1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mar 20, 2026, 2:51:22 PM
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Indian Railways : भारतीय रेलवे ने हाल ही में अपने अधिकारियों के प्रदर्शन को लेकर सख्त कदम उठाया है। रेलवे मंत्रालय के अधिकारियों ने जानकारी दी कि रेलवे ने खराब प्रदर्शन और अपेक्षित प्रशासनिक मानकों को पूरा न करने के कारण छह वरिष्ठ अधिकारियों को अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त कर दिया है। यह कार्रवाई भारतीय रेलवे की स्थापना संहिता के प्रावधानों, विशेष रूप से नियम 1802(a), के तहत की गई है, जो प्रशासन को सार्वजनिक हित में अधिकारियों को समय से पहले सेवानिवृत्त करने का अधिकार देता है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह कदम संगठन की परिचालन दक्षता और जवाबदेही बनाए रखने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। मंत्रालय के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि रेलवे किसी भी स्तर पर खराब प्रदर्शन और अक्षमता को बर्दाश्त नहीं करेगा और इस दिशा में सभी कर्मचारियों और अधिकारियों को गंभीरता से कार्रवाई के महत्व को समझना चाहिए।
इस कार्रवाई में उत्तरी रेलवे के मुख्यालय के मुख्य प्रोजेक्ट मैनेजर, दक्षिण-पश्चिम रेलवे में आईआरएसएमई के एनएफ-एचएजी स्तर के अधिकारी, दक्षिण-पूर्व मध्य रेलवे में आईएसआरई के सीनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड अधिकारी, पूर्वी रेलवे में आईआरएसएसई के सीनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड अधिकारी शामिल हैं। इसके अलावा, रेलवे बोर्ड सिविल सर्विस के ग्रेड-1 अधिकारी (अंडर सेक्रेटरी या डिप्टी डायरेक्टर) और पीपीएस अधिकारी को भी इस सूची में शामिल किया गया है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह निर्णय रेलवे की अपनी शून्य सहिष्णुता नीति का हिस्सा है, जो सभी कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए स्पष्ट संदेश देता है कि यदि वे अपने प्रशासनिक कर्तव्यों और सेवा मानकों को पूरा करने में विफल रहते हैं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकार की कार्रवाई न केवल प्रदर्शन सुधारने के लिए बल्कि संगठन में जवाबदेही और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जरूरी है।
रेलवे प्रशासन ने यह भी संकेत दिया कि यह कदम केवल दोषी अधिकारियों के खिलाफ नहीं बल्कि पूरे संगठन में चेतावनी के रूप में है। अधिकारियों और कर्मचारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों के प्रति सजग रहें और किसी भी प्रकार की लापरवाही को गंभीरता से न लें। रेलवे का कहना है कि इस प्रकार की कार्रवाई संगठन की दक्षता, सुरक्षा और सेवा गुणवत्ता को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम भारतीय रेलवे के इतिहास में प्रशासनिक सुधारों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे न केवल कर्मचारियों में जवाबदेही का भाव बढ़ेगा, बल्कि रेलवे की संचालन क्षमता और जनता के प्रति सेवा की गुणवत्ता में भी सुधार होगा।
रेलवे मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि नियम 1802(a) के तहत किए गए इस प्रकार के निर्णय सार्वजनिक हित में होते हैं और संगठन की सुचारु कार्यप्रणाली और उच्च मानकों को बनाए रखने के लिए जरूरी होते हैं। मंत्रालय ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से अनुरोध किया है कि वे इस कार्रवाई को गंभीरता से लें और अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह पूरी ईमानदारी और दक्षता के साथ करें।
इस कदम के बाद भारतीय रेलवे ने यह संदेश स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी स्तर पर प्रदर्शन और प्रशासनिक मानकों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह सख्त निर्णय न केवल वर्तमान अधिकारियों के लिए चेतावनी है, बल्कि आने वाले समय में रेलवे की कार्यप्रणाली और संचालन दक्षता को मजबूत करने के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।