1st Bihar Published by: First Bihar Updated Sun, 11 Jan 2026 02:48:02 PM IST
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DELHI: साइबर अपराधी पुलिस के लिए लगातार सिरदर्द बने हुए हैं। तमाम प्रयासों के बावजूद साइबर ठगी के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। राजधानी दिल्ली से सामने आया ताजा मामला बेहद हैरान कर देने वाला है, जहां बुजुर्ग डॉक्टर दंपति को 15 दिनों तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखकर करीब 15 करोड़ रुपये की ठगी कर ली गई।
यह मामला दिल्ली के ग्रेटर कैलाश इलाके में रहने वाले NRI बुजुर्ग डॉक्टर दंपति से जुड़ा है। पीड़ितों की पहचान डॉ. ओम तनेजा और उनकी पत्नी डॉ. इंदिरा तनेजा के रूप में हुई है। दोनों डॉक्टर संयुक्त राष्ट्र (UN) में वर्षों तक सेवाएं दे चुके हैं। अमेरिका में लंबा करियर पूरा करने के बाद वे वर्ष 2016 में भारत लौटे और दिल्ली में रहने लगे।
कैसे शुरू हुई ठगी?
दरअसल 24 दिसंबर 2025 को डॉक्टर दंपति को एक फोन कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को दिल्ली पुलिस का अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके आधार कार्ड से जुड़े एक बैंक अकाउंट का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग और ड्रग ट्रैफिकिंग में हुआ है। कुछ ही मिनटों बाद उन्हें एक वीडियो कॉल आई, जिसमें पुलिस की वर्दी पहने लोग, दिल्ली पुलिस का लोगो और गंभीर चेहरों वाले अधिकारी दिखाई दिए। साइबर ठगों ने डॉक्टर दंपति को बताया कि वे अब “डिजिटल अरेस्ट” में हैं। उन्हें घर से बाहर निकलने, किसी से बात करने या फोन काटने तक की अनुमति नहीं है। हर समय वीडियो कॉल के जरिए उन पर नजर रखी जा रही थी।
फर्जी कोर्ट और नकली जज
इसके बाद एक और वीडियो कॉल आई, जिसमें नकली कोर्ट रूम और जज को दिखाया गया। काला कोट, कोर्ट जैसा सेटअप और दीवार पर तस्वीरें — सब कुछ असली जैसा दिखाया गया। नकली जज ने धमकी दी कि सहयोग न करने पर तुरंत गिरफ्तारी और संपत्ति जब्ती की जाएगी। यह देश का पहला ऐसा मामला बताया जा रहा है, जिसमें साइबर अपराधियों ने न केवल फर्जी पुलिस अधिकारी बल्कि नकली सुप्रीम कोर्ट और जज तक का सेटअप तैयार किया।
स्थानीय पुलिस को भी डराया
जब डॉ. तनेजा को शक हुआ और उन्होंने दिल्ली पुलिस के एक स्थानीय SHO से संपर्क करने की कोशिश की, तो साइबर ठगों ने उसी SHO को वीडियो कॉल पर धमकाया। नकली जज ने कहा कि यह मामला सीधे सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में है और स्थानीय पुलिस इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकती।
15 दिन तक डिजिटल अरेस्ट
24 दिसंबर 2025 से 9 जनवरी 2026 तक डॉक्टर दंपति अपने ही घर में डिजिटल कैद में रहे। साइबर अपराधियों ने जांच शुल्क, जमानत, कोर्ट वेरिफिकेशन जैसे बहानों से अलग-अलग बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करवाए। हर बार फर्जी अरेस्ट मेमो, कोर्ट ऑर्डर, बैंक नोटिस और सरकारी मुहर वाले दस्तावेज भेजे गए, जो बेहद प्रोफेशनल तरीके से तैयार किए गए थे। इन 15 दिनों में डॉक्टर दंपति के खातों से कुल 14 करोड़ 85 लाख रुपये निकाल लिए गए। यह वही रकम थी, जिसे उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में दशकों की मेहनत से कमाया था।
जांच में जुटी पुलिस
डॉक्टर दंपति के बच्चे विदेश में रहते हैं। ठगी का एहसास होने के बाद उन्होंने दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल साइबर यूनिट से संपर्क किया। पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है और बैंक ट्रांजेक्शन, IP एड्रेस, कॉल रिकॉर्ड और फर्जी दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है।