बड़ी खबर: सुप्रीम कोर्ट ने UGC के नए नियमों पर लगाई रोक, केंद्र की मोदी सरकार को नोटिस जारी किया

UGC Supreme Court News: यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ जारी विरोध के बीच सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला लिया है। कोर्ट ने नए नियमों पर अंतरिम रोक लगाते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है।

1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Thu, 29 Jan 2026 01:17:50 PM IST

UGC Supreme Court News

सवर्णों को बड़ी राहत - फ़ोटो Google

UGC Supreme Court News: देशभर में यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ जारी प्रदर्शन के बीच सुप्रीम कोर्ट में आज इस मामले पर सुनवाई की है। मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने UGC के नए नियमों पर रोक लगा दी है और केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इस मामले पर अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी।


दरअसल, 29 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट में यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई शुरू हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील ने दलील दी कि संविधान सभी नागरिकों को समान संरक्षण देता है, लेकिन यूजीसी के नए नियम समाज में भ्रम और भेदभाव को बढ़ाने वाले हैं। वकील ने कहा कि इन नियमों में केवल OBC, SC और ST का उल्लेख किया गया है, जिससे यह धारणा बनती है कि भेदभाव सिर्फ इन्हीं वर्गों के साथ होता है।


याचिकाकर्ताओं के वकील ने नियम 3(c) पर सवाल उठाते हुए कहा कि भेदभाव की परिभाषा पहले से ही नियम 3(e) में मौजूद है, ऐसे में अलग से 3(c) जोड़ने की कोई आवश्यकता नहीं थी। यह प्रावधान समाज में विभाजन पैदा कर सकता है। इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि अदालत यह जांच कर रही है कि क्या नए नियम संविधान के अनुच्छेद 14 यानी समानता के अधिकार के अनुरूप हैं या नहीं।


याचिकाकर्ता के वकील ने नियम 3(c) पर रोक लगाने की मांग की। इस दौरान CJI सूर्यकांत ने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि कोई दक्षिण भारतीय छात्र उत्तर भारत के किसी कॉलेज में पढ़ने आता है और उसके साथ भेदभाव होता है, तो क्या उसकी शिकायत 3(e) के तहत आएगी? इस पर वकील ने सहमति जताते हुए कहा कि यही कारण है कि कुछ जातियों के लिए अलग धारा बनाने की जरूरत नहीं थी।


सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए नियमों पर फिलहाल रोक लगा दी है और आदेश दिया है कि अभी 2012 के पुराने नियम ही लागू रहेंगे। अदालत ने केंद्र सरकार और यूजीसी को नोटिस जारी कर 19 मार्च 2026 तक जवाब मांगा है। अगली सुनवाई भी इसी दिन होगी।


नियमों पर रोक लगाते हुए CJI सूर्यकांत ने गंभीर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यह विचार करना जरूरी है कि क्या हम जाति-विहीन समाज की ओर बढ़ रहे हैं या पीछे जा रहे हैं। उन्होंने आशंका जताई कि नए नियमों से अलग-अलग हॉस्टल जैसी स्थिति बन सकती है, जो समाज की एकता के लिए ठीक नहीं है। जस्टिस बागची ने भी कहा कि नीतियां समाज और देश में एकता को मजबूत करने वाली होनी चाहिए। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि सरकार के जवाब के बाद विशेषज्ञ समिति के गठन पर विचार किया जा सकता है।


बता दें कि नए नियमों के तहत हर कॉलेज में ईक्वल अपॉर्च्यूनिटी सेंटर (EOC) की स्थापना अनिवार्य है, जो वंचित और पिछड़े छात्रों को पढ़ाई, फीस और भेदभाव से जुड़ी सहायता देगा। प्रत्येक कॉलेज में एक समता समिति बनेगी, जिसके अध्यक्ष कॉलेज प्रमुख होंगे और इसमें SC, ST, OBC, महिलाएं और दिव्यांग सदस्य शामिल होंगे। इस समिति का कार्यकाल दो वर्ष का होगा।


इसके अलावा कॉलेज में इक्वलिटी स्क्वाड गठित किया जाएगा, जो भेदभाव की घटनाओं पर नजर रखेगा। किसी भी शिकायत पर 24 घंटे के भीतर बैठक करना और 15 दिन में रिपोर्ट देना अनिवार्य होगा। कॉलेज प्रमुख को 7 दिन में कार्रवाई शुरू करनी होगी। EOC हर छह महीने में कॉलेज को रिपोर्ट देगा और कॉलेज को हर साल जातीय भेदभाव पर यूजीसी को रिपोर्ट भेजनी होगी।


यूजीसी राष्ट्रीय निगरानी समिति बनाएगा। नियमों का उल्लंघन होने पर कॉलेज की ग्रांट रोकी जा सकती है, डिग्री, ऑनलाइन और डिस्टेंस कोर्स पर रोक लग सकती है और गंभीर मामलों में कॉलेज की मान्यता भी रद्द की जा सकती है। यही वजह है कि सवर्ण जाति के लोग और संगठन इसका विरोध जता रहे हैं और नए कानून को वापस लेने की मांग कर रहे हैं।