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बिहार: मुखिया मर्डर केस की जांच में लापरवाही पड़ी भारी, एसपी ने दारोगा को किया सस्पेंड

BEGUSARAI: बेगूसराय के बहुचर्चित परना मुखिया वीरेंद्र शर्मा हत्याकांड में पुलिस की घोर लापरवाही सामने आई है। केस के अनुसंधानकर्ता ने समय पर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल नहीं किया। जिसक

बिहार: मुखिया मर्डर केस की जांच में लापरवाही पड़ी भारी, एसपी ने दारोगा को किया सस्पेंड
Mukesh Srivastava
3 मिनट

BEGUSARAI: बेगूसराय के बहुचर्चित परना मुखिया वीरेंद्र शर्मा हत्याकांड में पुलिस की घोर लापरवाही सामने आई है। केस के अनुसंधानकर्ता ने समय पर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल नहीं किया। जिसके कारण सीजेएम ने हत्याकांड के आरोपी रणधीर महतो को बेल दे दी है। मामले में लापरवाही सामने आने के बाद बेगूसराय एसपी योगेन्द्र कुमार ने दारोगा को सस्पेंड कर दिया है।


दरअसल, इसी साल बीते 2 फरवरी को मुफस्सिल थाना के सॉख-तरैया के पास बाइक सवार बदमाशों ने चुनावी रंजिश को लेकर परना मुखिया वीरेंद्र कुमार शर्मा को गोलियों से छलनी कर दिया था। इस हत्याकांड में परना पंचायत के पूर्व मुखिया मो महफूज समेत कई बदमाशों को नामजद किया गया था। पुलिस अनुसंधान में खुलासा हुआ था कि नागदह निवासी कुख्यात रणधीर महतो ने नई दिल्ली में शूटर बुगगी ठाकुर और महफूज के बीच सौदा करवाया था। 3 महीना पहले जब पुलिस रणधीर महतो की संपत्ति को कुर्क करने के लिए नागदह पहुंची तब उसने कोर्ट में सरेंडर कर दिया था‌।


केस के अनुसंधानकर्ता दारोगा संजीत पासवान ने समय पर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल नहीं किया। जिसके कारण सीजेएम ने रणधीर महतो को बेल दे दिया। एसपी योगेन्द्र कुमार ने सख्त रुख अपनाते हुए केस के अनुसंधानकर्ता संजीत पासवान को सस्पेंड कर दिया है। एसपी ने बताया कि इस मामले में घोर लापरवाही बरतने के कारण आईओ संजीत पासवान को सस्पेंड करते हुए जल्द ही विभागीय कार्रवाई कराकर सेवा से बर्खास्त किया जाएगा। आईओ संजीत पासवान फिलहाल परिहार ओपी के प्रभारी हैं।


एसपी ने कहा कि 2 महीना के अंदर दारोगा संजीत पासवान को बर्खास्त किया जाएगा। बाकी भविष्य में कोई भी आईओ इस प्रकार की गलती दोहराने का काम नहीं करें। उधर, स्टैंडिंग काउंसिल सह भाजपा नेता अमरेंद्र कुमार अमर ने बताया कि सीआरपीसी की धारा 167(2) के अनुसार कोर्ट में 90 दिन के भीतर आरोपी पर चार्जशीट नहीं दाखिल करने पर जेल में बंद आरोपी को जमानत मिल जाने का प्रावधान है। इस बहुचर्चित हत्याकांड में केस के अनुसंधानकर्ता ने 90 दिन के अंदर आरोप पत्र समर्पित नहीं किया। जिसका लाभ अभियुक्त को मिला है।

रिपोर्टिंग
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रिपोर्टर

HARERAM DAS

FirstBihar संवाददाता