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बिहार में छात्रों पर AK-47 से फायरिंग हुई लेकिन किसी को गोली नहीं लगी: सुप्रीम कोर्ट में सरकार का जवाब, भीड़ में फंसे कांस्टेबल ने हवा में चलाईं 4 गोलियां

बिहार में छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस की कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार ने जवाब दाखिल किया है। सरकार ने सीवान में AK-47 से चार राउंड फायरिंग की बात स्वीकार करते हुए कहा कि गोलियां हवा में चलाई गईं और किसी को चोट नहीं लगी।

AK47 Firing Bihar
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Mukesh Srivastava
9 मिनट

DELHI: बिहार में छात्रों के आंदोलन और प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई और अत्यधिक बल प्रयोग के मामले में राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखा है। सरकार ने अदालत में दाखिल जवाबी हलफनामे में पुलिस पर प्रदर्शनकारियों को नुकसान पहुंचाने के लिए ज्यादा बल प्रयोग करने के आरोपों से इनकार किया है।



सरकार ने सीवान में प्रदर्शन के दौरान AK-47 से फायरिंग के आरोप पर कहा है कि भीड़ में फंस गए एक कांस्टेबल ने अपनी सुरक्षा के लिए हवा में चार गोलियां चलाई थीं। सरकार के मुताबिक, AK-47 से चली इन गोलियों से किसी भी प्रदर्शनकारी को चोट नहीं लगी।



हालांकि, हाथी चौक के पास एक ASI द्वारा 9mm पिस्टल से दो राउंड फायरिंग की बात भी हलफनामे में स्वीकार की गई है। सरकार के अनुसार, भीड़ को तितर-बितर करने के लिए की गई इस फायरिंग में तीन प्रदर्शनकारियों को मामूली चोटें आईं।



AK-47 से घायल नहीं हुए प्रदर्शनकारी 

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में बिहार सरकार ने विशेष रूप से कहा है कि जिन तीन प्रदर्शनकारियों को मामूली फायरआर्म इंजरी हुई, वे AK-47 की गोली से घायल नहीं हुए थे। सरकार का कहना है कि ये तीनों प्रदर्शनकारी उस जगह मौजूद भी नहीं थे, जहां कांस्टेबल ने AK-47 से हवा में फायरिंग की थी।



हालांकि, घटना की पूरी तस्वीर स्पष्ट करने के लिए बैलिस्टिक जांच जारी है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि किस प्रकार के हथियार से गोली चली, फायरिंग कितनी दूरी से की गई थी और गोली किस कोण से चली थी।



AK-47 प्रदर्शन रोकने का हथियार नहीं

राज्य सरकार ने अपने हलफनामे में AK-47 के इस्तेमाल को लेकर भी महत्वपूर्ण बात कही है। सरकार के मुताबिक, AK-47 प्लाटून स्तर का हथियार है, जिसका इस्तेमाल विशेष अभियानों में किया जाना चाहिए। सामान्य कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटने के लिए इसका इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। हलफनामे में बताया गया है कि राज्य के पुलिस महानिदेशक ने AK-47 के इस्तेमाल को लेकर निर्देश भी जारी किए हैं।



सिपाही पर कार्रवाई हुई

सीवान की घटना में AK-47 से फायरिंग करने वाले कांस्टेबल को लेकर सरकार ने बताया कि उसे निलंबित कर दिया गया है और उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है। सरकार ने इसे ‘undesired conduct’ यानी अवांछित आचरण माना है।



भीड़ में फंस गया था कांस्टेबल, हवा में चलाई 4 गोलियां

सीवान की घटना को लेकर सरकार ने बताया कि उस समय मौके पर तैनात पुलिस बल पर्याप्त नहीं था। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिसकर्मियों को बुलाया गया था। सरकार के अनुसार, जेपी चौक के पास एक कांस्टेबल भीड़ के बीच फंस गया। इसी दौरान उसने अपनी AK-47 से हवा में चार राउंड फायर किए। राज्य सरकार का दावा है कि इन चार गोलियों से कोई व्यक्ति घायल नहीं हुआ।



हाथी चौक पर 9mm पिस्टल से चलीं दो गोलियां

सरकार ने हलफनामे में एक अन्य घटना का भी जिक्र किया है। हाथी चौक के पास एक ASI ने भीड़ को नियंत्रित करने और तितर-बितर करने के लिए अपनी 9mm पिस्टल से दो राउंड फायर किए। सरकार के मुताबिक, इस घटना में तीन प्रदर्शनकारियों को मामूली फायरआर्म इंजरी हुई। राज्य ने स्पष्ट किया है कि इन तीनों की चोटों को सीवान में AK-47 से हुई फायरिंग से जोड़ना सही नहीं है।



प्रदर्शन के दौरान सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया

बिहार सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और पुलिसकर्मियों पर हमला करने का भी आरोप लगाया है। हलफनामे में कहा गया है कि प्रदर्शन के दौरान कुछ असामाजिक तत्व भीड़ में शामिल हो गए और उन्होंने कानून-व्यवस्था संभाल रहे पुलिस अधिकारियों को जानबूझकर निशाना बनाया।



सरकार के अनुसार, बिहार के कई हिस्सों में प्रदर्शन बाद में हिंसक हो गया। इनमें गांधी मैदान के आसपास, जहानाबाद, पटना, छपरा, भागलपुर, सीतामढ़ी, औरंगाबाद, कटिहार, किशनगंज और सीवान शामिल हैं।



छपरा में हिंसा में कई पुलिस अधिकारी घायल

छपरा में 25 जुलाई 2026 को प्रदर्शन शुरू में शांतिपूर्ण था। सरकार के मुताबिक, दोपहर तक स्थिति सामान्य रही, लेकिन इसके बाद कुछ असामाजिक तत्व भीड़ में शामिल हो गए। आरोप है कि इसके बाद तोड़फोड़ और पथराव शुरू हुआ।



अधिकारियों को लगीं गंभीर चोट

सरकार के अनुसार, इस हिंसा में 2 BDO, 3 पुलिस इंस्पेक्टर, 2 सब-इंस्पेक्टर और 11 कांस्टेबल घायल हुए। हलफनामे में यह भी दावा किया गया है कि एक BDO की आंख चली गई, जबकि दूसरे BDO के सिर पर भारी वस्तु से गंभीर चोट लगी और उनकी स्थिति गंभीर बनी हुई है।



69 FIR, 500 गिरफ्तारियां

राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 22 जुलाई से 25 जुलाई 2026 के बीच बिहार में कुल 69 FIR दर्ज की गईं और करीब 500 लोगों को गिरफ्तार किया गया ।सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, आपराधिक पृष्ठभूमि नहीं रखने वाले 222 छात्र प्रदर्शनकारियों को जमानत पर रिहा किया गया। इसके अलावा 75 नाबालिगों को Juvenile Justice Board के जरिए रिहा किया गया।



सरकार ने कहा है कि जिन 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को प्रदर्शन के सिलसिले में हिरासत में लिया गया था और जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था, उन्हें स्वयं या परिवार के सदस्यों की ओर से साधारण बॉन्ड भरने के बाद रिहा कर दिया गया।



छात्रों की निजी जानकारी सार्वजनिक नहीं करने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद बिहार सरकार ने प्रदर्शन से जुड़े वीडियो फुटेज और दूसरे रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। राज्य के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक को सभी वीडियो फुटेज और अन्य रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के लिए कहा गया है।



इसके साथ ही प्रदर्शन के दौरान एकत्र की गई छात्रों और अन्य प्रदर्शनकारियों की व्यक्तिगत जानकारी और डिजिटल डेटा को फिलहाल सार्वजनिक डोमेन या सोशल मीडिया पर साझा नहीं करने का निर्देश दिया गया है। सरकार ने यह भी कहा है कि जिन छात्रों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उनके खिलाफ बिहार पुलिस कोई जबरन या दमनात्मक कार्रवाई नहीं कर रही है।



157 पुलिसकर्मी और 7 सरकारी कर्मचारी घायल

राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि पूरे प्रदर्शन के दौरान 157 पुलिसकर्मी और 7 सरकारी कर्मचारी घायल हुए। हालांकि, सरकार ने यह भी स्वीकार किया है कि प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया था और इसके कारण कुछ प्रदर्शनकारियों को चोटें आईं।



AISA और RYA के आह्वान का भी जिक्र

हलफनामे में प्रदर्शन के पीछे कुछ छात्र संगठनों की भूमिका का भी उल्लेख किया गया है। राज्य सरकार ने आरोप लगाया है कि AISA और RYA, जो CPI(ML) से जुड़े छात्र संगठन हैं, की ओर से किए गए आह्वान के बाद प्रदर्शन बढ़ा। वहीं, सरकार का कहना है कि 24 जुलाई 2026 को Cockroach Janta Party की ओर से दिए गए प्रदर्शन के आह्वान का बिहार में कोई खास प्रभाव दिखाई नहीं दिया।



AK-47 फायरिंग करने वाले कांस्टेबल पर कार्रवाई

बिहार सरकार ने अपने जवाब में यह भी स्पष्ट किया है कि AK-47 से फायरिंग करने वाले कांस्टेबल को कार्रवाई से बाहर नहीं रखा गया है। सरकार के मुताबिक, कांस्टेबल को निलंबित कर दिया गया है और उसके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।



यानी राज्य सरकार का एक तरफ दावा है कि AK-47 से चलाई गई चारों गोलियां हवा में थीं और उनसे कोई घायल नहीं हुआ, वहीं दूसरी तरफ पुलिसकर्मी के इस कदम को विभागीय स्तर पर उचित नहीं माना गया है।



सुप्रीम कोर्ट में अब आगे क्या?

बिहार सरकार का यह हलफनामा उन याचिकाओं के जवाब में दाखिल किया गया है, जिनमें छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई और कथित पुलिस ज्यादती पर सवाल उठाए गए हैं। सरकार ने अपने जवाब में अत्यधिक बल प्रयोग से इनकार करते हुए कहा है कि कई स्थानों पर प्रदर्शन हिंसक हो गया था और पुलिसकर्मियों तथा सरकारी अधिकारियों पर भी हमले हुए।



दूसरी ओर, AK-47 से फायरिंग, 9mm पिस्टल से गोली चलने और प्रदर्शनकारियों के घायल होने जैसे मामलों की जांच और बैलिस्टिक परीक्षण अभी महत्वपूर्ण रहेंगे।अब सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान यह अहम होगा कि अदालत राज्य सरकार के इन दावों और पुलिस कार्रवाई से जुड़े रिकॉर्ड को किस तरह देखती है।

रिपोर्टिंग
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रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता