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अबतक नहीं सुलझी मां और तीन मासूमों की मौत की गुत्थी, FSL रिपोर्ट नहीं मिलने का हवाला; पुलिसिया सुस्ती पर उठ रहे सवाल

Bihar Crime News: मुजफ्फरपुर में मां और तीन बच्चों की संदिग्ध मौत का मामला चार महीने बाद भी अनसुलझा है। FSL रिपोर्ट का इंतजार और पुलिस की धीमी कार्रवाई पर परिजनों ने सवाल उठाए हैं।

Bihar Crime News
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Mukesh Srivastava
3 मिनट

Bihar Crime News: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में चार महीने पहले हुए उस हृदयविदारक हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया था, जिसमें अहियापुर के चंदवारा पुल के नीचे एक माँ और उसके तीन मासूम बच्चों के शव मिले थे। लेकिन अफसोस की बात यह है कि घटना के चार महीने बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं और इंसाफ की गुत्थी सुलझने के बजाय उलझती ही जा रही है।


अहियापुर थाना क्षेत्र के सिपाहपुर बखरी निवासी ऑटो चालक कृष्णमोहन कुमार की 22 वर्षीय पत्नी ममता कुमारी अपने तीन बच्चों—आदित्य (6 वर्ष), अंकुश (4 वर्ष) और कीर्ति (2 वर्ष)—के साथ बीते 10 जनवरी को संदिग्ध परिस्थितियों में घर से लापता हो गई थीं। कृष्णमोहन ने उसी दिन अहियापुर थाने में अपहरण की प्राथमिकी दर्ज कराई थी। परिजनों का आरोप है कि अगर पुलिस ने उस समय तत्परता दिखाई होती, तो शायद इन चार जिंदगियों को बचाया जा सकता था।


लापता होने के पांच दिन बाद, 15 जनवरी को चंदवारा पुल के पास बूढ़ी गंडक नदी से चारों के शव बरामद हुए। शवों की स्थिति देखकर रोंगटे खड़े हो गए थे; सभी शव दुपट्टे से एक-दूसरे के साथ बंधे हुए थे। पहली नजर में यह मामला सोची-समझी हत्या का प्रतीत हो रहा था, लेकिन पुलिस ने इसे संदिग्ध मानकर जांच की गति धीमी कर दी।


वर्तमान में पुलिस इस मामले में विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) की रिपोर्ट का इंतजार करने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ रही है। एसडीपीओ टाउन-2 विनीता सिन्हा के अनुसार, पुलिस विभाग ने अब तक चार बार एफएसएल लैब को रिमाइंडर भेजा है, लेकिन रिपोर्ट अभी तक प्राप्त नहीं हुई है। पुलिस का तर्क है कि रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि यह मामला सामूहिक आत्महत्या का है या जघन्य हत्याकांड का।


हालांकि, पुलिस ने मीनापुर के मधुबनी निवासी अमोद कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जिसके साथ मृतका के कथित प्रेम प्रसंग की चर्चा थी। लेकिन परिजनों का कहना है कि अमोद की गिरफ्तारी महज खानापूर्ति है। इस सामूहिक मौत के पीछे की असली साजिश और मुख्य आरोपियों तक पुलिस के हाथ नहीं पहुँच सके हैं।


इंसाफ की आस में बैठे: कृष्णमोहन और उनके परिजनों का धैर्य अब जवाब दे रहा है। उनका कहना है कि पुलिस की कार्यशैली न केवल सुस्त है, बल्कि असंवेदनशील भी है। चार महीने का लंबा समय बीत जाने के बाद भी किसी ठोस नतीजे पर न पहुँचना पुलिस प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े करता है। परिजनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सच सामने नहीं आया, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। फिलहाल, मुजफ्फरपुर पुलिस के लिए यह केस एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

रिपोर्टिंग
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रिपोर्टर

MANOJ KUMAR

FirstBihar संवाददाता