1st Bihar Published by: First Bihar Updated Nov 01, 2025, 12:31:26 PM
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Dularchand Yadav murder : मोकामा के टाल क्षेत्र में हुई दुलारचंद यादव हत्या मामले में अब पुलिस की भूमिका पर उठे गंभीर सवालों के बाद कार्रवाई शुरू कर दी गई है। ग्रामीण एसपी विक्रम सिहाग ने घोसवरी थाना के सब-इंस्पेक्टर मधुसूदन और भदौर थाना के सब-इंस्पेक्टर रवि रंजन पर कार्रवाई की पुष्टि की है। दोनों अधिकारियों पर लापरवाही बरतने के आरोप लगे हैं। यह कदम इस हत्या मामले में उचित जांच और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
मोकामा की स्थानीय जनता और पीड़ित परिवार ने पुलिस की अनदेखी और समय पर कार्रवाई न करने को लेकर नाराजगी जताई थी। इस मामले में अब जांच की गहराई बढ़ाई जा रही है ताकि दोषियों को समय रहते सजा दिलाई जा सके। पुलिस अधिकारियों के खिलाफ यह कार्रवाई यह संदेश देती है कि कानून और व्यवस्था बनाए रखना हर पुलिस अधिकारी की जिम्मेदारी है।
इस घटनाक्रम ने बिहार के चुनावी माहौल पर भी प्रभाव डाला है, क्योंकि हत्या की घटनाओं ने जनता में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। प्रशासन द्वारा उठाए गए यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए हैं कि भविष्य में किसी भी मामले में लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
वहीं, चुनाव से ठीक पहले मोकामा में हुए बहुचर्चित दुलारचंद यादव हत्याकांड ने नया मोड़ ले लिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, दुलारचंद यादव की मौत गोली लगने से नहीं हुई, बल्कि सीने पर गाड़ी चढ़ने के कारण उनके फेफड़े फट गए और हड्डी टूटने के कारण हुई। यह खुलासा पुलिस जांच और परिवार के आरोपों के बीच नए सवाल खड़े कर रहा है और पूरे मामले में एक नया आयाम जोड़ रहा है।
मोकामा विधानसभा क्षेत्र में यह घटना जेडीयू उम्मीदवार अनंत सिंह और जन सुराज प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी के समर्थकों के बीच हुई झड़प के दौरान हुई थी। शुरुआती रिपोर्ट और एफआईआर में दुलारचंद यादव की हत्या को गोली लगने से जोड़ा गया था। परिजनों ने आरोप लगाया था कि उनकी हत्या जानबूझकर की गई थी, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने इस धारणा को पूरी तरह से चुनौती दी है। रिपोर्ट में साफ कहा गया कि उनके सीने पर गाड़ी चढ़ने से हड्डी टूट गई और फेफड़े फट गए, जिससे उनकी मौत हुई।
मेडिकल टीम ने शुक्रवार को बाढ़ में मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में करीब दो घंटे तक पोस्टमार्टम किया। तीन डॉक्टरों की टीम ने घटना की निष्पक्षता को सुनिश्चित करने के लिए हर पहलू का गहन अध्ययन किया। पोस्टमार्टम की यह रिपोर्ट न केवल दुलारचंद यादव के परिवार के लिए बल्कि जांच में लगे अधिकारियों के लिए भी बड़ी चुनौती साबित हुई है। अब यह स्पष्ट हो गया है कि गोली केवल बाहरी चोट थी और मौत का कारण नहीं थी।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि पुलिस इस नए तथ्य को ध्यान में रखते हुए अपनी जांच की दिशा किस प्रकार बदलती है। दुलारचंद यादव के परिवार ने पहले ही हत्या के आरोप में एफआईआर दर्ज करवाई थी। अब सवाल यह है कि क्या एफआईआर में संशोधन किया जाएगा या मामले की पूरी जांच नए सिरे से शुरू होगी। राजनीतिक विश्लेषक भी मानते हैं कि यह घटना मोकामा विधानसभा सीट पर चुनावी माहौल को और अधिक गर्म कर सकती है।