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Mahila Rojgar Yojana : 40 फीसदी महिला वोटरों के हाथ में ‘10 हजारी चाबी’, क्या एनडीए की वापसी की बन सकती है सबसे बड़ी ताकत

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में महिला मतदाताओं ने रिकॉर्ड 71.61 फीसदी मतदान कर नया इतिहास रचा है। यह आंकड़ा 2020 की तुलना में करीब 10 फीसदी अधिक है। महिला वोटरों की इस अभूतपूर्व भागीदारी को एनडीए की संभावित जीत का सबसे बड़ा कारक माना जा रहा है।

Mahila Rojgar Yojana : 40 फीसदी महिला वोटरों के हाथ में ‘10 हजारी चाबी’, क्या एनडीए की वापसी की बन सकती है सबसे बड़ी ताकत
Tejpratap
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Mahila Rojgar Yojana : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में इस बार महिला वोटरों ने मतदान का नया इतिहास रच दिया है। दो चरणों में हुए मतदान में कुल 71.61 फीसदी महिलाओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जो कि 2020 की तुलना में करीब 10 फीसदी अधिक है। यह उछाल न सिर्फ लोकतंत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है, बल्कि इसके राजनीतिक मायने भी गहरे हैं। माना जा रहा है कि महिला मतदाताओं की इस अभूतपूर्व सक्रियता ने सत्ता विरोधी लहर को कमजोर कर नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार की वापसी का मार्ग प्रशस्त किया है।


2020 के विधानसभा चुनाव में जहां महिला वोटिंग का प्रतिशत 59.69 फीसदी था, वहीं इस बार यह 71.61 फीसदी तक पहुंच गया। यानी करीब 12 फीसदी की छलांग। महिला मतदाताओं के इस रुझान ने चुनावी समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, महिला वोटरों का बढ़ा हुआ उत्साह इस बार निर्णायक भूमिका निभा रहा है और यही कारण है कि एग्जिट पोल्स में एनडीए की बढ़त साफ दिख रही है।


इस बदलाव की एक बड़ी वजह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की महिला रोजगार योजना को माना जा रहा है। इस योजना के तहत बिहार की करीब 1.51 करोड़ महिलाओं को 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी गई। यह आंकड़ा राज्य की कुल महिला मतदाता संख्या का लगभग 40 फीसदी है। एक महिला के लाभान्वित होने का असर केवल उस पर नहीं, बल्कि उसके पूरे परिवार पर पड़ा। अनुमान है कि इस योजना से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से डेढ़ करोड़ से अधिक मतदाता प्रभावित हुए। नतीजतन, यह योजना एनडीए के लिए महिला वोट बैंक को सुदृढ़ करने का सबसे बड़ा कारक बन गई।


महिलाओं की भागीदारी में जिलों का प्रदर्शन

पहले चरण में पटना को छोड़कर 17 जिलों में महिलाओं का मतदान प्रतिशत पुरुषों से अधिक रहा। इनमें समस्तीपुर (77.42%), मधेपुरा (77.04%) और मुजफ्फरपुर (76.57%) शीर्ष पर रहे। दूसरे चरण में भी महिलाओं की भागीदारी प्रभावशाली रही। कटिहार, किशनगंज, पूर्णिया, सुपौल, पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण और बांका जैसे जिलों में महिला मतदान 70 फीसदी से अधिक दर्ज किया गया। दूसरे चरण में महिलाओं ने पुरुषों की तुलना में औसतन 10 फीसदी अधिक वोटिंग की, जो अपने आप में ऐतिहासिक है।


बिहार देश का पहला राज्य बन गया है जहां 31 लाख से अधिक जीविका दीदियां लखपति हो चुकी हैं। 2023 में शुरू हुई इस योजना के तहत अब इन महिलाओं की सालाना आय एक लाख रुपये से अधिक है। 2020 में इनकी औसत कमाई 60 से 70 हजार रुपये थी। उस समय भी इन महिलाओं ने नीतीश कुमार पर भरोसा जताया था, और अब आर्थिक रूप से सशक्त होने के बाद उनका यह समर्थन और मजबूत हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि जीविका दीदियों का सशक्त वर्ग इस चुनाव में एनडीए का ‘साइलेंट वोट बैंक’ बन गया, जिसने सत्ता विरोधी रुझान को पलटने में अहम भूमिका निभाई।


2020 से सीख और 2025 की तस्वीर

2020 के विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार तमाम राजनीतिक चुनौतियों और चिराग पासवान की रणनीतिक बाधाओं के बावजूद सत्ता में बने रहे थे। उस चुनाव में जदयू ने 43 सीटें जीतीं, जिनमें से 37 सीटों पर महिला वोटिंग का प्रतिशत पुरुषों से अधिक था। यानी यह साफ है कि महिलाओं ने 2020 में भी जदयू की गिरती साख को संभाला था। इस बार जब महिला वोटिंग में 10 फीसदी की वृद्धि हुई है, तो यह स्वाभाविक है कि इसका सीधा फायदा नीतीश कुमार को मिलेगा।


नीतीश कुमार की राजनीति का आधार शुरू से ही महिलाओं के सशक्तिकरण पर टिका रहा है। आरक्षण, शिक्षा, स्वावलंबन और रोजगार योजनाओं के जरिए उन्होंने महिला वर्ग में गहरी पैठ बनाई। 50 फीसदी पंचायत आरक्षण से लेकर साइकिल योजना और जीविका समूहों के विस्तार तक, इन नीतियों का सामाजिक असर वर्षों में राजनीतिक पूंजी में तब्दील हुआ है। इस बार के चुनाव में उसी पूंजी का लाभ उन्हें एक बार फिर मिलने की संभावना जताई जा रही है।


बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में महिलाओं की रिकॉर्ड वोटिंग न केवल लोकतंत्र की जीत है, बल्कि यह महिला सशक्तिकरण की नई परिभाषा भी गढ़ रही है। इस बार का चुनाव यह साबित करता है कि अब महिलाएं केवल सामाजिक नहीं, बल्कि राजनीतिक परिवर्तन की भी धुरी बन चुकी हैं। अगर एग्जिट पोल्स के रुझान सही साबित होते हैं, तो कहा जा सकता है कि एनडीए की संभावित जीत के पीछे महिलाओं का निर्णायक समर्थन सबसे बड़ा आधार है।संक्षेप में, महिला मतदाताओं ने इस बार न केवल मतदान का रिकॉर्ड तोड़ा है, बल्कि बिहार की राजनीति में यह दिखा दिया है कि अब सत्ता की कुंजी उनके हाथों में है।

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