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महिला के सलवार का नाड़ा खोलना सिर्फ रेप की तैयारी नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला, हाईकोर्ट के आदेश को पलटा

सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि महिला के कपड़े खोलने की कोशिश केवल छेड़छाड़ नहीं बल्कि रेप का प्रयास है। अदालत ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को रद्द कर आरोपियों पर गंभीर धाराएं बहाल कर दीं और जजों के लिए संवेदनशीलता संबंधी दिशा-निर्देश..

दिल्ली न्यूज
HC के आदेश के SC ने पलटा
© सोशल मीडिया
Jitendra Vidyarthi
4 मिनट

DESK: यौन अपराधों से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने एक बहुत महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। देश की सर्वोच्च अदालत ने साफ-साफ कहा है कि अगर कोई व्यक्ति किसी महिला को गलत इरादे से पकड़ता है और उसके सलवार का नाड़ा खोलने की कोशिश करता है, तो इसे सिर्फ छेड़छाड़ या “रेप की तैयारी” नहीं माना जाएगा, बल्कि यह सीधे-सीधे रेप का प्रयास (Attempt to Rape) है। 


नाराज सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के मार्च 2025 के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें एक युवती को गलत नियत से पकड़ कर उसकी सलवार का नाड़ा खोलने की घटना को केवल महिला की लज्जा भंग करने का मामला माना गया था और अपराध को कम गंभीर माना गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे गंभीर कृत्य को हल्का अपराध मानना न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।


क्या था पूरा मामला?

इलाहाबाद हाईकोर्ट में आया मामला गंभीर मामला था. इसमें आरोपी पर एक महिला को गलत नियत से पकड़ने और उसकी सलवार खोलने की कोशिश करने का आरोप लगा था। मामले की सुनवाई के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि यह “रेप का प्रयास” नहीं बल्कि “रेप की तैयारी” है. हाईकोर्ट ने इसे 'रेप का प्रयास' मानने से इनकार कर दिया था और कहा था कि यह कृत्य 'रेप की तैयारी' के अंतर्गत आता है, जिसके लिए सजा कम होती है। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद देशभर में नाराज़गी फैल गई। महिला संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों ने कहा कि इससे यौन अपराधों को कम गंभीर दिखाने का गलत संदेश जाएगा।


सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान

इस विवादित फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया।  एनजीओ ‘वी द वुमन’ की संस्थापक और वरिष्ठ वकील शोभा गुप्ता के पत्र के बाद अदालत ने मामले की सुनवाई शुरू की। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने की।


सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का फैसला पूरी तरह खारिज कर दिया और आरोपियों पर पॉक्सो एक्ट के तहत रेप के प्रयास का गंभीर आरोप फिर से लागू कर दिया। अदालत ने कहा कि जजों को यौन अपराधों के मामलों में संवेदनशील होना चाहिए। कोर्ट के लिए पीड़िता की स्थिति और मानसिक हालत को समझना जरूरी है. ऐसे मामलों में सिर्फ कानून की भाषा नहीं बल्कि मानवीय संवेदना भी जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोई भी फैसला तभी न्यायपूर्ण होगा जब अदालत पीड़िता की कमजोरियों और मामले की वास्तविकता को समझे।


आगे के लिए बड़ा कदम

सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ फैसला पलटने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि भविष्य के लिए दिशा-निर्देश बनाने का आदेश भी दिया। इसके लिए अदालत ने नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी को विशेषज्ञों की एक समिति बनाने को कहा है। यह समिति जजों को यौन अपराधों के मामलों में ज्यादा संवेदनशील बनाने के लिए गाइडलाइन तैयार करेगी। अदालत ने यह भी कहा कि ये नियम आसान भाषा में हों, ताकि समझने में परेशानी न हो।

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