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प्रशांत किशोर के करीबी को बचाने के आरोप में ममता बनर्जी को सुप्रीम कोर्ट की फटकार, कहा..मनमानी बर्दाश्त नहीं

I-PAC छापेमारी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी की भूमिका पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि कार्रवाई में हस्तक्षेप करना गलत था, वहीं ED और राज्य सरकार के बीच संवैधानिक बहस तेज हो गई है।

पश्चिम बंगाल
ममता को सुप्रीम झटका
© सोशल मीडिया
Jitendra Vidyarthi
3 मिनट

DESK: पश्चिम बंगाल में I-PAC (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) के दफ्तर और को-फाउंडर , जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर के करीबी  प्रतीक जैन के आवास पर हुई प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की कार्रवाई पर सख्त नाराज़गी जताई है।


बुधवार को मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री का मौके पर पहुंचना और हस्तक्षेप करना उचित नहीं था। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा, “आपने जो किया, वह गलत था। जो हुआ, वह सामान्य स्थिति नहीं थी"


I-PAC से जुड़े छापेमारी मामले में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सुप्रीम कोर्ट में झटका लगा है। इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से दायर याचिका पर बुधवार को अदालत में सुनवाई हुई, जिसमें बंगाल सरकार ने कई संवैधानिक सवाल उठाए।


ED ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि I-PAC के दफ्तर और उसके को-फाउंडर प्रतीक जैन के आवास पर छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचीं और कार्रवाई में बाधा डाली। एजेंसी का यह भी दावा है कि इस दौरान सबूतों को नष्ट करने की कोशिश की गई। ED ने मामले में ममता बनर्जी और कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर CBI जांच की मांग की है।


सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार के वकील श्याम दीवान ने अदालत में दलील दी कि ED अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दाखिल नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि यह प्रावधान केवल नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए है, जबकि ED एक सरकारी एजेंसी है और उसे इस तरह की याचिका दायर करने का अधिकार नहीं है।


श्याम दीवान ने यह भी कहा कि यह एक संवैधानिक सवाल है, इसलिए इस मामले की सुनवाई कम से कम पांच जजों की संविधान पीठ को करनी चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि ED केंद्र सरकार का एक विभाग है और उसे सीधे सुप्रीम कोर्ट में इस तरह की याचिका दाखिल करने का अधिकार नहीं दिया जा सकता।


वहीं, ED की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बंगाल सरकार के तर्कों का विरोध किया। उन्होंने अदालत में कहा कि राज्य सरकारें भी पहले अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दाखिल कर चुकी हैं और ED को भी ऐसा करने का अधिकार है। तुषार मेहता ने कहा कि मुख्यमंत्री ने पहले ED की जांच में बाधा डाली और अब राज्य सरकार इस मामले की सुनवाई में देरी करने की कोशिश कर रही है। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का अगला फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह केंद्रीय एजेंसियों के अधिकार और राज्यों की भूमिका को लेकर बड़ी संवैधानिक बहस को जन्म दे सकता है।

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