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keshariya election result : जदयू की शालिनी मिश्रा 16 हजार वोटों से विजयी, वीआईपी के वरुण विजय को मात

केसरिया विधानसभा सीट पर दूसरे चरण की वोटिंग के बाद आज हुई मतगणना में जदयू की शालिनी मिश्रा ने बड़ी जीत दर्ज की। वीआईपी के वरुण विजय को पछाड़ते हुए उन्होंने 16 हजार वोटों से जीत हासिल की। सुबह से ही मिले रुझानों में उनकी बढ़त लगातार कायम रही।

keshariya election result : जदयू की शालिनी मिश्रा 16 हजार वोटों से विजयी, वीआईपी के वरुण विजय को मात
Tejpratap
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keshariya election result : पूर्वी चंपारण की केसरिया विधानसभा सीट, जहां 11 नवंबर को दूसरे चरण में मतदान हुआ था, आज मतगणना के दौरान एक बार फिर सुर्खियों में रही। सुबह आठ बजे से मतगणना शुरू हुई, जिसमें शुरुआती आधे घंटे बैलट पेपर के वोटों की गिनती हुई। इसके बाद ईवीएम के वोटों की गिनती शुरू हुई और धीरे-धीरे रुझान साफ होने लगे। इस सीट पर मुकाबला मुख्य रूप से जदयू की मौजूदा विधायक शालिनी मिश्रा और वीआईपी के उम्मीदवार वरुण विजय के बीच था। वहीं जनसुराज पार्टी ने नाज अहमद खान को मैदान में उतारा था, लेकिन निर्णायक लड़ाई दो ही प्रमुख प्रत्याशियों के बीच सिमट गई।


अंतिम परिणामों में जदयू की शालिनी मिश्रा ने बड़ी बढ़त के साथ जीत दर्ज की। वह 16 हजार से अधिक वोटों के अंतर से विजयी हुईं। शुरुआती रुझानों से ही उनकी बढ़त कायम थी, जो अंतिम राउंड में और मजबूत हो गई। उनकी इस जीत के साथ जदयू ने इस अहम सीट पर अपना कब्जा फिर से कायम रखा है।


2020 में भी मिली थी जीत

केसरिया सीट पर जदयू का प्रभाव पिछले चुनाव में भी दिखाई दिया था। वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में शालिनी मिश्रा ने राजद के प्रत्याशी संतोष कुशवाहा को एक कड़े मुकाबले में हराया था। उस चुनाव में शालिनी मिश्रा को कुल 40,219 वोट मिले थे, जबकि संतोष कुशवाहा को 30,992 वोट प्राप्त हुए। एलजेपी के उम्मीदवार राम शरण प्रसाद यादव उस चुनाव में तीसरे स्थान पर रहे थे।


एक समय इस सीट पर CPI का अच्छा प्रभाव था, और लंबे समय तक यह वामपंथी राजनीति का केंद्र माना जाता था। लेकिन समय के साथ राजनीतिक परिस्थितियाँ बदलीं और जदयू, राजद और बीजेपी के उम्मीदवारों ने यहां अपनी पकड़ मजबूत की। वर्ष 2015 में राजद के डॉ. राजेश कुमार ने इस सीट पर जीत हासिल की थी, लेकिन उसके बाद से यह सीट जदयू के पाले में बनी हुई है।


शालिनी मिश्रा का राजनीतिक सफर

शालिनी मिश्रा की जीत सिर्फ एक चुनावी सफलता नहीं, बल्कि उनके लंबे राजनीतिक सफर का परिणाम है। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत भाकपा (CPI) से की थी। वामपंथी विचारधारा से शुरुआत करने के बाद उन्होंने जदयू का दामन थामा और क्षेत्र में मजबूत जनाधार बनाया। क्षेत्र में उनकी छवि एक सक्रिय, सहज और समस्याओं को गंभीरता से समझने वाली जनप्रतिनिधि की रही है। पिछले कार्यकाल में उन्होंने सड़क, बिजली, शिक्षा और किसानों के मुद्दों पर काम करने का दावा किया था। उनके प्रदर्शन और स्थानीय संपर्क ने इस चुनाव में भी उन्हें बड़ी बढ़त दिलाने में अहम भूमिका निभाई।


कृषि प्रधान क्षेत्र, कटाव की है बड़ी समस्या

केसरिया विधानसभा क्षेत्र मुख्य रूप से कृषि आधारित है। यहां की अर्थव्यवस्था खेती और उससे जुड़े कार्यों पर निर्भर करती है। धान, मक्का और गन्ना जैसी फसलों की खेती बड़े पैमाने पर होती है। हालांकि, इस इलाके की एक बड़ी समस्या कटाव है, जो हर साल बरसात के मौसम में लोगों के लिए चुनौती बन जाती है। गंडक नदी की धारा में परिवर्तन और तेज बहाव की वजह से कई गांवों को कटाव का सामना करना पड़ता है, जिससे किसानों की जमीन और आवास दोनों प्रभावित होते हैं।


स्थानीय लोग लंबे समय से इस समस्या के समाधान की मांग करते रहे हैं। शालिनी मिश्रा ने अपने चुनावी अभियान में कटाव रोधी तटबंधों, सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने और किसानों को राहत देने की बात कही थी। उनकी जीत के बाद लोगों में उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।


क्षेत्र की राजनीतिक महत्ता

केसरिया विधानसभा सीट पूर्वी चंपारण की सबसे महत्वपूर्ण सीटों में से एक मानी जाती है। यहां पिछड़ा वर्ग, किसान और मजदूर समुदाय की बड़ी संख्या है। राजनीतिक दलों के लिए यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रहा है, क्योंकि यहां का रुझान आसपास की सीटों को भी प्रभावित करता है।


इस बार की जीत के साथ जदयू ने साबित कर दिया है कि शालिनी मिश्रा की लोकप्रियता बरकरार है और पार्टी पर लोगों का भरोसा अभी भी मजबूत है। वहीं वीआईपी और जनसुराज जैसे दलों के लिए यह परिणाम संकेत है कि उन्हें क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए और मेहनत की जरूरत है।

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