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'थानेदार' के सिर पर किस अफसर का था हाथ ? मोतिहारी पुलिस के मुट्ठी भर अधिकारियों ने वर्दी को बनाया दागदार ! 35 लाख की 'फिरौती' वसूली में जांच की आंच कहां तक जाएगी...

मोतिहारी में ड्रग तस्करों से 25 लाख रुपये की बरामदगी के बाद 35 लाख रुपये वसूली और थाने से जमानत देने के आरोपों ने बिहार पुलिस को कठघरे में खड़ा कर दिया। तुरकौलिया थानाध्यक्ष सस्पेंड, ईओयू जांच जारी।

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AI से सांकेतिक तस्वीर
© Google
Viveka Nand
9 मिनट

Bihar Police: ड्रग तस्करों की गिरफ्तारी, 25 लाख की जब्ती, फिर मोटी रकम लेकर जमानत देने का कृत्य सामने आने के बाद मोतिहारी पुलिस बेपर्द हो गई. सिर्फ मोतिहारी पुलिस ही नहीं बल्कि बिहार पुलिस के दामन पर गंभीर दाग लग गया. पुलिस के दो-तीन अफसरों का यह कृत्य अपहरण-फिरौती कांड जैसा दिखता है. जिस तरह से सूबे में पहले अपराधी अपहरण कर वसूली करते थे. अब यह काम पुलिस के कुछ अधिकारी करने लगे हैं. खैर...इस खेल में शामिल थानाध्यक्ष पर तो कार्रवाई हो गई, पर थानेदार के संरक्षणकर्ता और पूरे खेल के मास्टरमाइंड पर कार्रवाई होना बाकी है. हालांकि पुलिस का दावा है कि आगे की जांच जारी है. देखना होगा कि ईओयू और मोतिहारी पुलिस की जांच की आंच कहां तक पहुंचती है. 

खुलासे के बाद मोतिहारी एसपी ने थानेदार को किया है सस्पेंड 

मोतिहारी पुलिस की तरफ से 27 जून को बताया गया कि तुरकौलिया थाना के थानेदार संपत कुमार को सस्पेंड कर दिया गया है.ड्रग्स से सम्बंधित राशि बरामदगी मामले में प्रशिक्षु Dy.SP ऋषभ की प्राथमिक जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की गई है। SHO के संदिग्ध आचरण और FIR में तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर लिखने के आरोप में कारवाई की गई है. आगे की जांच जारी है. यह मोतिहारी के पुलिस अधीक्षक की तरफ से जानकारी दी गई है. हालांकि पूरे मामले में आर्थिक अपराध इकाई भी जांच कर रही है. 

ईओयू डीएसपी की जांच रिपोर्ट से बेपर्द होंगे गुनाहगार पुलिस अधिकारी 

डीजीपी के आदेश के बाद ईओयू के डीएसपी रैंक के अधिकारी ने मोतिहारी पहुंचकर जांच की है. ईओयू के डीएसपी की जांच रिपोर्ट आना बाकी है. हालांकि जिस तरह के साक्ष्य हैं, उसे झुठला पाना बेहद ही मुश्किल होगा. सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि ड्रग तस्करों को चकिया में पकड़ा गया, फिर उसे तुरकौलिया कैसे ले जाया गया ? किसके आदेश पर मामला चकिया से तुरकौलिया पहुंचा? जबकि तुरकौलिया थाना राष्ट्रीय राजमार्ग पर अवस्थित नहीं है. चकिया से पहले एनएच पर पीपरा, पीपराकोठी, मुफस्सिल थाना अवस्थित है. लेकिन गिरफ्त में आए ड्रग तस्करों को तुरकौलिया ले जाया गया. चकिया पुलिस ने किस वरीय अधिकारी के आदेश पर सभी को तुरकौलिया पुलिस को सौंपा ? ये तमाम सवाल हैं, जिससे पार पाना खेल में शामिल पुलिस अधिकारियों के लिए संभव नहीं दिखता. 

जानें पूरा मामला........

मोतिहारी के चकिया थाने की पुलिस ने 25 मई की रात 12 बजे से पहले टॉल प्लाजा पर कार सवार चार लोगों को पकड़ा. चकिया पुलिस ने उसी रात पकड़ाये सभी लोगों को कार समेत तुरकौलिया थाने की पुलिस को हैंडओवर कर दिया. तुरकौलिया थानेदार ने आरोपियों के पकड़ाने का स्थान अपना थाना क्षेत्र दिखाया. तुरकौलिया थानेदार ने ऑन पेपर स्वीकार किया है कि कार सवार चार तस्कर 25 मई रात 12 बजे के बाद यानि 26 तारीख रात 1.10 बजे पकड़े गए. उनके पास से लगभग 25 लाख रू मिले. तुरकौलिया पुलिस ने 26 तारीख को केस नहीं किया . 27 तारीख को भी केस दर्ज नहीं किया. थानेदार ने स्वयं के बयान पर 28 तारीख को केस दर्ज किया. इसके बाद सभी आरोपियों को थाने से बेल देकर छोड़ा गया. इस तरह से लगभग 72 घंटे तक तुरकौलिया थाने की पुलिस ने चारो तस्करों को थाने में बिठाये रखा. जबकि 24 घंटे के अंदर पकड़े गए शख्स को बॉन्ड पर छोड़ना है या केस दर्ज कर जेल भेजना है. लेकिन तुरकौलिया थाने की पुलिस ने कानून को ठेंगे पर रखा. बताया जाता है कि इतने समय तक थाने में बिठाकर रखने की खबर जब पुलिस अधीक्षक को लगी,तो वे हरकत में आये. इसके बाद केस दर्ज किया गया था. थाने में इतने दिनों तक पकड़कर रखने, फिर थाने से जमानत देने में 35 लाख रू की वसूली की बात सामने आ रही है.  

थानेदार का बयान ही कार्रवाई के लिए काफी.... 

पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) के तुरकौलिया थानेदार संपत कुमार ने 28 मई 2026 को अपने स्व लिखित बयान के आधार पर केस संख्या 281/ 26 दर्ज किया . जिसमें कहा गया कि 26 मई की रात 12:50 बजे मुझे सूचना मिली कि उजले रंग की कार से अवैध कारोबारी पटना की ओर से आ रहे हैं. वे अपने साथ भारी मात्रा में नगद राशि लेकर चल रहे हैं, जो संभवत अवैध धंधों से अर्जित की गई है. सूचना की गंभीरता को देखते हुए मैंने तत्काल वरीय अधिकारी को इस संबंध में सूचना दिया . फिर पुलिस बल के साथ रवाना हुआ . तुरकौलिया थाना क्षेत्र के निमोइया चौक पर सघन वाहन जांच प्रारंभ की गई. इसी क्रम में रात करीब 1:10 बजे मोतिहारी की ओर से एक उजले रंग की संदिग्ध कर आती हुई दिखाई दी, जिसे रोका गया. गाड़ी में सवार व्यक्ति से पूछताछ की गई. उन्होंने अपना नाम कृष्णा सहनी आदापुर, सुभाष कुमार नकरदेई दोनों पूर्वी चंपारण के रहने वाला था. वहीं दीपेश कुमार यादव और प्रज्वल सोनी दोनों जिला- बारा नेपाल के रहने वाले थे. विधि सम्मत तरीके से उजले रंग की i10 कार की तलाशी ली गई. इस दौरान डिक्की के तहखाना में छुपा कर रखी गई 24 लाख 91300 की नगद बरामद की गई। बरामद राशि के संबंध में सवार व्यक्ति से पूछताछ की गई, लेकिन उनके द्वारा कोई संतोषजनक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया. ऐसे में मुझे विश्वास है कि यह राशि अवैध धंधों से कपट पूर्ण, बेईमानी एवं अपराधिक दुरुपयोग से अर्जित की गई है. इसे किसी आपराधिक गतिविधि में लगाई जा सकती है. ऐसे में गाड़ी को जप्त करते हुए और इन व्यक्तियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 317 (2) 317 (5) 318 (4) और 61 (2) के तहत प्राथमिक की दर्ज की जा रही है.  तुरकौलिया थानेदार ने 26 तारीख को ही इस संबंध में मोतिहारी सदर-1 के एसडीपीओ से कार्रवाई का आदेश देने को लेकर पत्र लिखा था. 

चकिया थाना क्षेत्र में पकड़ी गई गाड़ी तो तुरकौलिया में क्यों दर्ज हुआ केस ? 

ऊपर की सारी बातें, तुरकौलिया थानेदार ने अपने बयान में लिखा है. दरअसल, खेल इतना भर ही नहीं है. इन सभी को तुरकौलिया थाना क्षेत्र में नहीं बल्कि राष्ट्रीय राज मार्ग पर चकिया टोल प्लाजा के पास पकड़ा गया था. इन सभी को चकिया थानाध्यक्ष ने पकड़ा और तुरकौलिया पुलिस के हवाले कर दिया. खुद चकिया थानेदार इस बात को स्वीकार करते हैं कि 25 मई की देर रात हमें सूचना दी गई.इस आधार पर हमने उक्त गाड़ी को पकड़ा,लेकिन हमें खास सबूत नहीं मिला. इसके बाद तुरकौलिया थाना की पुलिस ने उस कार और उसमें सवार सभी को अपने कब्जे में ले लिया. 

26 को पकड़ाया तो 28 मई को केस क्यों....

तुरकौलिया पुलिस ने 26 मई को कार जब्त कर सभी चार लोगों को गिरफ्तार किया,पर केस 28 मई को दर्ज की गई। केस दर्ज करने के बाद चारो आरोपियों को थाने से ही बेल दे दिया गया. दरअसल केस दर्ज करने में देरी के पीछे बड़ा खेल था...बड़ी सेटिंग की गई थी. केस को मैनेज करने के लिए 26 तारीख से लेकर 28 तारीख तक ब्लैकमेल का खेल चलते रहा. बताया जाता है कि मोटी रकम की वसूली की गई. विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि इन सभी का 25 लाख रू तो जब्त हुआ ही, रिहाई के लिए 35 लाख रू पुलिस अधिकारियों ने वसूल किये. निचले अधिकारियों ने वरीय के नाम पर 25 लाख व अपने लिए 10 लाख रू लिया, तब जाकर सभी को थाने से बेल दिया गया. 

दरअसल, मामले का खुलासा तब हुआ,तब लुट चुके शख्स का भाई डीजीपी के पास शिकायत लेकर पहुंच गया. डीजीपी को पूरी बात बताई गई। शिकायतकर्ता ने बताया कि मोतिहारी के उगम पांडेय कॉलेज के पीछे डीएसपी का दलाल इरफान अंसारी व एक अन्य ने 35 लाख रू रिश्वत की रकम ली. अगर टावर लोकेशन की पड़ताल कराई जाय तो पुलिसकर्मियों की पोल खुल जायेगी. शिकायत के बाद डीजीपी ने इस मामले को लेकर मोतिहारी के पुलिस अधीक्षक से रिपोर्ट मांगी थी. 

जब खबर मीडिया में आई है कि मोतिहारी पुलिस ने इस पर प्रतिक्रिया दी थी. कहा गया था कि पूरे मामले की जांच की जा रही है. पुलिस मुख्यालय की तरफ से भी ईओयू से जांच कराई जा रही है. अब पुलिस अधीक्षक मोतिहारी ने आरोपी तुरकौलिया थानेदार को सस्पेंड कर दिया है. 

रिपोर्टिंग
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रिपोर्टर

Viveka Nand

FirstBihar संवाददाता