Bihar election violence : मोकामा में नहीं थम रहा बाहुबलियों के आंतक का राज ! अब निर्दलीय कैंडिडेट के ऊपर थाने से महज कुछ मीटर की दूरी पर जानलेवा हमला ; जानिए किस पर लग रहा आरोप

बिहार विधानसभा चुनाव के बाद मोकामा में तनाव बढ़ गया है। निर्दलीय प्रत्याशी राहुल कुमार पर रविवार रात जानलेवा हमला हुआ। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mon, 10 Nov 2025 12:56:14 PM IST

Bihar election violence : मोकामा में नहीं थम रहा बाहुबलियों के आंतक का राज ! अब निर्दलीय कैंडिडेट के ऊपर थाने से महज कुछ मीटर की दूरी पर जानलेवा हमला ; जानिए किस पर लग रहा आरोप

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Bihar election violence : बिहार विधानसभा चुनाव के बीच मोकामा सीट एक बार फिर सुर्खियों में है। रविवार की रात यहां एक बड़ी वारदात हुई, जब निर्दलीय प्रत्याशी राहुल कुमार पर जानलेवा हमला किया गया। घटना ने न केवल चुनावी माहौल को झकझोर दिया, बल्कि पूरे इलाके में तनाव का माहौल पैदा कर दिया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है, वहीं राहुल कुमार का आरोप है कि यह हमला सुनियोजित साजिश के तहत किया गया है।


राहुल कुमार ने मोकामा थाना में दिए अपने आवेदन में बताया कि यह घटना 9 नवंबर की रात करीब 9:20 बजे की है। वे स्कूटी से तेराहा और बाजार चौक के बीच गुजर रहे थे, तभी अचानक एक टाटा सफारी गाड़ी से आए तीन युवकों ने उन पर हमला कर दिया। राहुल कुमार ने आरोप लगाया कि उन पर लाठी, डंडे और रॉड से हमला किया गया। उन्होंने कहा कि हमलावरों में मोकामा वार्ड नंबर 18 के निवासी शिवम उर्फ गोलू, सत्यम कुमार और एक अज्ञात व्यक्ति शामिल थे।


हमले में राहुल कुमार के सिर और चेहरे पर गंभीर चोटें आईं। उन्होंने बताया कि जब वे अपनी स्कूटी से उतर रहे थे, तभी गाड़ी चालक ने उन्हें कुचलने की कोशिश की। इसके बाद हमलावरों ने न केवल उनकी पिटाई की बल्कि उनकी स्कूटी भी क्षतिग्रस्त कर दी। राहुल के अनुसार, हमलावरों ने उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी। घायल अवस्था में उन्होंने पुलिस की आपात सेवा 112 नंबर पर कॉल किया, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया।


फिलहाल राहुल कुमार का इलाज स्थानीय अस्पताल में चल रहा है और पुलिस ने घटना की जांच शुरू कर दी है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच टीम गठित की गई है। आरोपियों की पहचान की पुष्टि के लिए इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।


गौरतलब है कि मोकामा विधानसभा सीट इस बार भी बिहार चुनाव में चर्चा का केंद्र बनी रही। यह सीट बाहुबली नेताओं की राजनीति के लिए जानी जाती है। जदयू से अनंत सिंह मैदान में हैं, जबकि महागठबंधन की ओर से सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी चुनाव लड़ी हैं। इस सीट पर जनसुराज प्रत्याशी प्रियदर्शी पीयूष भी मैदान में थे। हाल के दिनों में इस क्षेत्र में लगातार हिंसक घटनाएं हुई हैं, जिसने माहौल को और भी संवेदनशील बना दिया है।


कुछ दिन पहले ही जनसुराज प्रत्याशी प्रियदर्शी पीयूष के समर्थक दुलारचंद यादव की हत्या हुई थी। वह कई आपराधिक मामलों में आरोपी था, लेकिन चुनाव प्रचार में सक्रिय भूमिका निभा रहा था। इस हत्या के बाद बाहुबली नेता अनंत सिंह को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इसके बावजूद क्षेत्र में शांति बहाल नहीं हो पाई थी, और अब निर्दलीय प्रत्याशी पर हुए इस हमले ने तनाव को और बढ़ा दिया है।


मोकामा में 6 नवंबर को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतदान हुआ था। प्रशासन ने संवेदनशील और अतिसंवेदनशील बूथों पर भारी पुलिस बल की तैनाती की थी। इसके बावजूद लगभग 65 प्रतिशत मतदाताओं ने शांतिपूर्ण तरीके से अपने मताधिकार का प्रयोग किया। लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद भी हिंसा का सिलसिला थम नहीं रहा है।


राहुल कुमार ने इस चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में “सेब” निशान पर अपनी किस्मत आजमाई थी। उन्होंने खुद को मोकामा के बाहुबलियों के बीच एक "साफ-सुथरे और ईमानदार उम्मीदवार" के रूप में पेश किया था। उनका कहना था कि मोकामा को अपराध और डर की राजनीति से बाहर निकालना उनका लक्ष्य है। स्थानीय मतदाताओं के बीच उनकी छवि एक शिक्षित और सुलझे हुए युवा उम्मीदवार की रही है।


राहुल कुमार पर हुआ हमला न केवल एक व्यक्तिगत हमला माना जा रहा है, बल्कि इसे मोकामा की चुनावी राजनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है। इलाके में पहले से ही बाहुबली राजनीति और प्रतिद्वंद्विता के कारण कई गुट सक्रिय हैं। राहुल कुमार का दावा है कि कुछ राजनीतिक विरोधियों को उनकी लोकप्रियता रास नहीं आ रही थी, और इसलिए यह हमला कराया गया।


पुलिस अधीक्षक ने कहा है कि घटना की निष्पक्ष जांच होगी और दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। स्थानीय प्रशासन ने मोकामा क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया है ताकि स्थिति नियंत्रण में रहे। वहीं, स्थानीय लोगों में डर और आक्रोश का माहौल है।


मोकामा का यह ताजा घटनाक्रम एक बार फिर यह दर्शाता है कि बिहार की राजनीति में बाहुबल और हिंसा का साया अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। चुनावी रंजिशें और प्रतिद्वंद्विता अक्सर ऐसे हिंसक घटनाओं को जन्म देती हैं, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित होती है। अब देखना यह होगा कि पुलिस जांच इस मामले में क्या नया मोड़ लाती है और क्या मोकामा की सियासी सरगर्मी इस हिंसा के बाद कुछ शांत हो पाती है या नहीं।