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ज्ञानवापी विवाद: इलाहाबाद कोर्ट से मुस्लिम पक्ष को बड़ा झटका, सभी याचिकाएं हुईं खारिज

DESK: ज्ञानवापी विवाद मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से मुस्लिम पक्ष को बड़ा झटका लगा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है और 1991 के मुकदमे के ट्

ज्ञानवापी विवाद: इलाहाबाद कोर्ट से मुस्लिम पक्ष को बड़ा झटका, सभी याचिकाएं हुईं खारिज
Mukesh Srivastava
3 मिनट

DESK: ज्ञानवापी विवाद मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से मुस्लिम पक्ष को बड़ा झटका लगा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है और 1991 के मुकदमे के ट्रायल को मंजूरी दे दी है। वाराणसी की कोर्ट को 6 महीने में सुनवाई पूरी करने का निर्देश दिया है।


दरअसल, वाराणसी की ज्ञानवापी विवाद से जुड़ी पांच याचिकाओं पर आज इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। 8 दिसंबर को सुनवाई पूरी करने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था। जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की सिंगल बेंच ने फैसला सुनाते हुए मालिकाना हक विवाद के मुकदमों को चुनौती देने वाली अंजुमन इंतेज़ामिया मस्जिद कमेटी द्वारा दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि, 'मुकदमा देश के दो प्रमुख समुदायों को प्रभावित करता है। हम ट्रायल कोर्ट को 6 महीने में मुकदमे का शीघ्र फैसला करने का निर्देश देते हैं'।


ज्ञानवापी विवाद से जुड़ी 5 याचिकाओं में से तीन याचिकाएं 1991 में वाराणसी की अदालत में दाखिल किए गए मामले से संबंधित हैं जबकि दो याचिका ASI के सर्वे आदेश के खिलाफ दायर की गयी थीं। 1991 के मुकदमे में विवादित परिसर हिंदुओं को सौंपने की मांग की गयी थी और यहां पूजा अर्चना की भी इजाजत मांगी गई थी। यह मुकदमा 1991 में वाराणसी की जिला कोर्ट में दाखिल किया गया था। 8 दिसंबर को फैसला सुरक्षित रखा था। इलाहाबाद हाईकोर्ट में मुस्लिम पक्ष की तरफ से ज्ञानवापी मस्जिद की इंतजामिया कमेटी की 3 और यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की 2 याचिकाएं दाखिल की गई थी।


हाई कोर्ट ने टाइटल सूट को चुनौती देने वाली मुस्लिम पक्ष की सभी याचिकाएं खारिज कर दी। हाई कोर्ट ने वाराणसी की लोअर कोर्ट को 6 महीने में सुनवाई पूरी करने का निर्देश दिया है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि एक मुकदमे में किए गए एएसआई सर्वेक्षण को अन्य मुकदमों में भी दायर किया जाएगा और यदि निचली अदालत को लगता है कि किसी हिस्से का सर्वेक्षण आवश्यक है, तो अदालत एएसआई को सर्वेक्षण करने का निर्देश दे सकती है।