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Indigo Operations: इंडिगो संकट के बीच DGCA का बड़ा एक्शन, 4 फ्लाइट ऑपरेशन इंस्पेक्टर को किया सस्पेंड

इंडिगो संचालन में गड़बड़ियों की जांच में DGCA ने कार्रवाई करते हुए 4 फ्लाइट ऑपरेशन इंस्पेक्टरों को बर्खास्त किया। वहीं दिल्ली हाईकोर्ट ने उड़ानों की अव्यवस्था, यात्रियों की परेशानी और टिकटों की बढ़ी कीमतों पर केंद्र और DGCA से कड़े सवाल पूछे।

Indigo Operations
प्रतिकात्मक
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Mukesh Srivastava
3 मिनट

Indigo Operations: इंडिगो एयरलाइंस के संचालन से जुड़ी समस्याओं को लेकर महानिदेशालय नागरिक उड्डयन (DGCA) ने प्रारंभिक जांच में बड़ी कार्रवाई की है। जांच में लापरवाही पाए जाने के बाद DGCA ने इंडिगो की निगरानी कर रहे अपने चार फ्लाइट ऑपरेशन इंस्पेक्टरों को सेवा से हटा दिया। 


ये सभी इंस्पेक्टर इंडिगो की उड़ानों की सुरक्षा और संचालन संबंधी जांच की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। अधिकारी कॉन्ट्रैक्ट पर नियुक्त थे और एयरलाइंस, विशेषकर इंडिगो, के सुरक्षा और ऑपरेशनल ओवरसाइट के लिए प्रतिनियुक्त थे। माना जा रहा है कि निगरानी में गंभीर चूक सामने आने के बाद DGCA को यह सख्त कदम उठाना पड़ा।


मामले पर दिल्ली हाईकोर्ट ने भी केंद्र और DGCA से कड़े सवाल पूछे। कोर्ट ने पूछा कि ऐसी अचानक स्थिति पैदा होने की वजह क्या थी और प्रभावित यात्रियों की सहायता के लिए क्या कदम उठाए गए। अदालत ने यह भी जानना चाहा कि एयरपोर्ट पर फंसे यात्रियों को संभालने, उनकी परेशानी कम करने और व्यवस्था दुरुस्त रखने के लिए सरकार ने कौन-से इंतज़ाम किए।


हाईकोर्ट ने कहा कि यह मामला सिर्फ यात्रियों की परेशानी तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे आर्थिक नुकसान और सिस्टम की नाकामी भी सामने आई है। अदालत ने पूछा कि यात्रियों को मुआवजा देने के लिए क्या कार्रवाई हुई और एयरलाइन स्टाफ की जिम्मेदारी सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए गए।


इसके साथ ही अदालत ने एयर टिकटों की अचानक हुई भारी महंगाई पर भी गंभीर सवाल उठाए। कोर्ट ने पूछा कि जो टिकट पहले 5,000 रुपये में मिलते थे, वे 30,000–35,000 रुपये तक कैसे पहुंच गए? बेंच ने टिप्पणी की कि संकट के समय अन्य एयरलाइंस को इतना अधिक लाभ कमाने की अनुमति कैसे दे दी गई और इतना ऊंचा किराया चार्ज करना किस नियम के तहत संभव हुआ।


जवाब में ASG चेतन शर्मा ने अदालत को बताया कि पूरा कानूनी ढांचा लागू है और केंद्र सरकार लंबे समय से FDTL नियमों को लागू करने की कोशिश कर रही थी। एयरलाइंस ने जुलाई और नवंबर फेज के लिए राहत मांगी थी। उन्होंने यह भी कहा कि यह पहली बार है जब मंत्रालय ने दखल देकर किराए की सीमा तय की है, जो अपने आप में कड़ा नियामकीय कदम है।

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रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता