1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mon, 10 Nov 2025 09:34:01 AM IST
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Bihar Election 2025 : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एनडीए की ओर से प्रचार अभियान की अगुवाई करते हुए पूरे राज्य में जबरदस्त जनसंपर्क अभियान चलाया। मुख्यमंत्री ने कुल 84 चुनावी जनसभाएं कीं, जिनमें से 11 सभाएं सड़क मार्ग से और 73 सभाएं हवाई मार्ग से संपन्न हुईं। इस दौरान उन्होंने न सिर्फ एनडीए उम्मीदवारों के समर्थन में वोट मांगा, बल्कि राज्य के विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं को जनता के सामने विस्तार से रखा।
चुनावी प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लगभग एक हजार किलोमीटर की सड़क यात्रा की। इस यात्रा के दौरान उन्होंने आठ विधानसभा क्षेत्रों में जनसंपर्क किया। नीतीश कुमार केवल मंचों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि सड़क मार्ग से गुजरते समय उन्होंने लोगों से सीधे संवाद स्थापित किया। वे रास्ते में रुककर आम जनता से मिलते रहे, उनका हालचाल पूछते रहे और उन्हें एनडीए सरकार की उपलब्धियों से अवगत कराया।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधनों में कहा कि एनडीए सरकार ने बिहार को पिछड़ेपन की स्थिति से निकालकर विकास के मार्ग पर अग्रसर किया है। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, सिंचाई, महिला सशक्तिकरण और रोजगार के क्षेत्र में सरकार की उपलब्धियों को गिनाया। साथ ही जनता से अपील की कि वे राज्य में विकास की रफ्तार बनाए रखने के लिए एनडीए गठबंधन को फिर से मजबूत समर्थन दें।
नीतीश कुमार ने बताया कि सरकार ने हर तबके के लिए योजनाएं लागू की हैं — चाहे वह छात्राओं को साइकिल और पोशाक योजना हो, या गरीब परिवारों के लिए पक्के मकान और शौचालय निर्माण की योजना। उन्होंने कहा कि बिहार में अब अपराध और भय का माहौल नहीं है, बल्कि कानून का शासन कायम हुआ है। मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोग केवल झूठे वादों के सहारे सत्ता में लौटना चाहते हैं, लेकिन जनता अब सब समझ चुकी है।
जानकारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने औसतन प्रतिदिन पांच जनसभाएं कीं। कई मौकों पर उन्होंने एक ही दिन में छह जनसभाओं को भी संबोधित किया। उनके इस ताबड़तोड़ प्रचार अभियान ने बिहार के हर इलाके में एनडीए की उपस्थिति को मजबूती दी।
सड़क मार्ग से की गई यात्राओं के दौरान नीतीश कुमार ने विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में एनडीए प्रत्याशियों से मुलाकात की। उन्होंने उम्मीदवारों को माला पहनाकर सम्मानित किया और लोगों से अपील की कि वे विकास और स्थिरता के लिए एनडीए के प्रत्याशियों को जिताएं।
नीतीश कुमार की सभाओं में बड़ी संख्या में लोग उमड़े। हर सभा में उन्होंने जनता से सीधे संवाद किया और उनसे पूछा कि वे सरकार के कामकाज से संतुष्ट हैं या नहीं। जनता की प्रतिक्रिया सकारात्मक रही, और कई स्थानों पर “फिर से नीतीश” के नारे गूंजते रहे।
मुख्यमंत्री का यह चुनावी सफर बिहार के राजनीतिक परिदृश्य में एक बार फिर यह संदेश देने में सफल रहा कि वे अब भी एनडीए की ओर से सबसे भरोसेमंद चेहरा हैं। उन्होंने न केवल अपने अनुभव और प्रशासनिक दक्षता का परिचय दिया, बल्कि जनता के बीच यह विश्वास भी जगाया कि यदि एनडीए की सरकार दोबारा बनती है तो विकास की गति और तेज होगी।
नीतीश कुमार की ये 84 सभाएं और हजार किलोमीटर की सड़क यात्रा चुनाव प्रचार के इतिहास में एक रिकॉर्ड की तरह देखी जा रही हैं। राज्य के कोने-कोने तक पहुंचने की उनकी रणनीति ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मुख्यमंत्री खुद को जनता से जुड़ा नेता बनाए रखना चाहते हैं। इन सभाओं के माध्यम से उन्होंने यह भी संकेत दिया कि उनकी राजनीति अब भी जनता के भरोसे और विकास के मुद्दे पर टिकी है।