Bihar News: बिहार में चहुंओर फर्जीवाड़ा है. जहां देखें वहीं फर्जीवाड़ा दिखेगा. प्राईवेट शिक्षण संस्थानों का हाल तो और भी खराब है. निजी शिक्षण संस्थान पढ़ाई की बजाय सिर्फ फर्जीवाड़ा कर रहे हैं. छात्रों को ऐसे फर्जीवाड़ा करने वाले शिक्षण संस्थानों से सचेत रहने की जरूरत है. वर्तमान में 13 शिक्षण संस्थानों के फर्जीवाड़े की पोल खुली है. इनमें गया के दो, और वैशाली के 3 शिक्षण संस्थान हैं. गया के Vivekanand Paramedical College & Nursing College Gaya और Magadh Paramedical & Nursing Institute Gaya है. इनकी भी पोल-पट्टी खुली है.
छात्र और अभिभावक इन संस्थानों से रहें सावधान
इसके अलावे ''इंदु देवी रणजीत कुमार प्रकाश प्रोफेशनल कॉलेज वैशाली, डॉ रंजीत कुमार प्रकाश कॉलेज वैशाली, श्री उमेश मिश्र रंजीत कुमार प्रकाश कॉलेज वैशाली, एमपीएस कॉलेज ऑफ़ हायर एजुकेशन मुजफ्फरपुर , चैतन्य कॉलेज ऑफ़ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी पटना , Shivi कॉलेज ऑफ़ हायर एजुकेशन मुजफ्फरपुर, RS विद्यापीठ रामकृष्ण नगर पटना, देव कॉलेज ऑफ़ हायर एजुकेशन मुजफ्फरपुर , प्रभु कैलाश इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट औरंगाबाद''
सूबे के 13 शिक्षण संस्थानों में गड़बड़ी की शिकायत के बाद राज्य सरकार ने इन कॉलेजों में नए आवेदन के भुगतान पर रोक लगा दिया है. इस संबंध में बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्य योजना के राज्य नोडल अधिकारी विनायक मिश्रा ने 29 अप्रैल को रोक का पत्र जारी किया है. साथ ही बिहार राज्य शिक्षा वित्त निगम के प्रबंध निदेशक को जानकारी भेजी है, ताकि नए आवेदनों का भुगतान न हो सके.
बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना (BSCCY) के तहत अनियमितताओं के कारण, शिक्षा विभाग ने 13 इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक संस्थानों में नए आवेदनों के भुगतान पर तत्काल रोक लगा दी है। इन संस्थानों में निर्धारित सीटों से अधिक बोनाफाइड जारी करने और सत्यापन में कमी पाई गई है। हालांकि, पहले से स्वीकृत आवेदनों की किस्तें जारी रहेंगी।
सूबे के 13 संस्थानों पर अनियमितता के कारण भुगतान रोका गया है। इन कॉलेजों द्वारा गलत या अधिक बोनाफाइड सर्टिफिकेट जारी करने की शिकायतें मिली थीं। हालांकि जिन छात्रों की पहली किस्त मिल चुकी है, उन्हें आगे का भुगतान मिलता रहेगा, लेकिन नए आवेदन रुक गए हैं। इस कदम से शिक्षा लोन की प्रक्रिया में देरी हुई है, जिससे कई छात्रों की पढ़ाई पर असर पड़ सकता है




