ब्रेकिंग
राहुल गांधी का पटना दौरा रद्द, 15 जुलाई का छात्र सम्मेलन भी स्थगित; सामने आई यह बड़ी वजहPMCH में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल खत्म, स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार की पहल का असर; अधीक्षक को किया था तलबनेपाल की बारिश का बिहार में असर: तिरहुत की नदियों का जलस्तर बढ़ा, संभावित बाढ़ को लेकर आयुक्त ने जिलों को दिए सख्त निर्देशकब जारी होगा BPSC TRE4 का नोटिफिकेशन? शिक्षक बहाली पर शिक्षा मंत्री ने दिया यह जवाबBihar News: DDC ने पत्नी के नाम पर करोड़ों की संपत्ति अर्जित की और छुपा लिया...SVU की छापेमारी में खुली थी पोल, निलंबित अफसर के खिलाफ शुरू हुआ डिपार्टमेंटल प्रोसिडिंग राहुल गांधी का पटना दौरा रद्द, 15 जुलाई का छात्र सम्मेलन भी स्थगित; सामने आई यह बड़ी वजहPMCH में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल खत्म, स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार की पहल का असर; अधीक्षक को किया था तलबनेपाल की बारिश का बिहार में असर: तिरहुत की नदियों का जलस्तर बढ़ा, संभावित बाढ़ को लेकर आयुक्त ने जिलों को दिए सख्त निर्देशकब जारी होगा BPSC TRE4 का नोटिफिकेशन? शिक्षक बहाली पर शिक्षा मंत्री ने दिया यह जवाबBihar News: DDC ने पत्नी के नाम पर करोड़ों की संपत्ति अर्जित की और छुपा लिया...SVU की छापेमारी में खुली थी पोल, निलंबित अफसर के खिलाफ शुरू हुआ डिपार्टमेंटल प्रोसिडिंग

ISRO ने रचा एक और इतिहास, देश का सबसे छोटा रॉकेट SSLV-D1 हुआ लॉन्च

DESK : भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने आज यानि 7 अगस्त को अपने पहले छोटे रॉकेट लांच कर दिया. इस रॉकेट का नाम 'स्माल सैटेलाइट लांच व्हीकल' है. आंध्र प्रदेश के

ISRO ने रचा एक और इतिहास, देश का सबसे छोटा रॉकेट SSLV-D1 हुआ लॉन्च
Tejpratap
Tejpratap
2 मिनट

DESK : भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने आज यानि 7 अगस्त को अपने पहले छोटे रॉकेट लांच कर दिया. इस रॉकेट का नाम 'स्माल सैटेलाइट लांच व्हीकल' है. आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर के लॉन्च पैड लॉन्चिंग सफलतापूर्वक की गई. यह SSLV एक पृथ्वी अवलोकन सैटेसाइट और छात्रों द्वारा बनाया एक उपग्रह लेकर जाएगा. इसरो ने 500 किलोग्राम तक के उपग्रहों को पृथ्वी की निचली कक्षा में 500 किलोमीटर तक स्थापित करने का मिशन शुरू किया है. उसका उद्देश्य तेजी से बढ़ते एसएसएलवी बाजार का बड़ा हिस्सा बनना है.


SSLV उपग्रह छह मीटर रिजोल्यूशन वाला एक इन्फ्रारेड कैमरा लेकर जा रहा है, जिसका रेजोल्यूशन 6 मीटर है. यानी ये रात में भी निगरानी कर सकता है. उस पर एक स्पेसकिड्ज इंडिया द्वारा संचालित सरकारी स्कूलों के 750 छात्रों द्वारा निर्मित आठ किलोग्राम का आजादी सैट सैटेलाइट भी है. SSLV 34 मीटर लंबा है जो PSLV से लगभग 10 मीटर कम है और PSLV के 2.8 मीटर की तुलना में इसका व्यास दो मीटर है. इस परियोजना का महत्व यह है कि इसे स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर आजादी के अमृत महोत्सव के तहत बनाया गया है. 


बता दें कि यह देश का पहला स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल है. इससे पहले छोटे उपग्रह सुन सिंक्रोनस ऑर्बिट तक के लिए पीएसएलवी पर निर्भर थे तो बड़े मिशन जियो सिंक्रोनस ऑर्बिट के लिए जीएसएलवी और जीएसएलवी मार्क 3 का इस्तेमाल होता था. जहां पीएसएलवी को लॉन्च पैड तक लाने और असेंबल करने में दो से तीन महीनों का वक्त लगता है, वहीं एसएसएलवी महज 24 से 72 घंटों के भीतर असेंबल किया जा सकता है. 

टैग्स