Bihar Police: मोतिहारी पुलिस पकड़कर लाखों की वसूली करती है. आरोपियों को तीन-तीन दिनों पर थाने में कैद रखकर जबरन पैसा वसूला जाता है. फिर चौथे दिन दूसरे थाना क्षेत्र में केस दर्ज किया जाता है. इन तमाम आरोपों के प्रमाण सामने है. इसके बाद भी आरोपी पुलिस अफसरों के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। बताया जाता है कि मामले में एसपी से लेकर ईओयू के स्तर से जांच की जा रही, पर रिजल्ट शून्य है.
मोतिहारी के चकिया थाने की पुलिस ने 25 मई की रात टॉल प्लाजा पर कार सवार चार लोगों को पकड़ा. चकिया पुलिस ने उसी रात पकड़ाये सभी लोगों को कार समेत तुरकौलिया थाने की पुलिस को हैंडओवर कर दिया. तुरकौलिया थानेदार ने आरोपियों के पकड़ाने का स्थान अपना थाना क्षेत्र दिखाया. तुरकौलिया थानेदार ने ऑन पेपर स्वीकार किया है कि कार सवार चार तस्कर 25 मई रात 12 बजे के बाद यानि 26 तारीख रात 1.10 बजे पकड़े गए. उनके पास से लगभग 25 लाख रू मिले. तुरकौलिया पुलिस ने 26 तारीख को केस नहीं किया . 27 तारीख को भी केस दर्ज नहीं किया. थानेदार ने स्वयं के बयान पर 28 तारीख को केस दर्ज किया. इसके बाद सभी आरोपियों को थाने से बेल देकर छोड़ा गया. इस तरह से लगभग 72 घंटे तक तुरकौलिया थाने की पुलिस ने चारो तस्करों को थाने में बिठाये रखा. जबकि 24 घंटे के अंदर पकड़े गए शख्स को बॉन्ड पर छोड़ना है या केस दर्ज कर जेल भेजना है. लेकिन तुरकौलिया थाने की पुलिस ने कानून को ठेंगे पर रखा. बताया जाता है कि इतने समय तक थाने में बिठाकर रखने की खबर जब पुलिस अधीक्षक को लगी,तो वे हरकत में आये. इसके बाद केस दर्ज किया गया था. थाने में इतने दिनों तक पकड़कर रखने की वजह 35 लाख रू की वसूली की बात सामने आ रही है.
थानेदार का बयान ही कार्रवाई के लिए काफी....
पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) के तुरकौलिया थानेदार संपत कुमार ने 28 मई 2026 को अपने स्व लिखित बयान के आधार पर केस संख्या 281/ 26 दर्ज किया . जिसमें कहा गया कि 26 मई की रात 12:50 बजे मुझे सूचना मिली कि उजले रंग की कार से अवैध कारोबारी पटना की ओर से आ रहे हैं. वे अपने साथ भारी मात्रा में नगद राशि लेकर चल रहे हैं, जो संभवत अवैध धंधों से अर्जित की गई है. सूचना की गंभीरता को देखते हुए मैंने तत्काल वरीय अधिकारी को इस संबंध में सूचना दिया . फिर पुलिस बल के साथ रवाना हुआ . तुरकौलिया थाना क्षेत्र के निमोइया चौक पर सघन वाहन जांच प्रारंभ की गई. इसी क्रम में रात करीब 1:10 बजे मोतिहारी की ओर से एक उजले रंग की संदिग्ध कर आती हुई दिखाई दी, जिसे रोका गया. गाड़ी में सवार व्यक्ति से पूछताछ की गई. उन्होंने अपना नाम कृष्णा सहनी आदापुर, सुभाष कुमार नकरदेई दोनों पूर्वी चंपारण के रहने वाला था. वहीं दीपेश कुमार यादव और प्रज्वल सोनी दोनों जिला- बारा नेपाल के रहने वाले थे. विधि सम्मत तरीके से उजले रंग की i10 कार की तलाशी ली गई. इस दौरान डिक्की के तहखाना में छुपा कर रखी गई 24 लाख 91300 की नगद बरामद की गई। बरामद राशि के संबंध में सवार व्यक्ति से पूछताछ की गई, लेकिन उनके द्वारा कोई संतोषजनक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया. ऐसे में मुझे विश्वास है कि यह राशि अवैध धंधों से कपट पूर्ण, बेईमानी एवं अपराधिक दुरुपयोग से अर्जित की गई है. इसे किसी आपराधिक गतिविधि में लगाई जा सकती है. ऐसे में गाड़ी को जप्त करते हुए और इन व्यक्तियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 317 (2) 317 (5) 318 (4) और 61 (2) के तहत प्राथमिक की दर्ज की जा रही है. तुरकौलिया थानेदार ने 26 तारीख को ही इस संबंध में मोतिहारी सदर-1 के एसडीपीओ से कार्रवाई का आदेश देने को लेकर पत्र लिखा था.
चकिया थाना क्षेत्र में पकड़ी गई गाड़ी तो तुरकौलिया में क्यों दर्ज हुआ केस ?
ऊपर की सारी बातें, तुरकौलिया थानेदार ने अपने बयान में लिखा है. दरअसल, खेल इतना भर ही नहीं है. इन सभी को तुरकौलिया थाना क्षेत्र में नहीं बल्कि राष्ट्रीयराज मार्ग पर चकिया टोल प्लाजा के पास पकड़ा गया था. इन सभी को चकिया थानाध्यक्ष ने पकड़ा और तुरकौलिया पुलिस के हवाले कर दिया. खुद चकिया थानेदार इस बात को स्वीकार करते हैं कि 25 मई की देर रात हमें सूचना दी गई.इस आधार पर हमने उक्त गाड़ी को पकड़ा,लेकिन हमें खास सबूत नहीं मिला. इसके बाद तुरकौलिया थाना की पुलिस ने उस कार और उसमें सवार सभी को अपने कब्जे में ले लिया.
26 को पकड़ाया तो 28 मई को केस क्यों....
तुरकौलिया पुलिस ने 26 मई को कार जब्त कर सभी चार लोगों को गिरफ्तार किया,पर केस 28 मई को दर्ज की गई। केस दर्ज करने के बाद चारो आरोपियों को थाने से ही बेल दे दिया गया. दरअसल केस दर्ज करने में देरी के पीछे बड़ा खेल था...बड़ी सेटिंग की गई थी. केस को मैनेज करने के लिए 26 तारीख से लेकर 28 तारीख तक ब्लैकमेल का खेल चलते रहा. बताया जाता है कि मोटी रकम की वसूली की गई. विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि इन सभी का 25 लाख रू तो जब्त हुआ ही, रिहाई के लिए 35 लाख रू पुलिस अधिकारियों ने वसूल किये. निचले अधिकारियों ने वरीय के नाम पर 25 लाख व अपने लिए 10 लाख रू लिया, तब जाकर सभी को थाने से बेल दिया गया.
दरअसल, मामले का खुलासा तब हुआ,तब लुट चुके शख्स का भाई डीजीपी के पास शिकायत लेकर पहुंच गया. डीजीपी को पूरी बात बताई गई। शिकायतकर्ता ने बताया कि मोतिहारी के उगम पांडेय कॉलेज के पीछे डीएसपी का दलाल इरफान अंसारी व एक अन्य ने 35 लाख रू रिश्वत की रकम ली. अगर टावर लोकेशन की पड़ताल कराई जाय तो पुलिसकर्मियों की पोल खुल जायेगी. शिकायत के बाद डीजीपी ने इस मामले को लेकर मोतिहारी के पुलिस अधीक्षक से रिपोर्ट मांगी थी. बताया जाता है कि एसपी मोतिहारी ने अपनी जांच रिपोर्ट भेज दी है.
जब खबर मीडिया में आई है कि मोतिहारी पुलिस ने इस पर प्रतिक्रिया दी है. कहा गया है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है. पुलिस मुख्यालय की तरफ से भी ईओयू से जांच कराई जा रही है.
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