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दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा आदेश: यात्रियों को सीट तक पहुंचाने की जिम्मेवारी रेलवे की, मुआवजा देना अनिवार्य

Train Passenger Safety: दिल्ली हाई कोर्ट ने ट्रेन यात्रियों की सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला सुनाते हुए रेलवे को भीड़ नियंत्रण और हादसों में पीड़ितों को मुआवजा देने की जिम्मेदारी सौंपी है.

Train Passenger Safety
प्रतिकात्मक तस्वीर
© Google
Mukesh Srivastava
2 मिनट

Train Passenger Safety: दिल्ली हाई कोर्ट ने ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों की सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यदि कोई यात्री वैध टिकट के साथ ट्रेन में प्रवेश करता है, तो उसे सुरक्षित रूप से उसकी सीट तक पहुंचाना और भारी भीड़ व धक्का-मुक्की को नियंत्रित करना रेलवे की जिम्मेदारी है।


जस्टिस मनोज कुमार ओहरी की पीठ ने कहा कि रेलवे को अपनी गलतियों को छिपाने के बजाय उनकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि भीड़ या धक्का-मुक्की के कारण घायल या मृत हुए यात्रियों के परिवारों को हर हाल में मुआवजा दिया जाए।


हाई कोर्ट ने इस महीने रेलवे दुर्घटना से जुड़े लगभग सात मामलों में केंद्र सरकार को उचित मुआवजा देने का आदेश दिया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि ट्रेन के अंदर और रेलवे परिसर में भीड़ नियंत्रण की पूरी जिम्मेदारी रेलवे पर ही होगी।


पीठ ने कहा कि जब कोई यात्री वैध टिकट लेकर यात्रा करता है, तो वह सुरक्षित सफर की उम्मीद करता है, खासकर आरक्षित बोगियों में। ऐसे में यदि वह रेलवे की लापरवाही का शिकार होता है, तो इससे न केवल यात्री और उसके परिवार का भरोसा टूटता है, बल्कि रेलवे की साख भी प्रभावित होती है।


कोर्ट ने सभी मामलों को मुआवजा तय करने के लिए रेलवे दावा न्यायाधिकरण को वापस भेज दिया है और सख्त निर्देश दिए हैं कि दो महीने के भीतर मुआवजा तय कर उसका भुगतान किया जाए। पीठ ने यह भी कहा कि कई पीड़ित परिवार अपने परिजनों को खो चुके हैं और मुआवजे के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ चुके हैं, इसलिए अब और देरी नहीं होनी चाहिए।

रिपोर्टिंग
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रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता