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सास-ससुर की नहीं की सेवा तो खानी पड़ेगी जेल की हवा, केंद्र सरकार ने प्रस्ताव को दी मंजूरी

DELHI: आज के जमाने में जहां बुजुर्गों को बोझ समझा जाता है. बेटा-बेटी और परिवार के रहने के बावजूद उन्हें ओल्ड एज होम में रहने के लिए मजबूर किया जाता है. तो वहीं अब सरकार बुजुर्

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Khushboo Gupta
2 मिनट

DELHI: आज के जमाने में जहां बुजुर्गों को बोझ समझा जाता है. बेटा-बेटी और परिवार के रहने के बावजूद उन्हें ओल्ड एज होम में रहने के लिए मजबूर किया जाता है. तो वहीं अब सरकार बुजुर्गों की सेवा के लिए नया कानून ला रही है. नये कानून के मुताबिक बुजुर्ग लोगों की देखभाल की जिम्मेदारी सिर्फ बेटा-बेटी की ही नहीं बल्कि बहू और दामाद की भी होगी. यह जिम्मेदारी गोद लिए हुए या सौतेले बच्चों पर भी समान रूप से लागू होगी. 


केंद्र की मोदी सरकार देश में वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण से जुड़़ा बिल संसद में लाने जा रही है. कैबिनेट ने मेंटेनेंस एंड वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स एंड सीनियर सिटीजन अमेंडमेट बिल 2019 को मंजूरी दे दी गई है और अब जल्द ही बिल संसद में पेश किया जाएगा. यह बिल वरिष्ठ नागरिकों को बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ उन्हें सुरक्षा मुहैया कराएगा.


इस बिल में कहा गया है कि बुजुर्गों की देखभाल का जिम्मा सिर्फ उनको बच्चों पर नहीं होगा बल्कि बेटा-बेटी, नाती-नातिन और पोता-पोती भी देखभाल के लिए कानून तौर पर बाध्य होंगे. वरिष्ठ नागरिकों और परिजनों के कल्याण से जुड़े 2007 के बिल में भी यह संशोधन किया जा रहा है. इसके मुताबिक परिवार में बच्चे अब सिर्फ अपने माता-पिता ही नहीं बल्कि सास-ससुर की देखभाल के लिए भी जिम्मेदार होंगे, भले ही वह वरिष्ठ नागरिकों की श्रेणी में नहीं आते हों. वहीं इस कानून का उल्लंघन करने वालों की जेल की सजा तीन महीने से बढ़ाकर छह महीने कर दी गयी है.



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