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Bihar Election 2025: बिहार में करोड़पति नेता जी का भरमार, जानिए किसके पास हैं सबसे अधिक पैसा तो कौन सबसे गरीब

Bihar Election 2025: एनडीए में करोड़पतियों की संख्या सबसे अधिक है। एनडीए के 92 उम्मीदवार करोड़पति हैं, जबकि महागठबंधन में 86 उम्मीदवारों का नाम करोड़पतियों की सूची में शामिल है। लखपति उम्मीदवारों की संख्या में इंडिया गठबंधन आगे है।

Bihar Election 2025
बिहार चुनाव 2025
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PRIYA DWIVEDI
5 मिनट

Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण में 18 जिलों की 121 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवारों की संपत्ति का विवरण चुनावी बहस का एक अहम मुद्दा बन गया है। उम्मीदवारों ने अपने शपथ पत्र के माध्यम से चुनाव आयोग को संपत्ति की जानकारी दी, जिससे यह साफ हुआ कि राजनीतिक क्षेत्र में करोड़पतियों की संख्या काफी अधिक है। एनडीए और इंडिया गठबंधन के कुल 243 उम्मीदवारों में से 178 उम्मीदवार यानी लगभग 73% की संपत्ति एक करोड़ रुपये या उससे अधिक है। वहीं, केवल 65 उम्मीदवारों यानी 27% की संपत्ति एक करोड़ रुपये से कम है। इस आंकड़े से यह स्पष्ट होता है कि बिहार विधानसभा में धन संपन्न वर्ग का प्रतिनिधित्व काफी मजबूत है।


दरअसल, एनडीए में करोड़पतियों की संख्या सबसे अधिक है। एनडीए के 92 उम्मीदवार करोड़पति हैं, जबकि महागठबंधन में 86 उम्मीदवारों का नाम करोड़पतियों की सूची में शामिल है। लखपति उम्मीदवारों की संख्या में इंडिया गठबंधन आगे है। कुल 64 लखपति उम्मीदवारों में 35 इंडिया गठबंधन से हैं, जबकि 29 एनडीए के हैं। इसमें वाम दलों के उम्मीदवारों की भी संख्या महत्वपूर्ण है। इंडिया गठबंधन के 35 लखपतियों में से 14 उम्मीदवार वाम दलों के हैं। यह दर्शाता है कि राजनीतिक दलों में आर्थिक विविधता के साथ-साथ संपत्ति के आधार पर प्रतिस्पर्धा भी देखने को मिल रही है।


संपत्ति के मामले में सबसे अमीर उम्मीदवार जदयू के कुमार पुष्पंजय हैं, जो बरबीघा से चुनाव लड़ रहे हैं। उनके पास कुल 71.57 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्ति है। इसके विपरीत, आरा विधानसभा क्षेत्र से माले के क्यामुद्दीन अंसारी सबसे गरीब उम्मीदवार हैं, जिनके पास केवल 37 हजार रुपये की चल संपत्ति है और उनकी पत्नी और परिजनों के नाम पर कोई अचल संपत्ति नहीं है। पहले चरण के टॉप पांच अमीर उम्मीदवारों में हाजीपुर से राजद के देव कुमार चौरसिया (67 करोड़ रुपये), बिक्रम से भाजपा के सिद्धार्थ सौरभ (42.87 करोड़ रुपये), बड़हरिया से राजद के अरुण कुमार गुप्ता (40.9 करोड़ रुपये) और मोकामा से जदयू के अनंत सिंह (37.88 करोड़ रुपये) शामिल हैं।


चुनाव आयोग के दस्तावेजों से यह भी पता चलता है कि संपत्ति के मामले में सबसे गरीब उम्मीदवारों की स्थिति बहुत चुनौतीपूर्ण है। हायाघाट से माकपा उम्मीदवार श्याम भारती के पास केवल एक पुरानी बाइक है, जबकि उनकी पत्नी के पास 2.36 लाख रुपये की चल और 55.63 लाख रुपये की अचल संपत्ति है। अगिआंव से भाजपा उम्मीदवार महेश पासवान की कुल संपत्ति मात्र 55 हजार रुपये है, जिसमें आठ लाख रुपये कृषि योग्य भूमि शामिल है। दरौली से लोजपा (रा) के विष्णुदेव पासवान के पास 3.62 लाख रुपये की चल संपत्ति है।


बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में संपत्ति के इस आंकड़े से यह साफ दिखता है कि राजनीति में आर्थिक शक्ति का बड़ा हाथ है। उम्मीदवारों की संपत्ति और उनके चुनावी संघर्ष के बीच गहरा संबंध है। करोड़पतियों का दबदबा राजनीतिक रणनीति और चुनावी प्रचार में भी स्पष्ट नजर आता है। वहीं, गरीब उम्मीदवारों की चुनौती यह साबित करती है कि लोकतांत्रिक प्रणाली में आर्थिक विविधता के बावजूद सभी वर्गों को चुनाव में भाग लेने का अवसर मिलता है।


इस चुनाव में संपत्ति के आधार पर उम्मीदवारों का विश्लेषण केवल आर्थिक स्थिति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह चुनावी समीकरण, दलों की रणनीति और उम्मीदवारों की लोकप्रियता को भी प्रभावित करता है। पहले चरण के 121 विधानसभा क्षेत्रों में यह देखना दिलचस्प होगा कि संपत्ति के हिसाब से उम्मीदवारों का प्रभाव जनता के वोटों पर किस तरह पड़ता है और यह बिहार विधानसभा में आने वाले नए राजनीतिक समीकरण को कैसे आकार देगा।


कुल मिलाकर, बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण में उम्मीदवारों की संपत्ति ने चुनावी परिदृश्य को और भी रोचक और बहस योग्य बना दिया है। करोड़पति और लखपति उम्मीदवारों के बीच मुकाबला, गरीब उम्मीदवारों की चुनौतियों के साथ, राज्य के राजनीतिक भविष्य की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह स्पष्ट संकेत है कि चुनाव में सिर्फ राजनीति की ही नहीं, बल्कि आर्थिक शक्ति की भी बड़ी भूमिका होती है।