियां काफी बढ़ सकती है। 


जिसका खामियाजा कही न कही आने वाले चुनाव में देखने को मिल सकता है। बहरहाल अब यह देखना दिलचस्प होगा कि एक ही घर में दो मजदूरों संगठनों के संचालन से मजदूरों को कितना लाभ मिलता है और इसका राजनीतिक फायदा इस घराने को कितना मिल पाता है।