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Bihar ADR Report : 17वीं विधानसभा का कार्यकाल पूरा, ADR रिपोर्ट में खुलासा; 5 साल में 17 विधायकों ने बदली पार्टी

बिहार की 17वीं विधानसभा के कार्यकाल के बाद ADR ने 243 विधायकों की विस्तृत रिपोर्ट जारी की है। इसमें दलबदल, सदन में सक्रियता और राजनीतिक स्थिरता पर बड़ा खुलासा किया गया है।

Bihar ADR Report : 17वीं विधानसभा का कार्यकाल पूरा, ADR रिपोर्ट में खुलासा; 5 साल में 17 विधायकों ने बदली पार्टी
Tejpratap
Tejpratap
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Bihar ADR Report : बिहार की 17वीं विधानसभा का कार्यकाल समाप्त हो चुका है और जनता ने बड़े जनादेश के साथ एक बार फिर एनडीए को सत्ता का अवसर दिया है। इसी बीच एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और बिहार इलेक्शन वॉच ने राज्य के 243 विधायकों का विस्तृत ‘रिपोर्ट कार्ड’ जारी किया है। यह रिपोर्ट न सिर्फ विधायकों की गतिविधियों और उनके प्रदर्शन का आकलन करती है, बल्कि पिछले पांच वर्षों में हुए दलबदल की चौंकाने वाली तस्वीर भी पेश करती है।


RTI और आधिकारिक दस्तावेजों पर आधारित रिपोर्ट


ADR की यह रिपोर्ट बिहार विधानसभा सचिवालय से प्राप्त RTI जवाबों और आधिकारिक दस्तावेजों पर आधारित है। रिपोर्ट में यह बताया गया है कि पिछले पांच वर्षों में विधानसभा की बैठकें कितनी दिनों तक चलीं, विधायक कितने सक्रिय रहे, उन्होंने कितने सवाल पूछे, किन विधायी कार्यों में हिस्सा लिया और सदन में बहस की गति कैसी रही। लेकिन रिपोर्ट का सबसे अधिक चर्चित हिस्सा वे आंकड़े हैं, जो यह बताते हैं कि बिहार की राजनीति में दल-बदलने का सिलसिला लगातार तेज हुआ है।


पांच साल में 17 विधायकों ने बदली पार्टी

27 से अधिक बार सरकार बदलने के इतिहास वाले बिहार में पिछले 5 सालों में कुल 17 विधायकों ने अपनी पार्टियां बदलीं। इस दलबदल ने कई मौकों पर राज्य की राजनीति को अस्थिर किया और सत्ता समीकरणों को प्रभावित किया। RJD से BJP, JDU से RJD, AIMIM से RJD, कांग्रेस से BJP तक — कई बड़े चेहरे पाले बदलते नजर आए। इनमें भरत बिंद, बीमा भारती, चेतन आनंद, मोहम्मद अंजार नइमी और सिद्धार्थ सौरव जैसे नाम सबसे ज्यादा चर्चा में रहे।


ADR के विश्लेषण के अनुसार, दलबदल से न सिर्फ राजनीतिक निष्ठा पर सवाल उठते हैं, बल्कि यह सदन की स्थिरता और जनता के भरोसे पर भी सीधा असर डालता है। जनता एक उम्मीदवार को किसी खास विचारधारा और पार्टी के आधार पर चुनती है, ऐसे में पाला बदलने से राजनीतिक पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं।


दल बदलने वाले विधायकों की पूरी सूची

नाम (विधानसभा क्षेत्र)पिछला दलवर्तमान दल
भरत बिंद (भभुआ)RJDBJP
बीमा भारती (रुपौली)JDURJD
चेतन आनंद (शिवहर)RJDJDU
मिश्री लाल यादव (अलीनगर)VIPBJP
मोहम्मद अंजार नइमी (बहादुरगंज)AIMIMRJD
मोहम्मद जमा खान (चैनपुर)BSPJDU
मुहम्मद इजहार असफी (कोचाधमन)AIMIMRJD
मुरारी प्रसाद गौतम (चेनारी)INCBJP
नीलम देवी (मोकामा)RJDJDU
प्रह्लाद यादव (सूर्यगढ़ा)RJDJDU
राज कुमार सिंह (मटिहानी)LJPJDU
राजू कुमार सिंह (साहेबगंज)VIPBJP
संगीता कुमारी (मोहनिया)RJDBJP
शाहनवाज (जोकिहाट)AIMIMRJD
सिद्धार्थ सौरव (बिक्रम)INCBJP
स्वर्णा सिंह (गौड़ा बौराम)VIPBJP
सैयद रुकनूद्दीन अहमद (बैसी)AIMIMRJD

राजनीतिक स्थिरता पर बड़ा सवाल

ADR की रिपोर्ट साफ बताती है कि बिहार में दलबदल एक गंभीर राजनीतिक चुनौती बन चुका है। इससे सरकारों की स्थिरता प्रभावित होती  इसके साथ ही जनता के भरोसे में कमी आती है और लोकतांत्रिक मूल्यों को झटका लगता है। 18वीं विधानसभा के गठन से पहले यह रिपोर्ट सभी दलों और नेताओं के लिए एक बड़ा संकेत है कि राजनीतिक पारदर्शिता और स्थिरता की दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है। अब देखना होगा कि नई सरकार इस चुनौती से कैसे निपटती है और क्या आने वाले पांच सालों में दल-बदल की यह प्रवृत्ति थमती है या फिर बिहार की राजनीति में यह सिलसिला और तेज होता है।

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