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बिहार संविदा प्रोफेसर भर्ती में भारी कटौती: 1,155 पद घटे, नई नोटिफिकेशन से हजारों उम्मीदवार परेशान

BSUSC Recruitment 2026: बिहार में संविदा प्रोफेसर बनने की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। बिहार विश्वविद्यालय सेवा आयोग (BSUSC) ने नई अधिसूचना जारी करते हुए बहाली प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है, जिससे हजारों उम्मीदवारों...

बिहार संविदा प्रोफेसर भर्ती में भारी कटौती: 1,155 पद घटे, नई नोटिफिकेशन से हजारों उम्मीदवार परेशान
Ramakant kumar
3 मिनट

BSUSC Recruitment 2026: बिहार में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नौकरी की तैयारी कर रहे हजारों अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खबर सामने आई है. बिहार विश्वविद्यालय सेवा आयोग (BSUSC) ने संविदा प्रोफेसरों की बहाली प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करते हुए पहले घोषित 3,687 पदों की संख्या घटाकर अब सिर्फ 2,532 कर दी है. आयोग की ओर से जारी संशोधित अधिसूचना के बाद उम्मीदवारों के बीच असमंजस और चिंता का माहौल है, क्योंकि इस फैसले से नियुक्तियों की संख्या में करीब 1,155 पदों की कमी आ गई है.


नई अधिसूचना के अनुसार, यह नियुक्तियां राज्य के नवस्थापित डिग्री कॉलेजों में की जाएंगी. आयोग ने स्पष्ट किया है कि बहाली बिहार सरकार के अधीन आने वाले 10 पारंपरिक विश्वविद्यालयों के अधिकार क्षेत्र में होगी. संशोधित व्यवस्था के तहत छह अनिवार्य विषयों में सभी विश्वविद्यालयों के लिए समान रूप से पद निर्धारित किए गए हैं. प्रत्येक विषय में कुल 422-422 पदों पर नियुक्ति की जाएगी.


रिक्तियों में अचानक हुई इस बड़ी कटौती ने नेट (NET), पीएचडी (PhD) और अन्य योग्य अभ्यर्थियों की चिंता बढ़ा दी है. उम्मीदवारों का कहना है कि पहले से ही उच्च शिक्षा संस्थानों में सीमित अवसर उपलब्ध हैं, ऐसे में पदों की संख्या घटने से प्रतियोगिता और अधिक कठिन हो जाएगी. कई अभ्यर्थियों ने आयोग के इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा है कि इससे रोजगार के अवसर प्रभावित होंगे.


इधर, बहाली प्रक्रिया अब कानूनी विवाद में भी घिरती नजर आ रही है. राज्य के विभिन्न कॉलेजों में कार्यरत कई गेस्ट फैकल्टी ने पटना हाईकोर्ट का रुख किया है. उनका आरोप है कि जिन पदों पर वे पहले से कार्यरत हैं, उन्हें भी नई रिक्ति सूची में शामिल कर दिया गया है, जिससे उनकी नौकरी पर खतरा पैदा हो गया है.


याचिका दायर करने वाले शिक्षकों ने अदालत से मांग की है कि नई नियुक्ति प्रक्रिया के कारण उनकी वर्तमान सेवा और मानदेय प्रभावित न हो. उनका कहना है कि वर्षों से पढ़ा रहे अतिथि शिक्षकों के हितों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए.