Bihar News: पटना के तत्कालीन जिला परिवहन पदाधिकारी के खिलाफ लगे आरोप साबित हो गए. विभागीय जांच में जो आरोप थे, उसे संचालन पदाधिकारी ने प्रमाणित बताया है. इसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी को दंड दिया है. पटना के तत्कालीन डीटीओ अजय कुमार ठाकुर वर्तमान में अररिया में एडीएम (लोक शिकायत) के पद पर पदस्थापित हैं.
पटना डीटीओ में बड़े फर्जीवाड़े का हुआ था खुलासा
परिवहन विभाग ने पटना के तत्कालीन डीटीओ अजय कुमार ठाकुर के खिलाफ आरोप पत्र गठित कर कार्रवाई की अनुशंसा किया था. इन पर आरोप हैं कि आदेश की अवहेलना करते हुए बीएस-3 और बीएस-4 वाहनों को बैकलॉग इंट्री कर निबंधन किया है. इन्होंने अपने लॉगिन आईडी से 5 वाहनों की बैकलॉग इंट्री एवं 547 वाहनों को अप्रुवल दिया है. वाहनों के निबंधन करने में फर्जी मनी रसीद का प्रयोग किया गया. जिससे राजस्व का नुकसान हुआ। इनके आईडी से बैक लॉग इंट्री कर एप्रुवल दिया गया. इनकी प्रशासनिक चूक की वजह से कर्मियों ने इनके आईडी का गलत उपयोग किया. जिसके फलस्वरूप राजस्व का नुकसान हुआ।
इइ आरोपों पर आरोपी डीटीओ अजय कुमार ठाकुर से 1 सितंबर 2021 को ही स्पष्टीकरण मांगा गया था. जवाब नहीं देने पर 7 अक्टूबर 2021 को विभागीय कार्यवाही चलाने का निर्णय लिया गया. मुख्य जांच आयुक्त को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया. जांच अधिकारी ने 7 मई 2026 को जांच प्रतिवेदन दिया, जिसमें आरोपी डीटीओ अजय कुमार ठाकुर के खिलाफ लगे आरोपों को प्रमाणित बताया.
मुख्य जांच आयुक्त की रिपोर्ट के बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने आरोपी अधिकारी के खिलाफ वेतनवृद्धि को संचयात्मक प्रभाव से रोकने का दंड निर्धारित किया है. बिहार लोक सेवा आयोग ने इस दंड पर सहमति दी. इसके बाद इस संबंध में सरकार ने 29 अक्टूबर को संकल्प जारी कर दिया है.





