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दरभंगा के अभिनव ने JEE Advanced 2026 में हासिल की AIR 791, RO मैकेनिक पिता का सपना किया साकार

बिहार के दरभंगा जिले के सोनमा गांव के अभिनव अजय ने JEE Advanced 2026 में ऑल इंडिया रैंक 791 हासिल कर सफलता की मिसाल पेश की है। RO मशीनों की मरम्मत करने वाले पिता के बेटे ने आर्थिक चुनौतियों के बावजूद IIT में प्रवेश का सपना साकार करने की दिशा में बड़ी

बिहार न्यूज
घर में खुशी का माहौल
© रिपोर्टर
Jitendra Vidyarthi
4 मिनट

DARBHANGA: दरभंगा के अभिनव ने अपनी मेहनत के बदौलत एक छोटे से कमरे से IIT तक का सफर तय किया है। RO मशीन ठीक करने वाले पिता के बेटे ने JEE Advanced में ऑल इंडिया रैंक 791 हासिल किया है। जिससे घर में जश्न का माहौल है। अभिनव ने ना सिर्फ दरभंगा का बल्कि पूरे बिहार का नाम रोशन किया है। बेटे की सफलता से माता-पिता काफी खुश हैं। 


मेहनत, लगन और मजबूत इरादों के दम पर कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। बिहार के दरभंगा जिले के बहेड़ी प्रखंड स्थित सोनमा गांव के 17 वर्षीय अभिनव अजय ने यह साबित कर दिखाया है। उन्होंने JEE Advanced 2026 में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 791 हासिल कर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे मिथिलांचल का नाम रोशन किया है। उनकी इस उपलब्धि से परिवार और गांव में खुशी का माहौल है। अभिनव का सपना भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) में दाखिला लेकर एक सफल इंजीनियर बनने का है। उनकी सफलता संघर्ष, मेहनत और परिवार के त्याग की प्रेरणादायक कहानी बयां करती है।


अभिनव के पिता अजय कुमार RO पानी की मशीनों की मरम्मत का काम करते हैं। वे गांव-गांव और शहर-शहर जाकर मशीनें ठीक करते हैं और इसी आय से अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। सीमित संसाधनों और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपने बेटे की पढ़ाई में कभी कोई कमी नहीं आने दी। बेटे की सफलता पर भावुक हुए अजय कुमार ने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी। ऐसे में बेटे की बेहतर शिक्षा और कोचिंग की व्यवस्था करना उनके लिए बड़ी चुनौती थी। उन्होंने कहा कि वे हमेशा इस बात को लेकर चिंतित रहते थे कि कहीं आर्थिक अभाव उनके बेटे के सपनों के आड़े न आ जाए।


अजय कुमार ने बताया कि एक बार वे RO मशीन की मरम्मत के लिए एक निजी कोचिंग संस्थान गए थे। वहां पढ़ाई का माहौल देखकर उनके मन में इच्छा जगी कि उनका बेटा भी इसी संस्थान में पढ़े। हालांकि आर्थिक तंगी के कारण वे अभिनव का नामांकन नहीं करा सके। बाद में जब संस्थान के निदेशक को अभिनव की प्रतिभा और परिस्थितियों के बारे में जानकारी मिली, तो उन्होंने आगे बढ़कर उसकी पढ़ाई की जिम्मेदारी उठाई। इसके बाद अभिनव ने पूरी मेहनत और समर्पण के साथ तैयारी की और आज यह शानदार सफलता हासिल की।


पिता ने कहा कि अभिनव शुरू से ही पढ़ाई के प्रति गंभीर, मेहनती और अनुशासित रहा है। उसकी सफलता से पूरा परिवार गर्व महसूस कर रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि उनका बेटा आगे भी इसी तरह मेहनत करता रहेगा और अपने सभी सपनों को साकार करेगा। अभिनव की यह सफलता उन हजारों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। उन्होंने साबित कर दिया कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए, तो कोई भी बाधा सफलता का रास्ता नहीं रोक सकती।


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