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Success Story: पिता बेचते थे फल, बेटे ने खड़ी कर दी 400 करोड़ की कंपनी; जानिए कैसे बदली किस्मत

मेहनत और लगन से कोई भी सपना सच किया जा सकता है। रघुनंदन श्रीनिवास कामथ ने साधारण शुरुआत से नेचुरल्स आइसक्रीम को 400 करोड़ का ब्रांड बना दिया, और अपनी कहानी से युवाओं को प्रेरणा दी।

Success Story: पिता बेचते थे फल, बेटे ने खड़ी कर दी 400 करोड़ की कंपनी; जानिए कैसे बदली किस्मत
Tejpratap
Tejpratap
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SUCCESS STORY: कहते हैं जहां चाह है, वहां राह है। अगर मेहनत और लगन हो, तो गरीबी भी रास्ते में रोड़ा नहीं बन सकती। यह बात बिल्कुल सही साबित होती है रघुनंदन श्रीनिवास कामथ की कहानी से। कामथ का जन्म कर्नाटक के मंगलुरु के एक छोटे गांव में हुआ। उनके पिता फल बेचते थे और बचपन से ही कामथ अपने पिता के काम में हाथ बंटाते रहे। यही अनुभव उनके करियर में बहुत मददगार साबित हुआ।


कामथ ने पढ़ाई के साथ-साथ परिवार के व्यवसाय से भी सीख ली और कभी हार नहीं मानी। उन्होंने अपने सपनों को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत की और आज उनके पास करोड़ों रुपये का कारोबार है।


शुरुआत: छोटी दुकान से बड़ा ब्रांड

कामथ ने 1984 में सिर्फ 200 वर्ग फुट की एक छोटी दुकान से व्यवसाय की शुरुआत की। उस समय उनके पास सिर्फ चार कर्मचारी और 10 आइसक्रीम फ्लेवर थे। उन्होंने हमेशा ताजगी और प्राकृतिक सामग्री – फल, दूध और चीनी – का इस्तेमाल किया।


शुरुआत में ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए पाव भाजी मुख्य व्यंजन और आइसक्रीम साइड आइटम के रूप में बेची जाती थी। दुकान के स्वाद और गुणवत्ता की वजह से यह जल्दी ही लोकप्रिय हो गई।


मुंबई के जुहू में उनकी छोटी दुकान पहले साल में ही 5 लाख रुपये की कमाई करने लगी। बाद में कामथ ने पाव भाजी बेचने को बंद किया और सिर्फ आइसक्रीम व्यवसाय पर ध्यान केंद्रित किया। अब उनके पास पूरे भारत में 135 स्टोर हैं, जहां 20 से अधिक फ्लेवर की आइसक्रीम उपलब्ध है।


गुणवत्ता और स्वाद पर ध्यान

कामथ ने हमेशा प्राकृतिक सामग्री और ताजगी को प्राथमिकता दी। उन्होंने नकली रंग और फ्लेवर से दूरी बनाई। ग्राहकों की पसंद के अनुसार नए फ्लेवर बनाए गए, जैसे आम पिकल से प्रेरित ‘वाइल्ड आम’।

कामथ की पत्नी अन्नपूर्णा और उनके बेटे सिद्धांत और श्रीनिवास भी कंपनी में शामिल हैं। वित्त वर्ष 2024 में नेचुरल्स आइसक्रीम का टर्नओवर लगभग 380 करोड़ रुपये रहा। रोजाना लगभग 20 टन आइसक्रीम बिकती है।


अंतिम विदाई

मई 2024 में रघुनंदन श्रीनिवास कामथ का 70 साल की उम्र में निधन हो गया। उनकी मेहनत और संघर्ष की कहानी आज भी लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने यह साबित किया कि गरीब परिवार से आने के बावजूद मेहनत, सही सोच और लगन से कोई भी व्यक्ति बड़ा व्यवसाय खड़ा कर सकता है।