Mokama Election 2025 : बाहुबली नेताओं के गढ़ मोकामा में यादव नेता के हत्या से कितना बदल सकता है समीकरण; जानिए किस जाति हैं कितने वोटर

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1st Bihar Published by: First Bihar Updated Fri, 31 Oct 2025 04:35:17 PM IST

Mokama Election 2025 : बाहुबली नेताओं के गढ़ मोकामा में यादव नेता के हत्या से कितना बदल सकता है समीकरण; जानिए किस जाति हैं कितने वोटर

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Mokama Election 2025  : पटना से करीब 100 किलोमीटर दूर मोकामा विधानसभा क्षेत्र में गुरुवार को दुलारचंद यादव की हत्या ने बिहार की सियासत को हिला दिया है। 75 वर्षीय दुलारचंद यादव की हत्या का आरोप जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के उम्मीदवार और बाहुबली नेता अनंत सिंह पर लगा है। इस वारदात ने न सिर्फ मोकामा बल्कि पूरे बिहार के चुनावी माहौल को गरमा दिया है। अनंत सिंह ने इस हत्या के पीछे अपने प्रतिद्वंद्वी बाहुबली सूरजभान सिंह का हाथ बताया है। गौरतलब है कि सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी इस बार मोकामा से राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) की टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं।


दुलारचंद यादव की सियासी भूमिका

दुलारचंद यादव का मोकामा के टाल इलाके में गहरा प्रभाव था। वे कभी लालू प्रसाद यादव के करीबी माने जाते थे, लेकिन बाद में अनंत सिंह के साथ हो गए थे। इस बार उन्होंने जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी के समर्थन में पूरी ताकत झोंक दी थी। माना जा रहा है कि इसी सियासी सक्रियता ने उनकी हत्या की पृष्ठभूमि तैयार की। मोकामा के टाल इलाके में उनकी दबंग छवि के कारण उन्हें ‘टाल का बादशाह’ कहा जाता था।


1990 के दशक से ही दुलारचंद यादव ने भूमिहार वर्चस्व को चुनौती देने की कोशिश की। यादव, ओबीसी और दलित समुदाय के समर्थन से उन्होंने कई बार चुनावी मैदान में अनंत सिंह और उनके परिवार को चुनौती दी, लेकिन जीत नहीं पाए। 2019 में उन्हें पटना ग्रामीण इलाके में गैंगस्टर के तौर पर गिरफ्तार किया गया था।


मोकामा की राजनीति में बाहुबल का प्रभाव

मोकामा की राजनीति पिछले तीन दशक से बाहुबलियों के कब्जे में रही है। इस सीट पर बाहुबली अनंत सिंह और सूरजभान सिंह के बीच वर्चस्व की लड़ाई लगातार चली आ रही है। 1990 में अनंत सिंह के बड़े भाई दिलीप सिंह जनता दल से विधायक बने, लेकिन 2000 में उन्हें सूरजभान सिंह ने हराया। 2005 में अनंत सिंह ने सियासत में एंट्री की और जेडीयू से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे। तब से 2020 तक वे लगातार जीतते रहे—तीन बार जेडीयू, एक बार निर्दलीय और एक बार आरजेडी के टिकट पर।


2022 में सजा होने के बाद उनकी सदस्यता समाप्त कर दी गई और उपचुनाव में उनकी पत्नी नीलिमा देवी ने जीत दर्ज की। अब अनंत सिंह एक बार फिर जेडीयू के टिकट पर मैदान में हैं। दूसरी ओर सूरजभान सिंह ने अपनी पत्नी वीणा देवी को आरजेडी से प्रत्याशी बनाया है, जिससे यह सीट दो बाहुबलियों की प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुकी है।


मोकामा में जातीय समीकरण

मोकामा की राजनीति भूमिहारों के इर्द-गिर्द घूमती है। करीब 30 फीसदी आबादी भूमिहार समुदाय की है, जिसके चलते यह क्षेत्र ‘भूमिहारों की राजधानी’ कहा जाता है। 1952 से अब तक जितने विधायक बने, वे सभी इसी समुदाय से रहे हैं। भूमिहारों के बाद यादव समुदाय का दबदबा है, जिनकी संख्या लगभग 20 फीसदी है। इसके अलावा राजपूत, कुर्मी, कोइरी और दलित मतदाता भी अहम भूमिका निभाते हैं।


भूमिहारों को सबसे बड़ी चुनौती यादवों से मिलती रही है। नब्बे के दशक में लालू यादव के उदय के साथ यादव समुदाय की राजनीतिक पकड़ मजबूत हुई, और इसी दौर में दुलारचंद यादव जैसे नेताओं का उदय हुआ जिन्होंने भूमिहार वर्चस्व को सीधे चुनौती दी।


सूरजभान सिंह और अनंत सिंह की जंग

सूरजभान सिंह का नाम 90 के दशक में बिहार के अपराध जगत और राजनीति दोनों में गूंजता था। उन्होंने 2000 में दिलीप सिंह को हराकर विधायक बने। आज उनकी पत्नी वीणा देवी मोकामा से आरजेडी की उम्मीदवार हैं। वीणा देवी पहले मुंगेर से लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) की सांसद रह चुकी हैं।


सूरजभान और अनंत दोनों भूमिहार समुदाय से आते हैं और अपने-अपने क्षेत्रों में भारी जनाधार रखते हैं। इन दोनों के बीच का टकराव सिर्फ चुनावी नहीं, बल्कि दशकों पुराना वर्चस्व संघर्ष है। मोकामा का यह चुनाव इसलिए चर्चा में है क्योंकि यहां दो बाहुबलियों की सियासी ताकत की सीधी टक्कर है।


मोकामा की बाहुबली राजनीति का इतिहास

मोकामा सीट पर बाहुबल का प्रभाव नया नहीं है। यहां के राजनीतिक इतिहास में ज्यादातर विधायक या तो बाहुबली रहे हैं या बाहुबली समर्थित। 2005 से अब तक अनंत सिंह ने अपनी दबंग छवि और भूमिहार वोट बैंक के सहारे लगातार जीत दर्ज की। 2020 में आरजेडी के टिकट से जीतने के बाद जब उन्हें जेल हुई तो मोकामा की सियासत अस्थिर हो गई।


इस बीच सूरजभान सिंह के करीबी ललन सिंह उर्फ नलिनी रंजन सिंह कई बार अनंत सिंह के खिलाफ उतरे, लेकिन हर बार हार का सामना करना पड़ा। बीजेपी ने 2022 के उपचुनाव में ललन सिंह की पत्नी सोनम देवी को उम्मीदवार बनाया था, जिन्हें सूरजभान सिंह का समर्थन प्राप्त था।


अबकी बार मोकामा में क्या होगा?

दुलारचंद यादव की हत्या ने मोकामा की चुनावी जमीन को एक बार फिर उबाल पर ला दिया है। एक ओर जेडीयू के अनंत सिंह हैं, जो खुद को भूमिहारों का सच्चा प्रतिनिधि बताते हैं, वहीं आरजेडी की वीणा देवी हैं, जिन्हें सूरजभान सिंह का पूरा समर्थन हासिल है।


मोकामा की यह लड़ाई सिर्फ दो उम्मीदवारों की नहीं, बल्कि दो बाहुबलियों की सियासी हैसियत की जंग बन चुकी है। यहां जातीय समीकरण, बाहुबली छवि और पुराने रिश्ते – सब कुछ दांव पर है। बिहार की राजनीति में मोकामा विधानसभा सीट एक बार फिर ‘सबसे हॉट सीट’ बन चुकी है, जहां हर वोट बाहुबल, जातीय समीकरण और पुराने बदले की कहानी कहता नजर आ रहा है।