8th Pay Commission Latest updates: केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स की निगाहें इस वक्त 8वें पे कमीशन पर टिकी हुई हैं। हर बार की तरह इस बार भी उम्मीदें आसमान पर हैं—किसी को बेसिक सैलरी में बड़ा उछाल चाहिए तो कोई भत्तों में भारी बढ़ोतरी की आस लगाए बैठा है। लेकिन ताजा एक्सपर्ट्स रिपोर्ट ने इन उम्मीदों को थोड़ा झटका जरूर दिया है। संकेत साफ हैं कि इस बार ‘बड़ी छलांग’ की जगह ‘सीमित बढ़ोतरी’ ही देखने को मिल सकती है।
दरअसल, 8वें पे कमीशन से करीब 50 लाख केंद्रीय कर्मचारी और 65 लाख पेंशनर्स सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं। ऐसे में इसका असर देश के एक बड़े वर्ग पर पड़ने वाला है। कर्मचारी संगठनों की तरफ से जोरदार मांग उठ रही है कि फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाकर 3.83 किया जाए। अगर ऐसा होता है तो न्यूनतम बेसिक सैलरी 18,000 रुपये से बढ़कर करीब 69,000 रुपये तक पहुंच सकती है। यही वजह है कि कर्मचारियों के बीच इस बार काफी उत्साह देखने को मिल रहा है।
लेकिन दूसरी तरफ एक्सपर्ट्स का आकलन कुछ और ही कहानी बयां कर रहा है। वित्तीय विश्लेषकों और ब्रोकरेज फर्म्स के मुताबिक, सरकार इतना बड़ा वित्तीय बोझ उठाने से बच सकती है। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि फिटमेंट फैक्टर 1.8 से 2.46 के बीच रखा जा सकता है। अगर ऐसा हुआ तो सैलरी में बढ़ोतरी महज 13% से 14% के आसपास ही सीमित रह सकती है। कुछ मामलों में यह बढ़ोतरी 30% तक भी जा सकती है, लेकिन वह सभी कर्मचारियों के लिए समान नहीं होगी।
कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि पिछले एक दशक में महंगाई तेजी से बढ़ी है। रोजमर्रा की जरूरतों से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास तक हर चीज महंगी हो चुकी है। ऐसे में सैलरी में बड़ा इजाफा जरूरी है ताकि कर्मचारियों की क्रय शक्ति बनी रहे। नेशनल काउंसिल (JCM) का कहना है कि अगर फिटमेंट फैक्टर 3.83 किया जाता है तो न सिर्फ वर्तमान कर्मचारियों को फायदा मिलेगा, बल्कि पेंशनर्स को भी अधिक पेंशन का लाभ मिलेगा।
इसके अलावा, कुछ संगठनों जैसे FNPO ने भी फिटमेंट फैक्टर को 3 से ऊपर ले जाने की मांग रखी है। उनका मानना है कि इससे सरकारी और निजी क्षेत्र के बीच सैलरी का अंतर कम होगा और कर्मचारियों का मनोबल भी बढ़ेगा।
हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार को आर्थिक संतुलन बनाए रखना होगा। कोरोना के बाद की आर्थिक चुनौतियां, बढ़ता राजकोषीय घाटा और अन्य खर्चों को देखते हुए सरकार बहुत बड़ा वेतन बोझ लेने से बच सकती है। यही वजह है कि अनुमान लगाया जा रहा है कि इस बार पे कमीशन में संतुलित और सीमित बढ़ोतरी का रास्ता अपनाया जाएगा।
Ambit Capital और अन्य वित्तीय संस्थानों ने भी अपने अनुमान में फिटमेंट फैक्टर को करीब 1.82 बताया है, जिससे सैलरी में लगभग 14% तक की बढ़ोतरी संभव है। ऐसे में कर्मचारियों को यह समझना होगा कि इस बार उम्मीदों और हकीकत के बीच थोड़ा अंतर रह सकता है।
गौरतलब है कि 8वें पे कमीशन का गठन 3 नवंबर 2025 को किया गया था। इस आयोग की अध्यक्षता जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं, जबकि प्रोफेसर पुलक घोष इसके सदस्य हैं। आयोग को अपनी सिफारिशें तैयार करने और सरकार को सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। इस दौरान आयोग कर्मचारियों की सैलरी, भत्तों, पेंशन और अन्य सुविधाओं पर विस्तृत अध्ययन करेगा।

