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पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर फिर मंडराया खतरा? केंद्रीय मंत्री के बयान से बढ़ी करोड़ों लोगों की टेंशन, जानिए क्या है पूरा मामला

पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री के हालिया बयान के बाद लोगों के मन में सवाल उठने लगे हैं कि क्या आने वाले दिनों में ईंधन के दाम बढ़ सकते हैं। हालांकि अभी कोई आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है, लेकिन

पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर फिर मंडराया खतरा? केंद्रीय मंत्री के बयान से बढ़ी करोड़ों लोगों की टेंशन, जानिए क्या है पूरा मामला
Ramakant kumar
3 मिनट

भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर एक बार फिर लोगों के बीच चर्चा तेज हो गई है. केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी के एक बयान के बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या आने वाले दिनों में फ्यूल के दाम फिर बढ़ सकते हैं.


हालांकि सरकार की ओर से अभी तक पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ाने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन मंत्री के बयान से संकेत जरूर मिले हैं कि आने वाले समय में ईंधन की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की स्थिति पर निर्भर कर सकती हैं.


केरल के त्रिशूर जिले में पत्रकारों से बातचीत के दौरान केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी ने कहा कि सरकार वैश्विक ऊर्जा बाजार पर लगातार नजर बनाए हुए है. उन्होंने बताया कि पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में किसी भी बदलाव का फैसला कच्चे तेल की उपलब्धता, सप्लाई और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किया जाएगा.


जब उनसे पूछा गया कि क्या पेट्रोल-डीजल फिर महंगा हो सकता है, तो उन्होंने कहा कि अभी सबसे पहले यह देखना होगा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की स्थिति कैसी रहती है. इसके बाद ही कीमतों को लेकर कोई फैसला लिया जाएगा.


दरअसल, दुनिया के कई हिस्सों में जारी तनाव और खासकर पश्चिम एशिया में बढ़ती अस्थिरता ने कच्चे तेल के बाजार पर असर डाला है. पश्चिम एशिया दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक क्षेत्रों में शामिल है. वहां किसी भी तरह की परेशानी होने पर कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है और कीमतों में तेजी आ सकती है.


भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है. ऐसे में अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होता है तो उसका सीधा असर भारत में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों पर पड़ सकता है.


पिछले कुछ समय में एलपीजी सिलेंडर समेत ईंधन कीमतों में बदलाव देखने को मिला है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं तो तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ सकता है और सरकार को कीमतों को लेकर नए फैसले लेने पड़ सकते हैं.


हालांकि आम लोगों के लिए राहत की बात यह है कि सरकार फिलहाल जल्दबाजी में कोई कदम उठाने के मूड में नहीं है. पेट्रोलियम मंत्रालय लगातार अंतरराष्ट्रीय बाजार, तेल की सप्लाई और देश की जरूरतों की समीक्षा कर रहा है.


अगर कच्चे तेल की कीमतें नीचे आती हैं और सप्लाई सामान्य बनी रहती है, तो पेट्रोल-डीजल के दामों में बड़ी बढ़ोतरी की संभावना कम हो सकती है. लेकिन अगर वैश्विक हालात बिगड़ते हैं तो इसका असर घरेलू बाजार पर पड़ सकता है.