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Suvendu Adhikari : भवानीपुर या नंदीग्राम? जानिए CM शुभेंदु अधिकारी ने कौन सी सीट छोड़ी; क्या रहा है जीत-हार में वोटों का अंतर; हर सवाल का यह रहा जवाब

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक मोड़ देखने को मिल रहा है। 2026 विधानसभा चुनाव में दो सीटों—भवानीपुर और नंदीग्राम—से जीत दर्ज करने के बाद सुवेंदु अधिकारी अब एक सीट छोड़ने की तैयारी में हैं।

Suvendu Adhikari,
Suvendu Adhikari,
© FILE PHOTO
Tejpratap
Tejpratap
4 मिनट

Suvendu Adhikari : पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर सुर्खियों में है, जहां नेता विपक्ष से जुड़े वरिष्ठ नेता Suvendu Adhikari को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। बताया जा रहा है कि उन्होंने अपने दो विधानसभा क्षेत्रों—नंदीग्राम और भवानीपुर—में से एक सीट को छोड़ने का मन बना लिया है और उन्होंने संकेत दिया है कि वह भवानीपुर सीट को बरकरार रख सकते हैं। इस फैसले ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।


सूत्रों के अनुसार, अधिकारी ने 2026 विधानसभा चुनाव में दो सीटों से चुनाव लड़ा था और दोनों ही सीटों पर जीत हासिल की थी। इनमें से भवानीपुर सीट पर उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री Mamata Banerjee को 15,105 मतों के अंतर से हराया था। उन्हें 73,917 वोट मिले थे, जबकि ममता बनर्जी को 58,812 वोट प्राप्त हुए थे। वहीं नंदीग्राम सीट पर भी उन्होंने पहले हुए चुनाव में जीत दर्ज की थी, हालांकि वहां जीत का अंतर अपेक्षाकृत कम रहा था।


राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि शुभेंदु अधिकारी ने हाल ही में संकेत दिया है कि वह जल्द ही 10 दिनों के भीतर किसी एक विधानसभा सीट से इस्तीफा देंगे। उन्होंने पहले ही सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट किया था कि दोनों सीटों को एक साथ बनाए रखना संभव नहीं होगा और इस पर अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व करेगा। उनके इस बयान के बाद से ही यह कयास लगाए जा रहे थे कि वह किस सीट को छोड़ेंगे और किसे बरकरार रखेंगे।


माना जा रहा है कि भवानीपुर सीट को लेकर उनका रुझान अधिक मजबूत है, क्योंकि उन्होंने इसी सीट से ममता बनर्जी को चुनावी मुकाबले में पराजित किया था। यह जीत उनके राजनीतिक करियर के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। भवानीपुर क्षेत्र लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस का मजबूत गढ़ रहा है, ऐसे में यहां से मिली जीत भाजपा और विपक्ष दोनों के लिए राजनीतिक संदेश लेकर आई थी।


वहीं नंदीग्राम सीट भी शुभेंदु अधिकारी के लिए भावनात्मक और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है। 2021 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने इसी सीट से ममता बनर्जी को हराकर राज्य की राजनीति में बड़ा उलटफेर किया था। हालांकि, हाल के चुनावी परिदृश्य में उनकी रणनीति में बदलाव देखा जा रहा है, जिसमें वह एक ही सीट पर फोकस करना चाहते हैं।


राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एक सीट छोड़ने का निर्णय प्रशासनिक और रणनीतिक दोनों दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। इससे न केवल क्षेत्रीय नेतृत्व मजबूत होता है, बल्कि आगामी चुनावों के लिए पार्टी संगठन को भी स्पष्ट दिशा मिलती है। अधिकारी ने यह भी कहा है कि वह दोनों क्षेत्रों के मतदाताओं के प्रति अपनी जिम्मेदारी को नजरअंदाज नहीं करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया है कि चाहे कोई भी सीट छोड़ी जाए, विकास और जनता के मुद्दों पर उनका ध्यान दोनों क्षेत्रों में बराबर बना रहेगा।


इस पूरे घटनाक्रम के बीच पश्चिम बंगाल की राजनीति में फिर से हलचल तेज हो गई है। अब सभी की नजर इस पर टिकी है कि आधिकारिक रूप से वह किस सीट से इस्तीफा देते हैं और आगामी उपचुनावों में इसका राजनीतिक असर किस तरह देखने को मिलेगा।

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