1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Mar 06, 2026, 8:06:43 PM
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Satyendranath Tagore: सत्येंद्रनाथ टैगोर ऐसा नाम है, जिसे भले ही आम लोग कम जानते हों, लेकिन भारत के इतिहास में उनका योगदान स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। वह देश के पहले भारतीय सिविल सेवक (ICS) थे, जिसे आज की भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) का पूर्व रूप माना जाता है। सिविल सेवक होने के साथ-साथ वह एक संगीतकार, कवि, लेखक और समाज सुधारक भी थे। उनकी उपलब्धियां आज भी सिविल सेवा में जाने का सपना देखने वाले युवाओं को प्रेरित करती हैं।
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा सिविल सेवा परीक्षा 2025 का परिणाम घोषित किए जाने के बाद एक बार फिर सत्येंद्रनाथ टैगोर का नाम चर्चा में आ गया है। इस वर्ष 180 उम्मीदवारों का चयन भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के लिए हुआ है। ऐसे में देश के पहले भारतीय सिविल सेवक सत्येंद्रनाथ टैगोर का जीवन सफर जानना बेहद प्रेरणादायक है।
सत्येंद्रनाथ टैगोर का जन्म 1 जून 1842 को कलकत्ता (अब कोलकाता) में हुआ था। वह महर्षि देबेंद्रनाथ टैगोर और शारदा देवी के सबसे बड़े पुत्र थे और प्रसिद्ध साहित्यकार रवींद्रनाथ टैगोर के बड़े भाई थे। प्रतिष्ठित टैगोर परिवार में जन्म लेने के कारण उनके विचार बचपन से ही उदार और प्रगतिशील थे।
उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा कोलकाता के प्रेसिडेंसी कॉलेज से प्राप्त की, जो उस समय पश्चिमी शिक्षा का प्रमुख केंद्र था। वर्ष 1862 में वह भारतीय सिविल सेवा (ICS) परीक्षा देने के लिए इंग्लैंड गए, क्योंकि उस समय यह परीक्षा केवल लंदन में आयोजित होती थी। 1863 में उन्होंने नस्लीय भेदभाव की बाधाओं को तोड़ते हुए इस कठिन परीक्षा को पास किया और भारत के पहले भारतीय सिविल सेवक बने। यह भारत के औपनिवेशिक इतिहास में एक ऐतिहासिक उपलब्धि थी।
सत्येंद्रनाथ टैगोर बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने सांस्कृतिक आधुनिकीकरण और लैंगिक समानता जैसे विषयों पर कई निबंध लिखे। साथ ही उन्होंने रूमी, हाफिज़, शेक्सपियर और बायरन जैसे महान लेखकों की रचनाओं का बंगाली में अनुवाद किया। उनके गीतों में भारतीय रागों और पश्चिमी धुनों का अनूठा संगम देखने को मिलता था। उनका प्रसिद्ध गीत “मिले सबे भारत संतान, एकतान गागो गान” काफी चर्चित रहा।
प्रशासनिक सेवा में रहते हुए उन्होंने महिला सशक्तिकरण, शिक्षा के प्रसार और जाति व्यवस्था के खिलाफ सुधारों को बढ़ावा दिया। ब्रिटिश शासन का हिस्सा होने के बावजूद वह भारतीय समाज की जरूरतों और आकांक्षाओं के प्रति संवेदनशील थे। सत्येंद्रनाथ टैगोर की ईमानदारी, दूरदृष्टि और सामाजिक सुधार के प्रति समर्पण उन्हें भारतीय इतिहास के महान व्यक्तित्वों में शामिल करता है।