ब्रेकिंग
पश्चिम बंगाल में डकैती को अंजाम देने वाला अपराधी समस्तीपुर से गिरफ्तार, लूटे गए सोने के गहने भी बरामदसहरसा में दर्दनाक हादसा: सेप्टिक टैंक में गिरे 3 मासूम, एक बच्ची की मौतपंचायत से नहीं बनी बात तो टावर पर चढ़ गई प्रेमिका, शादी की मांग पर अड़ी, पुलिस ने संभाला मोर्चाबिहार में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, एक SP समेत 5 IPS और 8 DSP का तबादला, देखिये पूरी लिस्ट बिहार में विज्ञान-उद्योग और बॉर्डर सुरक्षा को मजबूत करने की तैयारी, IG Border सहित कई पदों को भरने की मिली मंजूरी पश्चिम बंगाल में डकैती को अंजाम देने वाला अपराधी समस्तीपुर से गिरफ्तार, लूटे गए सोने के गहने भी बरामदसहरसा में दर्दनाक हादसा: सेप्टिक टैंक में गिरे 3 मासूम, एक बच्ची की मौतपंचायत से नहीं बनी बात तो टावर पर चढ़ गई प्रेमिका, शादी की मांग पर अड़ी, पुलिस ने संभाला मोर्चाबिहार में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, एक SP समेत 5 IPS और 8 DSP का तबादला, देखिये पूरी लिस्ट बिहार में विज्ञान-उद्योग और बॉर्डर सुरक्षा को मजबूत करने की तैयारी, IG Border सहित कई पदों को भरने की मिली मंजूरी

यूनिफॉर्म सिविल कोड पर आज सुनवाई, दिल्ली हाईकोर्ट करेगा याचिका पर सुनवाई

DELHI : अयोध्या विवाद समेत तमाम बड़े मामलों पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद अब सबकी नजरें कॉमन सिविल कोड यानी समान नागरिक संहिता से जुड़े मामले पर टिक गई हैं। यूनिफॉर्म सिविल कोड पर आज दिल्ली

FirstBihar
Khushboo Gupta
2 मिनट

DELHI : अयोध्या विवाद समेत तमाम बड़े मामलों पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद अब सबकी नजरें कॉमन सिविल कोड यानी समान नागरिक संहिता से जुड़े मामले पर टिक गई हैं। यूनिफॉर्म सिविल कोड पर आज दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्रीय गृह मंत्रालय और विधि आयोग को नोटिस जारी कर पक्ष रखने को कहा था। 


बीजेपी नेता और अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय सहित अन्य याचिकाकर्ताओं की तरफ से दायर की गई जनहित याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट आज सुनवाई करेगा। अश्विनी कुमार उपाध्याय ने अपनी याचिका में सभी धर्मों और संप्रदायों के रीति-रिवाजों को ध्यान में रखते हुए यूनिफॉर्म सिविल कोड का मसौदा तैयार करने की मांग की है। 


याचिकाकर्ता के मुताबिक अनुच्छेद 44 का उद्देश्य समान नागरिक संहिता लागू करना है जो राष्ट्रीय एकता के साथ-साथ आपसी भाईचारा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहले ही एक टिप्पणी कर चुका है कि संविधान का निर्माण करने वालों को उम्मीद थी कि भारत में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता सुनिश्चित कराने का प्रयास होगा लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।