BEGUSARAI: बेगूसराय समाहरणालय स्थित कारगिल विजय सभा भवन में आयोजित जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक के दौरान उस समय राजनीतिक माहौल गरमा गया, जब बैठक स्थल के बाहर जदयू के जिला नगर अध्यक्ष पंकज कुमार सिंह अपनी ही सरकार के खिलाफ नाराजगी जाहिर की। उन्होंने आरोप लगाया कि दिशा की बैठकों में केवल औपचारिक समीक्षा होती है, लेकिन भ्रष्टाचार और विकास योजनाओं में गड़बड़ियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती।
पंकज कुमार सिंह ने कहा कि दिशा की बैठक हर महीने विकास योजनाओं की समीक्षा के लिए होती है, लेकिन महीनों पहले शिक्षा विभाग में बेंच-डेस्क खरीद में करोड़ों रुपये के कथित घोटाले का मुद्दा उठाया गया था, जिसका आज तक न तो कोई जवाब मिला और न ही किसी पर कार्रवाई हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा मद की राशि की खुलेआम लूट हो रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी मौन हैं।
उन्होंने कहा कि जिले में सरकारी जमीनों पर कब्जा कर जमाबंदी कराने वाले लोग भी दिशा समिति की बैठकों में शामिल हो रहे हैं। यूजीसी और एडीएम के निर्देशों के बावजूद अंचलाधिकारी अवैध जमाबंदी रद्द नहीं कर रहे हैं और आम लोग आज भी अंचल कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
जदयू नेता ने सदर अस्पताल की व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अस्पताल में साफ-सफाई की स्थिति बदहाल है, मरीजों का इलाज प्रभावित है और आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विकास योजनाओं में व्यापक धांधली हो रही है और शिकायत करने वालों को ही प्रताड़ित किया जा रहा है। यहां तक कि जिन अधिकारियों के खिलाफ शिकायत होती है, उन्हीं को जांच की जिम्मेदारी सौंप दी जाती है।
पंकज कुमार सिंह ने एनटीपीसी की सीएसआर योजनाओं पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सोलर लाइट और अन्य विकास कार्यों का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक नहीं पहुंचा। उन्होंने पूछा कि महादलित और अतिपिछड़ा बस्तियों में आखिर कितनी योजनाएं धरातल पर उतरीं। कई योजनाओं में राशि निकाल ली गई, लेकिन काम आज तक पूरा नहीं हुआ।
उन्होंने जिला परिषद में हुए धरना, जांच समिति के गठन और उसकी रिपोर्ट का भी जिक्र करते हुए कहा कि आज तक किसी जांच का नतीजा सामने नहीं आया। उनके अनुसार जिले में विकास योजनाओं में पारदर्शिता का अभाव है और जनता जवाब चाहती है।
सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए पंकज कुमार सिंह ने कहा कि यदि बिहार में सुशासन और डबल इंजन की सरकार होने का दावा किया जा रहा है, तो फिर आम जनता सरकारी दफ्तरों के चक्कर क्यों काट रही है। उन्होंने कहा कि "सरकार जनता की कम, अफसरशाहों और मठाधीश बने जनप्रतिनिधियों की ज्यादा हो गई है। आम आदमी आज भी अपने अधिकार के लिए भटक रहा है।"
उन्होंने अपने क्षेत्र के एक दलित परिवार के कुक्कुट पालन केंद्र का उदाहरण देते हुए कहा कि तीन वर्षों से अतिक्रमण हटाने की मांग की जा रही है, लेकिन प्रशासन ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की। इससे दर्जनों परिवारों का रोजगार प्रभावित है। अंत में जदयू नेता ने कहा कि यदि विकास योजनाओं और प्रशासनिक अनियमितताओं पर निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई, तो जनता का सरकार और व्यवस्था से विश्वास पूरी तरह उठ जाएगा।





