NEET PG New Rules: NEET PG और NEET SS की दाखिला प्रक्रिया में बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है. मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में अब पर्सेंटाइल आधारित क्वालिफाइंग सिस्टम की जगह रैंक आधारित मेरिट व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव दिया गया है. विशेषज्ञ समिति की सिफारिश के मुताबिक, यह बदलाव 2027 के काउंसलिंग सत्र से लागू करने का लक्ष्य रखा गया है. नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने इस प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है, हालांकि नियमों को अंतिम रूप दिया जाना अभी बाकी है.
दरअसल, NEET PG 2025 की कटऑफ पर्सेंटाइल में भारी कमी किए जाने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी. इसी मामले की सुनवाई के दौरान मंगलवार को 12 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट अदालत के सामने पेश की गई. समिति ने मौजूदा प्रवेश व्यवस्था की समीक्षा करते हुए कई बड़े बदलावों की सिफारिश की है.
समिति का मानना है कि मेडिकल की पोस्ट ग्रेजुएट शिक्षा में सिर्फ खाली सीटों को भरने के लिए न्यूनतम योग्यता के मानकों में ढील नहीं दी जानी चाहिए. कम अंक या निगेटिव स्कोर पाने वाले उम्मीदवारों को केवल सीटें भरने के उद्देश्य से दाखिले के योग्य बनाना उचित नहीं है.
पर्सेंटाइल की जगह रैंक से होगा दाखिला
प्रस्ताव के मुताबिक, NEET PG और NEET SS में मौजूदा पर्सेंटाइल आधारित क्वालिफाइंग व्यवस्था को हटाकर रैंक आधारित मेरिट सिस्टम लागू किया जाएगा. परीक्षा परिणाम में उम्मीदवारों की रैंक को प्रमुख आधार बनाया जाएगा और काउंसलिंग के दौरान इसी रैंक के आधार पर सीटों का आवंटन होगा.
इस बदलाव का उद्देश्य दाखिला प्रक्रिया को मेरिट आधारित बनाना और कटऑफ में बार-बार होने वाली कटौती से जुड़ी समस्याओं को दूर करना है.
नॉन-क्लीनिकल कोर्स की फीस घटाने की सिफारिश
विशेषज्ञ समिति ने मेडिकल के नॉन-क्लीनिकल और पैरा-क्लीनिकल कोर्स को लेकर भी अहम सुझाव दिए हैं. समिति ने एनाटॉमी, फिजियोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री और माइक्रोबायोलॉजी जैसे विषयों की फीस कम करने की सिफारिश की है.
इसके अलावा इन विषयों में दाखिला लेने वाले उम्मीदवारों को अनिवार्य सर्विस बॉन्ड से छूट देने का सुझाव दिया गया है. हालांकि, इस संबंध में अंतिम फैसला राज्य सरकारों पर छोड़े जाने की बात कही गई है.
समिति ने क्लीनिकल और नॉन-क्लीनिकल ब्रांच में पढ़ाई कर रहे मेडिकल रेजिडेंट्स के स्टाइपेंड में अंतर खत्म करने की सिफारिश की है. वहीं, सुपर स्पेशियलिटी की पढ़ाई पूरी करने वाले डॉक्टरों को वेतन में इंक्रीमेंट देने का सुझाव भी दिया गया है.
ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाएं देने वाले डॉक्टरों को अतिरिक्त प्रोत्साहन देने की बात कही गई है, ताकि ग्रामीण इलाकों में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाई जा सके.
काउंसलिंग प्रक्रिया होगी डिजिटल
NEET PG और NEET SS की काउंसलिंग प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल व्यवस्था विकसित करने का सुझाव दिया गया है. इसमें मानवीय हस्तक्षेप को कम से कम रखने पर जोर दिया गया है.
इसके साथ ही एक से अधिक बार परीक्षा में शामिल होने या फर्जी पहचान के जरिए सीट ब्लॉक करने जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए KYC और बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन लागू करने की सिफारिश की गई है.
NEET UG, PG, MDS और SS के परीक्षा परिणाम राज्य चिकित्सा शिक्षा निदेशालयों (DMEs) और राज्य काउंसलिंग अथॉरिटी के साथ ऑनलाइन साझा करने की योजना भी प्रस्तावित है.
समिति ने BDS और BSc नर्सिंग की उन सीटों को बंद करने पर विचार करने का सुझाव दिया है, जो लगातार दो से तीन वर्षों तक खाली रह जाती हैं. इसके साथ ही इन कोर्स की फीस को भी तर्कसंगत बनाने की बात कही गई है.
क्यों उठी पर्सेंटाइल सिस्टम बदलने की मांग?
NEET PG की कटऑफ में बार-बार कमी किए जाने के बाद यह पूरा विवाद सामने आया. साल 2023 में सभी श्रेणियों के लिए क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल घटाकर शून्य कर दिया गया था. इसके बाद निगेटिव अंक पाने वाले उम्मीदवार भी काउंसलिंग में शामिल होने के योग्य हो गए थे.
साल 2024 में भी कटऑफ में कमी की गई. सामान्य और EWS श्रेणी के लिए इसे 15 पर्सेंटाइल और आरक्षित श्रेणियों के लिए 10 पर्सेंटाइल तक लाया गया.
वहीं, 2025-26 के दाखिला सत्र में 13 जनवरी 2026 को नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) ने काउंसलिंग के तीसरे राउंड के लिए संशोधित कटऑफ जारी की. इसमें सामान्य श्रेणी की कटऑफ 50वें से घटाकर 7वें पर्सेंटाइल और सामान्य PwD श्रेणी की कटऑफ 45वें से घटाकर 5वें पर्सेंटाइल कर दी गई. SC, ST और OBC श्रेणियों के लिए कटऑफ 40वें से घटाकर शून्य कर दी गई.
इस फैसले के बाद निगेटिव अंक पाने वाले उम्मीदवार भी काउंसलिंग के लिए पात्र हो गए. सुप्रीम कोर्ट में पेश आंकड़ों के अनुसार, कटऑफ में इस कमी के बाद 95,913 अतिरिक्त उम्मीदवार काउंसलिंग के योग्य हो गए थे.
कटऑफ में इतनी बड़ी कमी किए जाने के फैसले को याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. उन्होंने मेडिकल की उच्च शिक्षा के न्यूनतम योग्यता मानकों और दाखिला प्रक्रिया की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए थे.
इस मामले में विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट पेश होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को रिपोर्ट पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया है. इसके साथ ही मामले की सुनवाई आगे के लिए टाल दी गई है.





