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बर्खास्त चीफ इंजीनियर तारिणी दास पर ED का शिकंजा, SVU को FIR दर्ज करने का आग्रह

ED ने SVU के ADG को पत्र लिखकर बर्खास्त चीफ इंजीनियर तारिणी दास के खिलाफ आपराधिक धाराओं में FIR दर्ज करने की मांग की है। मार्च 2025 की रेड में उनके ठिकाने से 8.57 लाख नकद बरामद किए गए थे।

Bihar
एफआईआर की सिफारिश
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Jitendra Vidyarthi
3 मिनट

PATNA: भ्रष्टाचार के गंभीर मामलों में घिरे बिहार के भवन निर्माण विभाग के बर्खास्त चीफ इंजीनियर तारिणी दास पर अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। ईडी ने इस मामले में राज्य सतर्कता इकाई (SVU) के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADG) को पत्र लिखकर तारिणी दास के विरुद्ध आपराधिक गतिविधियों से संबंधित धाराओं में नया प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की अनुशंसा की है।


PMLA एक्ट के तहत कार्रवाई की तैयारी

ईडी ने पत्र में स्पष्ट किया है कि वह प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के अंतर्गत तारिणी दास पर कानूनी कार्रवाई करना चाहती है। लेकिन इसके लिए आवश्यक है कि पहले SVU द्वारा उनके खिलाफ आपराधिक गतिविधियों से संबंधित FIR दर्ज की जाए। इसी उद्देश्य से ईडी ने SVU के एडीजी को औपचारिक अनुरोध भेजा है।


मार्च 2025 में हुई थी बड़ी छापेमारी

गौरतलब है कि ईडी ने 27 मार्च 2025 को तारिणी दास समेत अन्य आठ वरिष्ठ अधिकारियों के आवासों और कार्यालयों पर एक साथ बड़े स्तर पर छापेमारी की थी। इस दौरान कुल 11.64 करोड़ रुपये नकद की बरामदगी हुई थी, जिसमें से केवल तारिणी दास के आवास से 8.57 लाख रुपये नकद मिले थे।


ED की नजर में संदिग्ध लेन-देन और संपत्ति

छापेमारी के बाद ईडी को तारिणी दास की आय से अधिक संपत्ति, संदिग्ध बैंक ट्रांजेक्शन्स और कई अन्य वित्तीय अनियमितताओं के साक्ष्य मिले हैं। यही कारण है कि ईडी अब यह मामला धनशोधन की श्रेणी में लेकर चल रही है और तारिणी दास पर मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज करने की प्रक्रिया में जुट गई है।


भ्रष्टाचार पर अब होगी दोहरी मार?

अगर SVU द्वारा आपराधिक धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की जाती है, तो ईडी के पास यह अधिकार होगा कि वह तारिणी दास के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की कार्रवाई तेज़ी से शुरू कर सके। इससे तारिणी दास की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं और बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई को भी नई धार मिलेगी..


बिहार में भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों पर ईडी अब और सख्त रुख अपनाने लगी है। तारिणी दास के खिलाफ जारी यह कार्रवाई ना केवल प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है, बल्कि यह राज्य सरकार के भीतर जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर भी बड़े सवाल खड़े कर रही है। अब देखना होगा कि SVU इस सिफारिश पर कितनी तेज़ी से कार्रवाई करता है और यह मामला किस दिशा में बढ़ता है।

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