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Bharat Tiwari Encounter: 7 दिन बाद बदला मामला, पिता और भाई को राहत; जानें पुलिस ने क्यों हटाया नाम

भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है। पुलिस ने दर्ज FIR से उनके पिता और भाई का नाम हटा दिया है। वहीं न्यायिक जांच आयोग मामले की पड़ताल कर रहा है।

Bihar news
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Tejpratap
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Bihar News: बिहार के भोजपुर जिले के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में उनके परिवार को बड़ी राहत मिली है। पुलिस पर फायरिंग के आरोप में दर्ज एफआईआर से भरत तिवारी के पिता और भाई का नाम हटा दिया गया है। दोनों पर लगे आरोपों की समीक्षा के बाद पुलिस ने यह कदम उठाया है।


शाहपुर थाना क्षेत्र में दर्ज इस मामले में पहले भरत तिवारी उर्फ भरत भूषण तिवारी, उनके पिता काशीनाथ तिवारी और भाई चंदन तिवारी को आरोपी बनाया गया था। उन पर पुलिस टीम पर हमला करने, आर्म्स एक्ट और भरत तिवारी को संरक्षण देने जैसे आरोप लगाए गए थे। अब केस के सुपरविजन के बाद पिता और भाई का नाम प्राथमिकी से हटा दिया गया है।


भोजपुर के पुलिस अधीक्षक राज ने इस कार्रवाई की पुष्टि की है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर यह निर्णय लिया गया। हालांकि भरत तिवारी एनकाउंटर मामले की जांच अभी जारी है।


17 जून को हुई थी कथित मुठभेड़

बता दें कि 17 जून की सुबह भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में पुलिस और भरत तिवारी के बीच कथित मुठभेड़ हुई थी। पुलिस के अनुसार, इस दौरान गोलीबारी हुई, जिसमें भरत तिवारी घायल हो गए थे। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी।


घटना के बाद मामला काफी सुर्खियों में आया। भरत तिवारी के परिवार ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया था कि उन्हें सरेंडर करने के बाद गोली मारी गई। परिवार की शिकायत के आधार पर पुलिस अधिकारियों और जवानों के खिलाफ हत्या का मामला भी दर्ज किया गया है।


न्यायिक आयोग ने शुरू की जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार की ओर से एक सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग का गठन किया गया है। आयोग के अध्यक्ष रिटायर्ड जस्टिस विनोद कुमार सिन्हा ने बिलौटी पहुंचकर जांच शुरू कर दी है।


जांच के दौरान उन्होंने भरत तिवारी के परिवार से मुलाकात की और उनकी बातों को सुना। इसके बाद कथित मुठभेड़ स्थल का भी निरीक्षण किया गया। परिवार ने आयोग के सामने घटना को लेकर कई सवाल उठाए और निष्पक्ष जांच की मांग की।


जस्टिस विनोद कुमार सिन्हा ने परिवार को भरोसा दिलाया कि पूरे मामले की गहराई से जांच की जाएगी और सभी तथ्यों को सामने लाने का प्रयास होगा। उन्होंने बताया कि जांच प्रक्रिया के तहत सभी संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए जाएंगे।


परिवार ने उठाए थे कई सवाल

भरत तिवारी के परिजनों का कहना है कि घटना की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और उन्हें न्याय मिलना चाहिए। परिवार लगातार पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाता रहा है। वहीं पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की जांच कानून के अनुसार की जा रही है।


अब एफआईआर से पिता और भाई का नाम हटने के बाद परिवार को राहत मिली है। हालांकि एनकाउंटर की सच्चाई सामने लाने के लिए न्यायिक जांच पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।


जांच आयोग की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि 17 जून की घटना में वास्तव में क्या परिस्थितियां थीं और किन तथ्यों के आधार पर कार्रवाई हुई।