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TRAIN NEWS : 'आप टेंशन क्यों लेती हैं मैडम सीट तो मैं ... ', चलती ट्रेन में सीट दिलाने का खेल या साजिश? सामने आया ऐसा ट्विस्ट, जिसे जानकर आप भी कहेंगे ‘क्या सिस्टम है!’

चलती ट्रेन में सीट दिलाने का झांसा, एसी कोच में भयावह घटना और फिर सिस्टम का चौंकाने वाला ट्विस्ट—जिस टीटीई को यूपी पुलिस ढूंढ रही थी, वह पहले से ही बिहार जेल में बंद मिला। अब पुलिस रिमांड की तैयारी में जुटी है।

TRAIN NEWS : 'आप टेंशन क्यों लेती हैं मैडम सीट तो मैं ... ', चलती ट्रेन में सीट दिलाने का खेल या साजिश? सामने आया ऐसा ट्विस्ट, जिसे जानकर आप भी कहेंगे ‘क्या सिस्टम है!’
Tejpratap
Tejpratap
4 मिनट

TRAIN NEWS : रेलवे की चमचमाती कोच, एसी फर्स्ट क्लास की आरामदायक सीटें और “यात्रियों की सेवा” का दावा—सब कुछ कागजों में जितना साफ दिखता है, हकीकत में उतना ही उलझा हुआ नजर आता है। और इस उलझन का ताज़ा उदाहरण बना है एक इनामी टीटीई का मामला, जिसने पूरे सिस्टम की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।


कहानी एक एनसीसी कैडेट से शुरू होती है, जो सेना में भर्ती होने के सपने के साथ तैयारी कर रही थी। 15 फरवरी को परीक्षा में शामिल होने के लिए वह मऊ से यात्रा कर रही थी। हालात ऐसे बने कि वह अहमदाबाद–गोरखपुर एक्सप्रेस ट्रेन में बिना टिकट एसी फर्स्ट क्लास कोच में बैठ गई। वर्दी में मौजूद यह छात्रा शायद नहीं जानती थी कि आगे की यात्रा सिर्फ गंतव्य तक नहीं, बल्कि एक डरावने अनुभव तक भी जाएगी।


इसी दौरान एक टीटीई वहां पहुंचा। टिकट की जांच शुरू हुई, और यहीं से कहानी ने वह मोड़ लिया जिसे सुनकर व्यवस्था पर सवाल उठना लाज़मी हो जाता है। आरोप है कि टीटीई ने टिकट न होने की स्थिति में “सीट दिलाने” का भरोसा दिया और फिर कोच के भीतर ही एक अलग जगह पर ले जाकर कथित तौर पर गंभीर वारदात को अंजाम दिया।


घटना के बाद छात्रा ने साहस दिखाते हुए देवरिया जीआरपी थाने में मामला दर्ज कराया। मामला सामने आते ही पुलिस महकमे में हलचल मच गई। आरोपी की पहचान बिहार के पटना जिले के बिहटा क्षेत्र से जुड़ी बताई गई। इसके बाद उसे पकड़ने के लिए एसओजी समेत छह टीमें लगाई गईं, जैसे वह कोई साधारण कर्मचारी नहीं बल्कि कोई बड़ा वांछित अपराधी हो।


उस पर 10 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया गया। तलाश तेज हुई, दबिशें बढ़ीं, लेकिन कहानी में असली तंज तब जुड़ा जब खुलासा हुआ कि जिस टीटीई को यूपी पुलिस जगह-जगह ढूंढ रही थी, वह पहले से ही बिहार पुलिस की हिरासत में था—शराब से जुड़े मामले में गिरफ्तार होकर जेल की हवा खा रहा था।


मतलब, एक तरफ पुलिस उसे “खुले मैदान” में तलाश रही थी और दूसरी तरफ वह पहले से ही “बंद कमरे” में बैठा अगली कार्रवाई का इंतजार कर रहा था। यह वही स्थिति है जहां अपराधी से ज्यादा सिस्टम की आपसी तालमेल की कमी चर्चा में आ जाती है।


अब यूपी जीआरपी का कहना है कि आरोपी को रिमांड बी के तहत देवरिया लाया जाएगा ताकि आगे की पूछताछ और कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा सके। जीआरपी अधिकारियों के मुताबिक आरोपी फिलहाल बिहार की जेल में बंद है।


इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर वही पुराना सवाल छोड़ दिया है—क्या अपराधी इतने स्मार्ट हो गए हैं या फिर सिस्टम इतना बिखरा हुआ है कि एक ही आरोपी दो राज्यों के बीच “ढूंढो और भूल जाओ” खेल का हिस्सा बन जाता है? फिलहाल जांच जारी है, लेकिन जनता के बीच यह मामला एक तंज बनकर गूंज रहा है—जहां “सीट दिलाने” का वादा करने वाला खुद कानून की सबसे सुरक्षित सीट पर पहले से ही आराम फरमा रहा था।