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Jagdanand Singh allegation : जगदानंद सिंह का दावा फेल: हर ईवीएम में 25,000 वोट प्रीलोड होने का आरोप पर चुनाव आयोग ने बताया सच

राजद नेता जगदानंद सिंह द्वारा ईवीएम में 25,000 प्रीलोडेड वोट होने का दावा राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है, लेकिन यह आरोप तकनीकी रूप से असंभव होने के साथ-साथ चुनावी प्रक्रिया और उपलब्ध सभी आधिकारिक रिकॉर्ड से भी पूरी तरह खारिज होता है।

Jagdanand Singh allegation : जगदानंद सिंह का दावा फेल: हर ईवीएम में 25,000 वोट प्रीलोड होने का आरोप पर चुनाव आयोग ने बताया सच
Tejpratap
Tejpratap
6 मिनट

Jagdanand Singh allegation : बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections 2025) के परिणामों के बाद राजद ने सोमवार को पहली समीक्षा बैठक की। बैठक में पार्टी नेता लालू प्रसाद, राबड़ी देवी के साथ अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हुए। इस बैठक के बाद पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह (Jagdanand Singh) ने दावा किया कि बिहार चुनाव में जो ईवीएम (EVM) इस्तेमाल किए गए उनमें हर विधानभा में 25 हजार वोट पहले से मौजूद थे।


उन्होंने कहा ऐसा होने के बाद भी हमारे 25 विधायक जीत गए यह बड़ी बात है। तेजस्वी आवास के बाहर मीडिया से जगदानंद ने सवालिया लहजे में कहा कि राजद की ऐसी हालत होगी क्या आप लोगों को ऐसी उम्मीद थी। इसके बाद अब इस मामले में चुनाव आयोग के तरफ से सफाई दी गई है और इस मामले का सच भी रखा गया है। राजद के वरिष्ठ नेता जगदानंद सिंह द्वारा किया गया यह दावा कि “हर ईवीएम में 25,000 प्रीलोडेड वोट डाले गए थे”, न केवल तकनीकी रूप से असंभव है बल्कि निर्वाचन प्रक्रिया और उपलब्ध सभी वैधानिक रिकॉर्ड के भी पूरी तरह विरुद्ध है। चुनाव आयोग से लेकर राजनीतिक दलों के एजेंटों तक, हर स्तर पर मौजूद सुरक्षा, सत्यापन और प्रमाणित प्रक्रियाएं इस आरोप को निराधार साबित करती हैं।


सबसे पहले यह समझना आवश्यक है कि भारत में उपयोग होने वाली इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें (EVMs) पूरी तरह से स्टैंडअलोन डिवाइस हैं। इन मशीनों में ना इंटरनेट होता है, ना वाईफाई, ना ब्लूटूथ और ना ही कोई बाहरी कनेक्टिविटी। इसलिए किसी भी तरह की डिजिटल या रिमोट टैंपरिंग तकनीकी रूप से संभव ही नहीं है। मशीनें केवल भौतिक रूप से संचालित की जा सकती हैं, वह भी निर्वाचन आयोग की कड़ी निगरानी में तय प्रक्रियाओं के अनुसार।


मॉक पोल: सभी पार्टियों के सामने शून्य वोट से शुरुआत

मतदान से पहले हर बूथ पर मॉक पोल अनिवार्य रूप से कराया जाता है। इस दौरान मशीन पर परीक्षण वोट डाले जाते हैं ताकि किसी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना समाप्त हो सके। महत्वपूर्ण बात यह है कि—मॉक पोल सभी दलों के पोलिंग एजेंटों की उपस्थिति में किया जाता है, मॉक पोल के बाद सभी वोट क्लियर किए जाते हैं,और इसके उपरांत एक मॉक पोल सर्टिफिकेट पर सभी एजेंट हस्ताक्षर करते हैं। यदि किसी भी ईवीएम में पहले से वोट भरे होते, तो यह मॉक पोल के दौरान तुरंत सामने आ जाता। राजद के एजेंटों ने भी मॉक पोल प्रमाणपत्रों पर बिना किसी आपत्ति के हस्ताक्षर किए।


दो चरण की रैंडमाइजेशन: ईवीएम कहाँ जाएगी, कोई नहीं जान सकता

ईवीएम के आवंटन की प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष बनाने के लिए मशीनों की दो बार रैंडमाइजेशन की जाती है पहली रैंडमाइजेशन जिला स्तर पर होती है, जिसमें तय होता है कि कौन सी मशीन किस विधानसभा में भेजी जाएगी। दूसरी रैंडमाइजेशन विधानसभा स्तर पर होती है, जिसमें यह तय होता है कि कौन सी मशीन किस बूथ पर जाएगी। दोनों प्रक्रियाओं में सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि शामिल रहते हैं। चूंकि कोई भी पहले से नहीं जान सकता कि कौन सी मशीन किस बूथ पर जाएगी, इसलिए किसी भी प्रकार का पूर्व-निर्धारित छेड़छाड़ संभव ही नहीं है।


पोलिंग एजेंट, सीलिंग प्रक्रिया और स्ट्रॉन्ग रूम की निगरानी

हर चरण—मशीनों की सीलिंग, डिस्पैच, मतदान और स्ट्रॉन्ग रूम में जमा करने—में राजनीतिक दलों के एजेंट मौजूद रहते हैं। स्ट्रॉन्ग रूम को सीसीटीवी निगरानी में सील किया जाता है, और सील पर सभी दलों के एजेंटों के हस्ताक्षर होते हैं। अगर किसी भी मशीन में छेड़छाड़ या सील टूटने जैसी कोई घटना होती, तो एजेंट तुरंत आपत्ति दर्ज कर सकते थे।


लेकिन चुनाव प्रक्रिया के दौरान राजद की ओर से एक भी लिखित आपत्ति, शिकायत या अनियमितता का रिकॉर्ड दर्ज नहीं किया गया। यह स्वयं आरोप की विश्वसनीयता पर बड़ा प्रश्न चिन्ह लगाता है। VVPAT से वोट की दृश्य पुष्टि, कोई भी प्रीलोडेड वोट छिप नहीं सकता हर ईवीएम को VVPAT (वोटर वेरिफायबल पेपर ऑडिट ट्रेल) से जोड़ा गया होता है। मतदाता अपने वोट की पर्ची स्क्रीन पर कुछ सेकंड तक देख सकता है। 


यदि मशीन में पहले से वोट भरे होते तो मॉक पोल में वे दिखते, मतदान के दौरान कोई भी मतदाता इसे नोटिस करता, या VVPAT रिकॉर्ड में तुरंत अंतर दिखता। चुनाव आयोग हर विधानसभा में यादृच्छिक रूप से कुछ बूथों की VVPAT पर्चियों की गिनती करता है। इस चुनाव में भी कहीं भी EVM और VVPAT में एक भी वोट का अंतर नहीं पाया गया।


फॉर्म 17सी और अन्य वैधानिक दस्तावेज RJD के दावे को खारिज करते हैं हर बूथ पर मतदान के अंत में फॉर्म 17C (Account of Votes Recorded) तैयार किया जाता है, जिस पर सभी दलों के एजेंट हस्ताक्षर करते हैं। इस फॉर्म में कुल वोट, मशीन में दर्ज वोट और सीलिंग का पूरा विवरण दर्ज होता है। राजद के एजेंटों ने हर जगह फॉर्म 17C और सीलिंग दस्तावेजों पर बिना किसी आपत्ति के हस्ताक्षर किए, जो वर्तमान आरोप के बिल्कुल विपरीत है।