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वाराणसी–कोलकाता ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे से बिहार को मिलने जा रहा बड़ा लाभ, इन 9 जिलों की बदल जाएगी तस्वीर

Varanasi Kolkata Expressway: वाराणसी से कोलकाता तक बनने वाला 610 किमी ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे बिहार के 9 जिलों को सीधा जोड़ते हुए कनेक्टिविटी, व्यापार और रोजगार को नई रफ्तार देगा। यह प्रोजेक्ट 2028 तक पूरा होने की उम्मीद है।

Varanasi Kolkata Expressway
प्रतिकात्मक तस्वीर
© Google
Mukesh Srivastava
3 मिनट

Varanasi Kolkata Expressway: बिहार को जल्द ही एक और बड़ी सड़क सौगात मिलने जा रही है। वाराणसी से कोलकाता तक बन रहे 610 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का सबसे बड़ा लाभ बिहार को मिलने वाला है। यह हाईस्पीड कॉरिडोर राज्य के 9 अहम जिलों को सीधे उत्तर प्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल से जोड़ेगा, जिससे दक्षिण बिहार की कनेक्टिविटी पूरी तरह बदल जाएगी।


इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने के बाद कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद और गया जैसे जिलों से वाराणसी और कोलकाता का सफर बेहद आसान हो जाएगा। करीब 35 हजार करोड़ रुपये की लागत से बन रहा यह प्रोजेक्ट सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि एक बड़ा आर्थिक कॉरिडोर माना जा रहा है।


एक्सप्रेसवे जहां-जहां से गुजरेगा, वहां इंडस्ट्री, वेयरहाउस, होटल और ट्रांसपोर्ट सेक्टर में तेजी से विकास की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे दक्षिण बिहार में निवेश बढ़ेगा और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। गया और औरंगाबाद जैसे क्षेत्र लॉजिस्टिक हब के रूप में उभर सकते हैं।


इस एक्सप्रेसवे के बनने के बाद वाराणसी से कोलकाता की यात्रा का समय लगभग आधा रह जाएगा। जहां अभी यह सफर 12 से 14 घंटे में पूरा होता है, वहीं भविष्य में यह केवल लगभग 6 घंटे में संभव होगा। इससे व्यापारियों, ट्रांसपोर्टरों और आम यात्रियों को बड़ा लाभ मिलेगा और माल ढुलाई भी तेज और सस्ती हो जाएगी।


यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के वाराणसी रिंग रोड के पास बरहौली गांव से शुरू होगा। इसके बाद यह बिहार के कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद और गया से होकर झारखंड में प्रवेश करेगा। झारखंड में यह चतरा, हजारीबाग, रामगढ़, बोकारो और पीटरबार जैसे क्षेत्रों को जोड़ेगा, और आगे पश्चिम बंगाल के पुरुलिया, बांकुड़ा, हुगली और हावड़ा होते हुए कोलकाता पहुंचेगा।


झारखंड और पश्चिम बंगाल में पर्यावरण मंजूरी की वजह से कुछ समय तक परियोजना अटकी रही, लेकिन अब केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद निर्माण कार्य में तेजी आने की उम्मीद है। वन्यजीव क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए विशेष सुरक्षा योजना भी तैयार की गई है, ताकि हाथियों और बाघों के प्राकृतिक आवागमन पर असर न पड़े।


सरकारी योजना के अनुसार, वाराणसी–कोलकाता एक्सप्रेसवे का निर्माण मार्च 2028 तक पूरा किया जा सकता है। इसके बाद बिहार को भी दिल्ली–मुंबई जैसे हाईस्पीड कॉरिडोर की तर्ज पर आधुनिक सड़क सुविधा मिलेगी। कुल मिलाकर यह परियोजना आने वाले समय में बिहार की अर्थव्यवस्था, उद्योग और कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने वाली साबित हो सकती है।

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रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता

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