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चलते-चलते डांस करने लगते हैं ‘ऑटोमेटिक बाबा’,12 साल से अनोखी तप-साधना में तय कर रहे यात्रा

माघ मेला में चित्रकूट के संत देशराज गर्ग उर्फ ‘ऑटोमेटिक बाबा’ अपनी अनोखी तप-साधना से आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। वे 12 वर्षों से चलते-चलते डांस करते हुए यात्रा कर रहे हैं। जिन्हें देखने के लिए उमड़ पड़ते हैं।

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‘ऑटोमेटिक बाबा’
© social media
Jitendra Vidyarthi
3 मिनट

DESK: पिछले साल दिव्य-भव्य महाकुंभ की भव्यता से प्रेरित अनेक संत-महात्मा इस बार माघ मेला में पहुंचे हैं। इन संतों की तप-साधना श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इन्हीं में एक हैं चित्रकूट निवासी 48 वर्षीय संत देशराज गर्ग ‘दीनबंधु’, जिन्हें लोग ‘ऑटोमेटिक बाबा’ के नाम से जानते हैं।


ऑटोमेटिक बाबा की तप-साधना बेहद अनोखी है। वे पिछले 12 वर्षों से यात्रा के दौरान हर पांच कदम चलने के बाद अचानक दाएं से बाएं चक्रीय रूप से घूमते हुए पांच बार डांस करते हैं। इस दौरान वे आंगिक भाव-भंगिमा के साथ नृत्य मुद्रा में रहते हैं और नृत्य पूरा होते ही पुनः सामान्य रूप से चलने लगते हैं। राह चलते इस अद्भुत नृत्य शैली के कारण ही उन्हें ‘ऑटोमेटिक बाबा’ कहा जाता है। पहली बार देखने वालों को ऐसा प्रतीत होता है मानो बाबा को चक्कर आ गया हो, लेकिन कुछ ही क्षणों में उनका पंच-चक्र नृत्य पूरा होते ही वे सामान्य अवस्था में आ जाते हैं।


ऑटोमेटिक बाबा महाशिवरात्रि तक माघ मेला में प्रवास करेंगे। इसके बाद वे शिव तांडव की प्रस्तुति देते हुए चित्रकूट के लिए प्रस्थान करेंगे। चित्रकूट के भगवतपुर गांव के निवासी ऑटोमेटिक बाबा के माता-पिता का पहले ही निधन हो चुका है। उन्होंने 15 वर्ष की आयु से ही आश्रम जीवन अपना लिया था। इसके बाद 12 वर्षों तक वृंदावन में निवास किया। संन्यास ग्रहण करने के बाद उन्होंने गुरुभाई शिवानंद के सान्निध्य में रहकर धर्म और अध्यात्म का ज्ञान अर्जित किया।


खुद को अर्द्धनारीश्वर स्वरूप मानने वाले बाबा का कहना है कि राह चलते नृत्य की यह तप-साधना जीवनपर्यंत जारी रहेगी। उनके अनुसार नृत्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि ईश्वर प्राप्ति का साधन है। यह एक सार्वभौम कला है, जो मनुष्य ही नहीं, देवी-देवताओं को भी प्रिय है और धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती है। ऑटोमेटिक बाबा का पहनावा भी विशिष्ट है। वे हाथ में कमंडल, सिर पर पीली पगड़ी और कमर में अंगौछा बांधकर अपनी यात्रा पर निकलते हैं, जिससे उनकी अलग पहचान बनती है।

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