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DIG का बड़ा एक्शन: महिला से दुष्कर्म के आरोपी सब-इंस्पेक्टर को नौकरी से किया बर्खास्त

मुजफ्फरपुर रेंज के DIG चंदन कुशवाहा ने यौन शोषण और नैतिक अधमता के आरोपों में दोषी पाए गए सब-इंस्पेक्टर शांति प्रकाश कुजूर को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। विभागीय जांच में आरोप सही पाए गए थे।

बिहार न्यूज
पुलिस अधिकारी पर गिरी गाज
© रिपोर्टर
Jitendra Vidyarthi
4 मिनट

MUZAFFARPUR: बिहार पुलिस में भ्रष्टाचार और नैतिक अधमता के खिलाफ मुजफ्फरपुर रेंज के पुलिस उप-महानिरीक्षक (DIG) चंदन कुशवाहा ने एक बेहद सख्त संदेश दिया है। तिरहुत क्षेत्र, मुजफ्फरपुर के डीआईजी कार्यालय द्वारा जारी एक आधिकारिक पत्र के अनुसार, सब-इंस्पेक्टर (स०अ०नि०) शांति प्रकाश कुजूर को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। बर्खास्तगी का यह आदेश दिनांक 09 जून 2026 से प्रभावी माना जाएगा। शांति प्रकाश कुजूर वर्तमान में मुजफ्फरपुर जिला बल में तैनात थे, जबकि इससे पहले वे सीतामढ़ी जिले में कार्यरत थे।


मामले की गंभीरता को देखते हुए मुजफ्फरपुर रेंज के डीआईजी चंदन कुशवाहा ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि पुलिस विभाग में किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार और अनैतिक आचरण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। डीआईजी ने कड़े रुख में कहा, "भ्रष्टाचार और पुलिस परिवार का आचरण धूमिल करने वाला चाहे वह किसी भी लेवल का अधिकारी या कर्मचारी हो, उसके खिलाफ कठोरतम कानूनी और विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। पुलिस विभाग एक अनुशासित संगठन है और इसकी गरिमा से समझौता नहीं किया जा सकता।"


क्या है पूरा मामला: 

जानकारी  के अनुसार, यह पूरा मामला उस समय का है जब शांति प्रकाश कुजूर मुजफ्फरपुर जिला बल में रहते हुए महिन्दवारा थाना में पदस्थापित थे। उन पर एक महिला ने बेहद गंभीर आरोप लगाए थे। पीड़िता का कहना था कि उक्त अधिकारी ने शादी का झांसा देकर लगातार तीन वर्षों तक उसका यौन शोषण किया। महिला की शिकायत और कानूनी कार्रवाई के अनुरोध के बाद, पुपरी थाना में कांड संख्या-399/21, दिनांक 03.12.2021 के तहत भारतीय दंड संहिता (भा०दं०वि०) की धारा 376 समेत अन्य सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।


प्राथमिकी दर्ज होने के बाद आरोपी पुलिस अधिकारी को महिन्दवारा थाना से गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था। जांच के बाद पुलिस ने उनके विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र (चार्जशीट) भी दाखिल कर दिया था। इस घिनौने कृत्य और भ्रष्ट आचरण को देखते हुए विभाग ने उन्हें 17 फरवरी 2022 को ही निलंबित कर दिया था और उनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही (Disciplinary Proceedings) शुरू कर दी थी। 


विभागीय जांच में सिद्ध हुए आरोप: 

इस पूरे मामले की गहन विभागीय जांच के संचालन के लिए सीतामढ़ी के पुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय) नजीब अनवर को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया था। जांच अधिकारी नजीब अनवर ने अपनी रिपोर्ट में आरोपी सब-इंस्पेक्टर शांति प्रकाश कुजूर को पीड़िता द्वारा लगाए गए सभी आरोपों में पूरी तरह दोषी पाया। इसके बाद पुलिस अधीक्षक (SP) सीतामढ़ी ने भी जांच रिपोर्ट और आरोपों की पुष्टि करते हुए, आरोपी को कड़ा दंड देने की अनुशंसा पुलिस उप-महानिरीक्षक (DIG), तिरहुत क्षेत्र, मुजफ्फरपुर से की थी।


पुलिस की छवि को नुकसान पहुंचाने वालों की विभाग में कोई जगह नहीं: 

DIG  द्वारा स्पष्ट किया गया है कि शांति प्रकाश कुजूर पर नैतिक अधमता (Moral Turpitude) के अत्यंत गंभीर आरोप साबित हुए हैं। ऐसे अधिकारी का व्यक्तिगत चरित्र और आचरण पुलिस जैसे अनुशासित विभाग के अनुकूल बिल्कुल नहीं है। इस प्रकार के निकृष्ट और भ्रष्ट आचरण में संलिप्त पुलिसकर्मियों के विभाग में बने रहने से न केवल आम जनता के बीच पुलिस की छवि खराब होती है, बल्कि संगठन के अन्य ईमानदार कर्मियों के मनोबल पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। ऐसे अधिकारियों का पुलिस बल में बने रहने का कोई औचित्य नहीं है। इसी के मद्देनजर, जांच प्राधिकार के मंतव्य से पूर्णतः सहमत होते हुए डीआईजी चंदन कुशवाहा ने आरोपी अधिकारी को नौकरी से बर्खास्त करने का अंतिम आदेश जारी कर दिया।

रिपोर्टिंग
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रिपोर्टर

MANOJ KUMAR

FirstBihar संवाददाता