1st Bihar Published by: First Bihar Updated Wed, 12 Nov 2025 04:58:37 PM IST
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टीम इंडिया के पूर्व कप्तान रोहित शर्मा (Rohit Sharma) और दिग्गज बल्लेबाज विराट कोहली (Virat Kohli) एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह कोई अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट नहीं, बल्कि घरेलू क्रिकेट है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने दोनों वरिष्ठ खिलाड़ियों को साफ संदेश दिया है कि अगर वे भविष्य में भारत की वनडे टीम और 2027 विश्व कप (2027 World Cup) की रेस में बने रहना चाहते हैं, तो उन्हें घरेलू क्रिकेट में भाग लेना होगा। इसी दिशा में रोहित शर्मा ने पहला कदम बढ़ाते हुए मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (MCA) को अपनी उपलब्धता की जानकारी दे दी है।
रोहित शर्मा खेलेंगे विजय हजारे ट्रॉफी
सूत्रों के अनुसार, रोहित शर्मा ने पुष्टि की है कि वे विजय हजारे ट्रॉफी 2025 (Vijay Hazare Trophy 2025) में मुंबई टीम की ओर से खेलेंगे। यह टूर्नामेंट 24 दिसंबर से शुरू होगा। दिलचस्प बात यह है कि यह टूर्नामेंट भारत की दो महत्वपूर्ण वनडे सीरीज — दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ (3 से 9 दिसंबर) और न्यूजीलैंड के खिलाफ (11 जनवरी से) — के बीच आयोजित किया जाएगा।
इस बीच, विराट कोहली की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (DDCA) के अधिकारियों ने बताया कि अब तक कोहली ने अपने खेलने या न खेलने को लेकर कोई औपचारिक सूचना नहीं दी है। सूत्रों के अनुसार, 37 वर्षीय कोहली अपने कार्यक्रम को लेकर विचार कर रहे हैं, लेकिन बोर्ड चाहता है कि वे भी रोहित की तरह घरेलू क्रिकेट में उतरें ताकि वनडे क्रिकेट के लिए उनकी फिटनेस और फॉर्म बनी रहे।
बीसीसीआई का सख्त संदेश
बीसीसीआई ने साफ कर दिया है कि चाहे खिलाड़ी कितने भी बड़े क्यों न हों, उन्हें चयन के लिए खुद को साबित करना होगा। बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा,"बोर्ड और टीम प्रबंधन ने रोहित और कोहली दोनों को बता दिया है कि अगर उन्हें भारत के लिए खेलना है, तो उन्हें घरेलू क्रिकेट खेलना होगा। उन्होंने दो प्रारूपों—टेस्ट और टी20—से संन्यास ले लिया है, इसलिए मैच फिटनेस बनाए रखने के लिए उन्हें घरेलू स्तर पर खेलना जरूरी है।"यह निर्णय बीसीसीआई की उस नई नीति का हिस्सा है जिसके तहत सीनियर खिलाड़ियों को युवा खिलाड़ियों के लिए उदाहरण पेश करने को कहा गया है।
2027 वर्ल्ड कप की तैयारी का हिस्सा
भारत 2027 विश्व कप की तैयारी अभी से शुरू करना चाहता है। चयन समिति के अध्यक्ष अजित अगरकर (Ajit Agarkar) ने हाल ही में कहा था कि हालांकि रोहित और कोहली जैसे खिलाड़ी “ट्रायल पर नहीं” हैं, फिर भी उनकी फिटनेस और प्रदर्शन का मूल्यांकन घरेलू मैचों के जरिए किया जाएगा। अगरकर ने कहा,
“उन्होंने अपने करियर में सब कुछ हासिल किया है — रन, ट्रॉफी और सम्मान। लेकिन 2027 अभी बहुत दूर है। इसलिए उन्हें लगातार खेलते रहना होगा ताकि चयनकर्ता उनके वर्तमान प्रदर्शन और फिटनेस को देख सकें।”अगरकर के बयान से यह साफ है कि चयनकर्ता भविष्य की टीम बनाते समय अनुभव और फॉर्म दोनों पर समान ध्यान देना चाहते हैं।
ऑस्ट्रेलिया सीरीज में दिखी थी दोनों की क्लास
हाल ही में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हुई वनडे सीरीज में रोहित शर्मा और विराट कोहली दोनों ने हिस्सा लिया था। रोहित ने दूसरे और तीसरे वनडे में शानदार बल्लेबाजी की थी — उन्होंने एक अर्धशतक और एक शतक लगाया और प्लेयर ऑफ द सीरीज बने। वहीं, विराट कोहली की शुरुआत भले ही खराब रही हो, जब वे दो बार शून्य पर आउट हुए, लेकिन आखिरी मैच में उन्होंने नाबाद अर्धशतक लगाकर अपनी क्लास दिखाई। इन प्रदर्शनों से यह साबित हुआ कि दोनों दिग्गज अब भी वनडे प्रारूप में भारत के लिए अहम भूमिका निभा सकते हैं।
चयनकर्ताओं की रणनीति
पीटीआई की एक पुरानी रिपोर्ट के अनुसार, चयनकर्ताओं की योजना है कि रोहित और कोहली दोनों जनवरी में न्यूजीलैंड सीरीज से पहले कम से कम तीन विजय हजारे ट्रॉफी मैच खेलें। इससे चयनकर्ता उन्हें प्रतिस्पर्धी माहौल में देख सकेंगे। घरेलू क्रिकेट में प्रदर्शन न केवल फॉर्म बनाए रखने में मदद करेगा बल्कि युवा खिलाड़ियों को भी प्रेरणा देगा।
क्या कोहली भी देंगे हरी झंडी?
अब सबकी नजरें विराट कोहली पर टिकी हैं। पिछले कुछ वर्षों में कोहली ने अपने वर्कलोड को लेकर सतर्क रुख अपनाया है। लेकिन बोर्ड का सख्त रुख और 2027 वर्ल्ड कप का लक्ष्य देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि वे भी घरेलू मैदान पर उतरेंगे।
अगर कोहली विजय हजारे ट्रॉफी में खेलते हैं तो यह टूर्नामेंट भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के लिए किसी मिनी-वर्ल्ड कप से कम नहीं होगा। मुंबई की कप्तानी करते रोहित शर्मा और दिल्ली के लिए उतरते विराट कोहली को देखना क्रिकेट फैंस के लिए रोमांचक अनुभव होगा।
रोहित शर्मा का विजय हजारे ट्रॉफी में खेलना इस बात का संकेत है कि वे 2027 विश्व कप के लिए पूरी तरह समर्पित हैं। अब देखना यह होगा कि क्या विराट कोहली भी इस दिशा में कदम बढ़ाते हैं। बीसीसीआई का यह फैसला भारतीय क्रिकेट के लिए सकारात्मक माना जा रहा है, क्योंकि इससे घरेलू क्रिकेट को मजबूती मिलेगी और युवा खिलाड़ियों को भी प्रेरणा मिलेगी कि भारतीय टीम में जगह पाने के लिए मेहनत का कोई विकल्प नहीं।