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Bihar Election 2025 : फाइनल राउंड में 122 सीटों पर मतदान, 3 प्रदेश अध्यक्षों और 12 मंत्रियों की प्रतिष्ठा दांव पर

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 अपने निर्णायक मोड़ पर है। दूसरे चरण में 20 जिलों की 122 सीटों पर 3.7 करोड़ से अधिक मतदाता 1302 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे। इस चरण में कई दिग्गज नेताओं, मंत्रियों और दलों के प्रदेश अध्यक्षों की प्रतिष्ठा दांव पर है।

Bihar Election 2025 : फाइनल राउंड में 122 सीटों पर मतदान, 3 प्रदेश अध्यक्षों और 12 मंत्रियों की प्रतिष्ठा दांव पर
Tejpratap
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Bihar Election 2025 : बिहार विधानसभा चुनाव का महासंग्राम अब अपने अंतिम और निर्णायक मोड़ पर है। मंगलवार, 11 नवंबर को होने वाले दूसरे चरण के मतदान में 20 जिलों की 122 विधानसभा सीटों पर वोट डाले जाएंगे। इस चरण का नतीजा यह तय करेगा कि बिहार की सत्ता किसके हाथों में जाएगी। राज्य के राजनीतिक परिदृश्य में यह चरण सबसे अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसमें कई दिग्गज नेताओं, मंत्रियों और प्रदेश अध्यक्षों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है।


इस चरण में कुल 1302 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनके भाग्य का फैसला 3.7 करोड़ से अधिक मतदाता करने जा रहे हैं। राज्य चुनाव आयोग के मुताबिक, इन मतदाताओं के लिए 45,399 मतदान केंद्र बनाए गए हैं, जहां सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए हैं। पुलिस, अर्धसैनिक बल और चुनाव आयोग की टीमें मिलकर यह सुनिश्चित कर रही हैं कि मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो।


प्रदेश अध्यक्षों से लेकर मंत्रियों तक दांव पर भविष्य

इस चरण में बिहार के तीन प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रदेश अध्यक्ष मैदान में हैं। गोविंदगंज से लोजपा (रामविलास) के अध्यक्ष राजू तिवारी, कुटुंबा से कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम, और टेकारी से हम (हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा) के प्रदेश अध्यक्ष अनिल कुमार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इन तीनों की सीटों पर मुकाबला बेहद दिलचस्प और प्रतिष्ठापूर्ण माना जा रहा है।


वहीं, नीतीश सरकार के कई मंत्रियों की साख भी इसी चरण में दांव पर है। सुपौल से बिजेंद्र प्रसाद यादव, झंझारपुर से नीतीश मिश्रा, छातापुर से नीरज सिंह बबलू, फुलपरास से शिला मंडल, और बेतिया से उपमुख्यमंत्री रेणु देवी चुनावी रणभूमि में उतरे हैं। इन सभी सीटों पर त्रिकोणीय और कहीं-कहीं चतुष्कोणीय मुकाबले की संभावना जताई जा रही है।


दिग्गजों की प्रतिष्ठा और पारिवारिक राजनीति पर नजर

इस चरण में पूर्व उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद कटिहार से मैदान में हैं, जबकि पूर्व विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी सिकंदरा से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इसी के साथ बिहार की पारिवारिक राजनीति भी इस चरण में खास चर्चा में है। औरंगाबाद से भाजपा के पूर्व सांसद की बहू स्मिता गुप्ता, और रालोसोपा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा की पत्नी स्नेह लता चुनाव मैदान में हैं। वहीं, नवीनगर से चर्चित चेहरा और पूर्व सांसद आनंद मोहन के पुत्र चेतन आनंद भी इस बार मैदान में हैं, जिन पर पार्टी और समर्थकों की निगाहें टिकी हैं।


दिलचस्प मुकाबले और आंकड़ों का गणित

चुनाव आयोग के अनुसार, इस चरण में सबसे अधिक 22 उम्मीदवार चैनपुर, सासाराम, और गया शहर सीटों पर हैं। वहीं, लौरिया और चनपटिया सीटों पर सबसे कम 5-5 प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं। इन इलाकों में स्थानीय समीकरण और जातीय गणित अहम भूमिका निभाने वाले हैं।


मतदान को लेकर प्रशासन पूरी तरह से सतर्क है। संवेदनशील और अति-संवेदनशील मतदान केंद्रों पर अतिरिक्त सुरक्षाबल की तैनाती की गई है। मतदाताओं में भी खासा उत्साह देखा जा रहा है, खासकर युवाओं और पहली बार वोट डालने वालों में।


14 नवंबर को तय होगी बिहार की किस्मत

दूसरे चरण के मतदान के बाद 14 नवंबर को मतगणना होगी, जिसके साथ ही बिहार की नई सरकार की तस्वीर साफ हो जाएगी। सभी राजनीतिक दलों ने दूसरे चरण के बाद तीसरे और अंतिम चरण के लिए अपनी रणनीति को और तेज कर दिया है। जनता दल (यू), भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, कांग्रेस और अन्य दलों के नेता मतदाताओं को लुभाने में जुटे हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता किस पर भरोसा जताती है — विकास के वादों पर या बदलाव की पुकार पर। बिहार की जनता ने लोकतंत्र के इस पर्व को अपना लिया है और अब सबकी निगाहें 14 नवंबर पर हैं, जब यह तय होगा कि 2025 में बिहार की सत्ता की कुर्सी पर कौन बैठेगा।

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