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करोड़पति रहते पत्नी और चारों बच्चों को फूटी कोड़ी नहीं दी, मौत के बाद लावारिस की तरह हुआ दाह संस्कार

पैसे का घमंड ऐसा कि अपनी पत्नी और चारों बच्चों को अपनी संपत्ति में से एक फूटी कौड़ी तक नहीं दी। जिससे आहत होकर पत्नी और बच्चों ने सारे रिश्ते खत्म कर लिए और जब 70 साल के राजकुमार की मौत हुई तो सभी ने मुंह फेर लिया।

उत्तर प्रदेश न्यूज
© सोशल मीडिया
Jitendra Vidyarthi
4 मिनट

DESK: कभी करोड़ों रुपये की संपत्ति और इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबार के मालिक रहे 70 वर्षीय राजकुमार सक्सेना की जिंदगी का अंत बेहद दर्दनाक रहा। पत्नी और चार बच्चों का भरा-पूरा परिवार होने के बावजूद मौत के बाद उनका शव 72 घंटे तक सैफई मेडिकल कॉलेज की मोर्चरी में लावारिस पड़ा रहा। परिजनों ने शव लेने और अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया। आखिरकार एक रक्तदाता समूह के सदस्यों ने आगे बढ़कर उनका अंतिम संस्कार कराया।


राजकुमार सक्सेना यूपी के एटा के मारहरा क्षेत्र के रहने वाले थे। करीब 20 साल पहले उनके पास 3 से 4 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति थी। उनकी इलेक्ट्रॉनिक्स की बड़ी दुकान भी थी। बताया जाता है कि कारोबार में गिरावट आने के बाद परिवार में संपत्ति और पैसों को लेकर विवाद शुरू हो गया।


राजकुमार ने अपनी पत्नी आशा और चारों बच्चों को अपनी संपत्ति में हिस्सा नहीं दिया। इससे नाराज होकर पत्नी आशा अपने चारों बच्चों के साथ गाजियाबाद के नंदग्राम चली गईं। इसके बाद परिवार ने राजकुमार से दूरी बना ली और धीरे-धीरे संपर्क पूरी तरह खत्म हो गया।


संपत्ति खत्म हुई तो कर्ज में डूब गए

परिवार से अलग होने के बाद राजकुमार अकेले पड़ गए। उन्होंने धीरे-धीरे अपनी करोड़ों की संपत्ति बेच दी। संपत्ति खत्म होने के बाद जीवन चलाने के लिए उन्हें परिचितों और रिश्तेदारों से उधार लेना पड़ा। उन पर करीब 4 से 5 लाख रुपये का कर्ज भी हो गया। पिछले करीब पांच साल से राजकुमार एटा के एक वृद्धाश्रम में रह रहे थे। 16 जुलाई को तबीयत बिगड़ने पर उन्हें सैफई मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। यहां इलाज के दौरान 11 अगस्त को उनकी मौत हो गई।


बेटे ने कहा- हमारा कोई मतलब नहीं

राजकुमार की मौत के बाद अस्पताल प्रशासन ने भर्ती के समय दर्ज मोबाइल नंबर पर उनके बेटे से संपर्क किया। सैफई मेडिकल कॉलेज के डॉ. मनोज मौर्य के मुताबिक, बेटे से फोन पर बात कर उसे पिता के अंतिम संस्कार के लिए समझाने की कोशिश की गई, लेकिन उसने शव लेने और अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया।


राजकुमार की पत्नी आशा ने भी कहा कि करीब 20 साल पहले ही उनका रिश्ता खत्म हो चुका है। इसके बाद रक्तदाता समूह के सदस्य शरद तिवारी और उनकी टीम परिवार को समझाने के लिए गाजियाबाद के नंदग्राम स्थित बेटे के घर भी पहुंची। हालांकि, वहां 11 अगस्त से ही ताला लगा हुआ था।


रक्तदाता समूह ने निभाया इंसानियत का फर्ज

परिजनों के इनकार के बाद राजकुमार का शव सैफई मेडिकल कॉलेज की मोर्चरी में करीब 72 घंटे तक पड़ा रहा। इसके बाद सैफई थाना पुलिस के सहयोग से रक्तदाता समूह के सदस्यों ने अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी उठाई।


शरद तिवारी और उनकी टीम ने राजकुमार के शव को सम्मानपूर्वक यमुना तट तक पहुंचाया। वहां हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार उनका अंतिम संस्कार किया गया। परिवार के लोगों ने भले ही आखिरी समय में साथ छोड़ दिया, लेकिन रक्तदाता समूह के सदस्यों ने इंसानियत का फर्ज निभाते हुए उन्हें सम्मानजनक विदाई दी।

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