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Mokama Violence : मोकामा के वोटरों की रक्षा करना गुनाह है क्या ? शव यात्रा में एक समाज को टारगेट कर गालियां दी गई, बोले ललन सिंह- भूरा बाल साफ़ करो वाला शासन लाना चाहते हैं तेजस्वी ?

मोकामा में वायरल वीडियो और FIR के विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि वीडियो तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है। चुनाव आयोग ने निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए हैं।

Mokama Violence : मोकामा के वोटरों की रक्षा करना गुनाह है क्या ? शव यात्रा में एक समाज को टारगेट कर गालियां दी गई, बोले ललन सिंह- भूरा बाल साफ़ करो वाला शासन लाना चाहते हैं तेजस्वी ?
Tejpratap
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6 मिनट

Mokama Violence : बिहार का मोकामा विधानसभा सीट एक बार फिर से सुर्खियों में है। इस बार सुर्खियों में आने की वजह केंद्रीय मंत्री ललन सिंह के तरफ से शिवनार गांव में दिया गया एक बयान है। जिसको लेकर उनके ऊपर FIR भी दर्ज की गई है और चुनाव आयोग में नोटिस भी जारी कर जवाब मांगा है। इसके बाद अब उन्होंने उसे जवाब में एक बड़ी बात कही है।


ललन सिंह ने आज मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि क्या मोकामा के वोटरों की रक्षा करना गुनाह है? यह इलाका मेरे लोक सभा क्षेत्र में आता है और यहां के गरीबों की रक्षा करना उनके वोट अधिकार की रक्षा करना मेरा फर्ज है और मैं वही बोला है। 


लेकिन तेजस्वी यादव भ्रम फैलाना चाह रहे हैं यही वजह है कि उनके समर्थकों की तरफ से दुलारचंद यादव के शव यात्रा के दौरान एक जाति विशेष को टारगेट कर गालियां दी गई। वह बिहार में वापस से वहीं  शासनकाल लाना चाहते हैं जिसमें कहा जाता था कि भूरा बाल साफ करो। लेकिन अब मैं ऐसा होने नहीं दूंगा मैं वोटरों के अधिकार की रक्षा करने के लिए खड़ा रहूंगा।


केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने अपने वायरल वीडियो और उस पर दर्ज FIR को लेकर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि यह वीडियो का सिर्फ एक हिस्सा है, पूरा वीडियो नहीं है। लोगों को पूरा वीडियो देखकर तथ्य समझना चाहिए। यदि FIR दर्ज हुई है, तो उसकी जांच भी होगी। मुझसे पूछताछ होगी और मैं जवाब दूंगा। पूरी बात रिकॉर्डेड है। आरजेडी के लोगों की आदत है कि एक हिस्सा उठाकर वीडियो वायरल करते हैं, ट्वीट करते हैं और लोगों को गुमराह करते हैं।


बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण के मतदान से पहले मोकामा में हुई हिंसा और वायरल वीडियो ने राजनीतिक हलकों में नई सियासी बहस छेड़ दी है। एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें विपक्षी दलों के समर्थकों और ग्रामीण मतदाताओं को धमकाने के आरोप लगाए गए हैं। वीडियो में स्पष्ट आवाज सुनी जा सकती है, जिसमें चेतावनी दी गई है कि मतदान के दौरान वे एक नेता को बाहर न निकलने दें। चुनाव आयोग ने वायरल वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर FIR दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने कहा है कि वह एक संवैधानिक संस्था है और निष्पक्ष रूप से सभी शिकायतों की जांच करती है। आयोग के निर्देश के बाद स्थानीय प्रशासन ने मामले में कार्रवाई शुरू कर दी है।


विवादित वीडियो को लेकर सफाई देते हुए ललन सिंह का कहना है कि जानबूझकर वीडियो का एक हिस्सा दिखाया गया है और इसे तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है। उनका दावा है कि पूरा वीडियो देखने पर स्थिति और संदर्भ स्पष्ट हो जाएगा। उनके अनुसार, वीडियो में कही गई बातें गरीब और कमजोर मतदाताओं की सुरक्षा के उद्देश्य से थीं, किसी को धमकाने का इरादा नहीं था।


उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले मोकामा के पंडारक में जातिगत भेदभाव को लेकर एक खास जाति को निशाना बनाते हुए अपशब्दों का इस्तेमाल हुआ था, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। ग्रामीण मतदाता स्वतंत्र रूप से मतदान कर सकें, इसके लिए उन्होंने अपनी पार्टी के लोगों को जागरूक और सुरक्षित रखने की अपील की थी।


इसके साथ ही उन्होंने तेजस्वी यादव पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि तेजस्वी जातीय हिंसा बढ़ाना चाहते हैं। वह अपने पिता लालू यादव के शासनकाल जैसा माहौल वापस लाना चाहते हैं, जब ‘भूरा बाल साफ करो’ जैसे नारे दिए जाते थे। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। हमारा काम वोटरों की रक्षा करना भी है। मुझे नहीं लगता कि मोकामा के वोटरों की सुरक्षा करना कोई अपराध है। वह हमारा संसदीय क्षेत्र है और वहां के लोगों की सुरक्षा करना हमारा फर्ज है।


बिहार में विधानसभा चुनाव दो चरणों में हो रहे हैं। पहले चरण का मतदान 6 नवंबर को 18 जिलों की 121 विधानसभा सीटों पर होगा, जबकि दूसरे चरण का मतदान 11 नवंबर को निर्धारित है। राज्य में कुल 3.75 करोड़ से अधिक मतदाता मतदान करेंगे। चुनाव आयोग ने सभी बूथों पर सुरक्षा, वेबकास्टिंग और सशस्त्र बलों की तैनाती सुनिश्चित की है, ताकि मतदान शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न हो सके।


राजनीतिक दलों ने अपने समर्थकों को मतदान के लिए जागरूक किया है और किसी तरह की धमकी या दबाव से बचने के निर्देश दिए हैं। राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि मोकामा हिंसा और वायरल वीडियो जैसी घटनाएं मतदाताओं को और अधिक सतर्क करेंगी तथा मतदान में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होगी। इस मामले में निष्पक्ष जांच, पूरे वीडियो का विश्लेषण और कानून के अनुसार कार्रवाई बेहद जरूरी है। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दौरान ऐसे विवाद यह दर्शाते हैं कि लोकतंत्र में मतदाता की स्वतंत्रता और सुरक्षा सर्वोपरि है।