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पटना नगर निगम में प्राइवेट एजेंसियों के जरिए करोड़ों की लूट, फर्जी स्टाफ के नाम पर कंपनियों ने बनाए पैसे

PATNA : राजधानी पटना में नगर निगम की तरफ से नागरिक के सुविधाओं को भले ही दुरुस्त नहीं किया जा सका हो लेकिन पटना नगर निगम प्राइवेट एजेंसियों के जरिए लूट के बड़े खेल में शामिल है। नगर निगम के अंदर ती

पटना नगर निगम में प्राइवेट एजेंसियों के जरिए करोड़ों की लूट, फर्जी स्टाफ के नाम पर कंपनियों ने बनाए पैसे
First Bihar
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PATNA : राजधानी पटना में नगर निगम की तरफ से नागरिक के सुविधाओं को भले ही दुरुस्त नहीं किया जा सका हो लेकिन पटना नगर निगम प्राइवेट एजेंसियों के जरिए लूट के बड़े खेल में शामिल है। नगर निगम के अंदर तीन अलग-अलग प्राइवेट एजेंसियों के जरिए करोड़ों रुपए के घोटाले की खबर सामने आई है। दरअसल मैन पावर मुहैया कराने वाली तीन कंपनियों ने फर्जी स्टाफ दिखाकर उनके नाम पर पैसा बना लिया। यह कंपनियां हैं गुड ईयर, इंप्रेशन और एवरेस्ट। इन तीनों कंपनियों ने पिछले 5 साल में नगर निगम के साथ जुड़कर मोटा माल बनाया है। तीन एजेंसियों ने पटना नगर निगम को पेपर पर ही मैनपावर उपलब्ध कराया और उनकी सैलरी हर माह लेती रहीं। इसका खुलासा पटना निगम प्रशासन के ही हालिया जांच में हुआ है। जांच में ऐसे 1151 फर्जी स्टाफ की जानकारी मिली जिन्हे काम किए बगैर ही भुगतान किया गया। इससे पहले करीब 900 कर्मियों का पता चला था, जो केवल ऑन पेपर थे। 



अब जांच आगे बढ़ी है तो 900 से बढ़कर अब फर्जी कर्मियों की संख्या 1151 हो गई है। पटना निगम प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से एक्शन लेते हुए इन सभी फर्जी स्टाफ के रजिस्ट्रेशन को पूरे तरीके से कैंसिल कर दिया है। तीनों एजेंसियों को पहले ही शोकॉज किया गया था। इस नोटिस के जवाब में कंपनियों ने गोलमोल जवाब दिया है, जिससे निगम प्रशासन पूरी तरह से असहमत है। मैनपावर आपूर्ति करने वाली तीन एजेंसियां गुड ईयर, इंप्रेशन और एवरेस्ट पिछले पांच साल से पटना नगर निगम से जुड़ी थीं। निगम प्रशासन इन एजेंसियों को हर व्यक्ति के हिसाब से कम से कम 10 हजार रुपए महीने का भुगतान करता था। ऐसे में पांच साल के दौरान 1151 फर्जी कर्मियों के बदले 5 करोड़ से अधिक का भुगतान हो चुका है। कंपनियों को पेमेंट से जुड़े अधिकारियों और निगम कर्मियों को भी शो कॉज किया गया है।



दरअसल प्राइवेट एजेंसियों से स्टाफ लेने के नाम पर नगर निगम में यह खेल बड़े पैमाने पर चलता रहा है। इन एजेंसियों को मिलाकर नगर निगम में तकरीबन 22 स्टाफ से काम लेने का डॉक्यूमेंट मौजूद है। इनमें से आधे से कम लोगों ने काम किया, जबकि आधे लोग केवल फर्जी तरीके से पेपर पर काम करते रहे। एजेंसी की तरफ से बड़ा खेल किया गया, इसमें पटना नगर निगम के अधिकारियों की भी मिलीभगत बताई जा रही है, क्योंकि इनकी मिलीभगत के बगैर फर्जी स्टाफ का भुगतान नहीं हो सकता है। आपको बता दें कि पटना नगर निगम भ्रष्टाचार का एक बड़ा अड्डा बन चुका है। इसके आरोप समय-समय पर निगम से जुड़े लोग ही लगाते रहे हैं।