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पूर्व CMO के बंद कमरे से मिले 22 लाख कैश, सभी 1000 और 500 के पुराने नोट

नोटबंदी के 8 साल बाद मृतक पूर्व CMO के बंद कमरे से 22 लाख रुपये के पुराने हजार और 5 सौ के नोट मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया। उनकी मौत के बाद परिवार में संपत्ति को लेकर विवाद हुआ और तभी से कमरा बंद था।

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नोटबंदी के 8 साल बाद भी थे सुरक्षित
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Jitendra Vidyarthi
3 मिनट

UP NEWS: उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ जिला अस्पताल परिसर में स्थित एक पूर्व मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) के बंद आवास से 22 लाख रुपये की नकदी बरामद की गई है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह पूरी राशि अब अमान्य हो चुके पुराने ₹1000 और ₹500 के नोटों में है। यह रकम 2016 में हुई नोटबंदी के बाद भी बिना बदले हुई अवस्था में मिली है।


8 साल बाद खुला कमरा

स्व. डॉ. ब्रह्मनारायण तिवारी के सरकारी आवास से इतनी बड़ी राशि बरामद किया गया जो वर्ष 2014 में अंबेडकरनगर में कार्यवाहक सीएमओ के पद पर कार्यरत थे। 29 जनवरी 2014 को उनकी अचानक मौत हो गयी थी। ब्रह्मानारायण तिवरी के बाद उनके पारिवारिक सदस्यों में संपत्ति को लेकर विवाद हुआ, जिसके चलते पुलिस ने आवास को सील करके बंद कर दिया था।


इन दिनों मौजूदा सीएमओ डॉ. संजय कुमार शैवाल के निर्देश पर पुराने सरकारी क्वार्टर्स की मरम्मत का कार्य शुरू हुआ। इस दौरान सीएमओ कार्यालय ने बंद कमरे की स्थिति की जानकारी पुलिस से मांगी। रिपोर्ट में कोई कानूनी विवाद न मिलने के बाद, एक अधिकारियों की समिति गठित कर कमरे को वीडियोग्राफी के बीच खोला गया। कमरे में जैसे ही जांच टीम पहुंची, उन्हें पुराने नोटों की गड्डियों से भरा बैग मिला। गिनती कराने पर पाया गया कि ₹1000 के कुल 776 नोट (₹7,76,000), ₹500 के कुल 2945 नोट (₹14,72,500) और एक ₹5 का सिक्का इस तरह कुल बरामद राशि ₹22,48,505 निकली, जो आज के समय में नकदी के रूप में गैरकानूनी मानी जाती है क्योंकि यह नोट नवंबर 2016 में नोटबंदी के तहत रद्द कर दिए गए थे।


नकदी की वैधता पर सवाल, अब शासन को भेजा गया रिपोर्ट

सीएमओ डॉ. शैवाल ने इस मामले में प्रमुख सचिव स्वास्थ्य, महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं, जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को रिपोर्ट भेज दी है। साथ ही इस राशि की स्रोत और उपयोगिता की जांच कर इसे राजकीय कोष में जमा करने का प्रस्ताव भी रखा गया है। सीएमओ का कहना है कि, “यह स्पष्ट नहीं है कि यह रकम कहाँ से आई और किस उद्देश्य से रखी गई थी। आगे की कार्रवाई विभागीय दिशा-निर्देशों के अनुरूप की जाएगी।”


मौत का रहस्य अब भी बना हुआ है अनसुलझा

डॉ. तिवारी की मौत के करीब 8 साल बाद यह रहस्योद्घाटन हुआ है। मौत के समय वे अपने सरकारी आवास में अकेले रह रहे थे और शव एक सर्द मौसम में पूरी तरह चलती एसी के बीच बंद कमरे में मिला था, जिससे उनके निधन को लेकर सवाल उठे थे। हालांकि, मौत का कारण अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है और कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं हुआ था।


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