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Bihar election counting : मुजफ्फरपुर स्ट्रांग रूम विवाद: राजद के आरोपों पर मचा सियासी बवाल, प्रशासन ने बताया झूठ

बिहार चुनाव 2025 की मतगणना से पहले मुजफ्फरपुर स्ट्रांग रूम के सीसीटीवी बंद होने का वीडियो वायरल होने से हड़कंप मच गया। राजद ने धांधली का आरोप लगाया, जबकि प्रशासन ने दावे को झूठा बताया।

Bihar election counting : मुजफ्फरपुर स्ट्रांग रूम विवाद: राजद के आरोपों पर मचा सियासी बवाल, प्रशासन ने बताया झूठ
Tejpratap
Tejpratap
6 मिनट

Bihar election counting : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की मतगणना से पहले एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था और पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं। विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने मुजफ्फरपुर जिले के स्ट्रांग रूम का एक कथित वीडियो साझा कर चुनाव आयोग और प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर आरोप लगाए हैं। राजद का दावा है कि मुजफ्फरपुर स्थित स्ट्रांग रूम का सीसीटीवी कैमरा बंद है और ऐसी ही शिकायतें राज्य के कई अन्य जिलों से भी लगातार मिल रही हैं। इस वीडियो के सामने आने के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है।


राजद ने इस मामले को लेकर सीधे तौर पर केंद्र सरकार और भाजपा पर निशाना साधा है। पार्टी नेताओं का आरोप है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह देश की सुरक्षा छोड़कर बिहार की मतगणना में हस्तक्षेप कर रहे हैं और “धांधली करवाने की कोशिश” हो रही है। राजद ने कहा कि जब चुनाव आयोग को हर जिले की निगरानी करनी चाहिए थी, तब ऐसे मामलों पर चुप्पी क्यों है?


वीडियो के वायरल होते ही मुजफ्फरपुर जिला प्रशासन की ओर से तत्काल सफाई दी गई। प्रशासन ने पूरे मामले को “झूठा और भ्रामक” बताते हुए कहा कि स्ट्रांग रूम पूरी तरह सुरक्षित है, सभी कैमरे चालू हैं और 24 घंटे की निगरानी हो रही है। जिला निर्वाचन पदाधिकारी के निर्देश पर सीसीटीवी फुटेज का एक हिस्सा भी साझा किया गया, जिसमें पुलिस बल की तैनाती और कैमरों की कार्यवाही दिखाई गई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो पुराना या एडिटेड हो सकता है, जिसकी जांच की जा रही है।


हालांकि, इस सफाई के बावजूद सवालों का दौर थम नहीं रहा। राजद ने पलटवार करते हुए कहा कि अगर सब कुछ पारदर्शी है, तो प्रशासन को सार्वजनिक रूप से लाइव सीसीटीवी फुटेज जारी करने में दिक्कत क्या है? पार्टी प्रवक्ता ने कहा, “जब मतों की गिनती से पहले ही प्रशासन पर भरोसा नहीं किया जा सकता, तो निष्पक्ष परिणाम कैसे सुनिश्चित होंगे? बिहार में जनता का विश्वास तभी बहाल होगा जब चुनाव आयोग खुद हस्तक्षेप कर निगरानी की जिम्मेदारी संभाले।”


बता दें कि मुजफ्फरपुर में मतगणना 14 नवंबर को होनी है। इसके लिए प्रशासन ने कॉलेज परिसरों और स्ट्रांग रूम के चारों ओर भारी सुरक्षा व्यवस्था की है। जिला प्रशासन का कहना है कि मतपेटियों की सुरक्षा के लिए तीन स्तरीय व्यवस्था की गई है — सबसे अंदर सीआरपीएफ की तैनाती, बीच में बिहार पुलिस और बाहरी घेरे में मजिस्ट्रेटों के साथ जिला बल की उपस्थिति। इसके अलावा पूरे क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और रिकॉर्डिंग लगातार कंट्रोल रूम में मॉनिटर की जा रही है।


फिर भी, विपक्ष का आरोप है कि कुछ कैमरे तकनीकी खराबी के कारण बंद हैं या जानबूझकर ऑफ किए गए हैं। चुनावी संवेदनशीलता को देखते हुए यह आरोप छोटा नहीं है। इससे पहले भी बिहार के सासाराम और दरभंगा जिलों से भी स्ट्रांग रूम की निगरानी पर सवाल उठे थे, जिसके बाद वहां भी प्रशासन को सफाई देनी पड़ी थी।


राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बिहार की मौजूदा चुनावी स्थिति में इस तरह के विवाद चुनाव परिणामों की विश्वसनीयता पर असर डाल सकते हैं। जब हर सीट का परिणाम सत्ता की दिशा तय कर सकता है, तब मतगणना की पारदर्शिता सबसे अहम मुद्दा बन जाती है।


राजद का यह भी कहना है कि अगर प्रशासन के दावे सही हैं, तो फिर वीडियो सामने आने के बाद इतनी हड़बड़ी क्यों दिखाई गई? पार्टी का आरोप है कि जिला प्रशासन ने सीसीटीवी का फुटेज केवल चुनिंदा मीडिया को दिखाया और पूरे राज्य को भरोसा दिलाने के लिए सार्वजनिक प्रसारण नहीं किया।


वहीं, प्रशासन का पक्ष है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा कारणों से पूरे फुटेज को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। जिला निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा, “सभी कैमरे चालू हैं। तकनीकी जांच की गई है। यह दावा कि सीसीटीवी बंद था, गलत है। किसी भी तरह की अफवाह फैलाने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।”


इस बीच, चुनाव आयोग ने भी इस घटना की रिपोर्ट मांगी है। आयोग के सूत्रों के मुताबिक, सभी जिलों के स्ट्रांग रूम की रियल-टाइम निगरानी की जा रही है और कोई भी गड़बड़ी पाए जाने पर तत्काल कार्रवाई का प्रावधान है।


राजनीतिक रूप से यह मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि बिहार में इस बार मुकाबला बेहद करीबी माना जा रहा है। तेजस्वी यादव के नेतृत्व में महागठबंधन सत्ता में वापसी की उम्मीद जता रहा है, जबकि एनडीए अपने जनाधार को बनाए रखने में जुटा है। ऐसे में मतगणना के पहले सुरक्षा पर उठे सवाल चुनावी माहौल को और गरमा सकते हैं।


अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि जिला प्रशासन अपनी सफाई के बाद क्या कोई ठोस कार्रवाई करेगा या फिर मामला सिर्फ कागजों में निपटा दिया जाएगा। अगर अफवाह फैलाने वालों पर एफआईआर दर्ज होती है, तो प्रशासन को यह भी साबित करना होगा कि आरोप पूरी तरह निराधार थे।


फिलहाल, मुजफ्फरपुर का यह “स्ट्रांग रूम विवाद” बिहार चुनाव की सबसे चर्चित घटनाओं में से एक बन गया है — जिसने न सिर्फ मतगणना से पहले सियासी तापमान बढ़ा दिया है, बल्कि चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

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